सफलता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

29 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (28 बार पढ़ा जा चुका है)

सफलता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन पाकर के प्रत्येक व्यक्ति सफल होना चाहता है | जीवन के सभी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला मनुष्य अपने उद्योग , प्रबल भाग्य एवं पारिवारिक सदस्यों तथा गुरुजनों के दिशा निर्देशन में सफलता प्राप्त करता है | परंतु मनुष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितना सकारात्मक है | सकारात्मकता के साथ प्राप्त की गई सफलता चिरस्थाई होती है जबकि जो भी मनुष्य नकारात्मक हो जाता है व अपनी सफलता का श्रेय स्वयं को या अपने भाग्य को देने लगता है शेष परिवारी जनों एवं गुरुजनों को दरकिनार कर देता है वह बहुत दिन तक सफल नहीं रह सकता | पूर्व काल में रावण जैसा त्रैलोक्यविजयी एवं सफल व्यक्ति न तो हुआ है न आगे होने की संभावना है , परंतु रावण की नकारात्मक सोच उसके पतन का कारण बनी | उच्च पद पर आसीन हो जाने के बाद अपने गुरुजनों , सलाहकारों एवं पारिवारिक सदस्यों की अवहेलना करने वाला एवं यह कहने वाला कि "यह सफलता तो मैंने अपनी मेहनत एवं भाग्य से प्राप्त किया है" मनुष्य सफल नहीं कहा जा सकता | उसकी सफलता बहुत दिन तक नहीं टिक सकती | मनुष्य को अपने आसपास रहने वाले एवं किसी भी कार्य में सहायता , दिशा निर्देशन करने वाले व्यक्ति को कभी नहीं भूलना चाहिए , यदि वह ऐसा करता है तो उसे यह समाज कृतघ्न कहने लगता है | यह सत्य है कि किसी भी सफलता में मनुष्य की मेहनत एवं उसका भाग्य अहम योगदान निभाते हैं परंतु इसके साथ ही उस लक्ष्य का दिशानिर्देश करने वाले गुरुजनों एवं परिवारी जनों तथा मित्रों के योगदान को भी कभी नहीं भूलना चाहिए | यदि मनुष्य अपनी मेहनत एवं अपने भाग्य के भरोसे ही आगे बढ़ सकता तो शायद उसे कभी भी विद्यालय में शिक्षा लेने की आवश्यकता पड़ती | किसी भी सफलता में सहायक लोगों को एवं उनके योगदान कभी नहीं भूलना चाहिए |* *आज हम ऐसे युग में जीवन यापन कर रहे हैं जिसे आधुनिक युग कहा जाता है | आज के युग में संस्कार एवं संस्कृति का लोप होता दिखाई पड़ रहा है | इसे पाश्चात्य संस्कृति की धमक कहें या सनातन संस्कृति की असफलता कही जाय | आज का युवा वर्ग यदि किसी कार्य में सफल भी हो जाता है तो इसका सारा श्रेय स्वयं की मेहनत एवं अपने प्रारब्ध को ही देता है , और यह कहते हुए भी सुना जाता है मैंने जो भी किया है अपनी मेहनत के बल पर किया इसमें किसी का कोई सहयोग नहीं | आज पिता के सहारे समाज में स्थापित होकर सफल होने वाला पुत्र भी अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को भी नहीं देना चाहता | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि मनुष्य अपनी मेहनत एवं अपने भाग्य के भरोसे तो आगे बढ़ता ही है परंतु इसमें सिर्फ उसके भाग्य और मेहनत का ही योगदान नहीं होता है बल्कि योगदान उस माता-पिता का भी होता है जिसने उंगली पकड़कर चलना सिखाया | योगदान उस गुरु का भी होता है जिसने उस लक्ष्य के विषय में आपको अवगत कराया | विचार कीजिए कि यदि परिवारी जनों का सहयोग ना होता तो हम शायद विद्यालय तक ना पहुंच पाते , और यदि गुरुजनों के द्वारा हमें किसी भी लक्ष्य के विषय में ज्ञान न कराया जाता एवं उसे प्राप्त करने के लिए उत्साह वर्धन न किया जाता तो क्या मनुष्य सफल हो सकता था ? मेरे विचार से तो कदापि नहीं | जब हम जानते हैं हमारी सफलता के पीछे माता पिता , गुरुजन ढाल बनकर खड़े होते हैं तो फिर ऐसा क्यों होता है कि मनुष्य एक समय आने पर उनको अनदेखा करने लगता है एवं सफलता का सारा से अपनी मेहनत एवं अपने भाग्य को ही देने लगता है | शायद यही कृतघ्नता की पराकाष्ठा है |* *सफलता प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त करनी चाहिए | मानव जीवन का उद्देश्य होता है सफलता प्राप्त करना | परंतु किसी भी सफलता के पीछे उपस्थित कारणों के प्रति कभी भी नकारात्मक होकर कृतघ्न नहीं होना चाहिए |*

अगला लेख: कर्मफल :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
25 मार्च 2019
*चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव योनि कही गयी है | मनुष्य का जन्म मिलना है स्वयं में सौभाग्य है | देवताओं की कृपा एवं पूर्वजन्म में ऋषियों के द्वारा दिए गए सत्संग के फलस्वरूप जीव को माता पिता के माध्यम से इस धरती पर मानव रूप में आने का सौभाग्य प्राप्त होता है | इस प्रकार जन्म लेकर के मनुष्य
25 मार्च 2019
27 मार्च 2019
*परमात्मा द्वारा सृजित यह सृष्टि बड़ी ही विचित्र है | ईश्वर ने चौरासी लाख योनियों की रचना की ! पशु , पक्षी , मनुष्य , जलचर आदि जीवों का सृजन किया | कहने को तो यह सभी एक जैसे हैं परंतु विचित्रता यही है कि एक मनुष्य का चेहरा दूसरे मनुष्य से नहीं मिलता है | असंख्य प्रकार के जीव हैं , एक ही योनि के होन
27 मार्च 2019
20 मार्च 2019
*सनातन धर्म के संस्कार , संस्कृति एवं वैज्ञानिकता सर्वविदित है | सनातन धर्म के महर्षियों ने जो भी नीति नियम बनाये हैं उनमें गणित से लेकर विज्ञान तक समस्त सूत्र स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं | सनातन धर्म के संस्कार रहे हैं कि मनुष्य जब गुरु के यहां जाता था तब वह सेवक बनकर जाता था | इस पृथ्वी पर एकछत्र शासन
20 मार्च 2019
27 मार्च 2019
*परमात्मा द्वारा सृजित यह सृष्टि बड़ी ही विचित्र है | ईश्वर ने चौरासी लाख योनियों की रचना की ! पशु , पक्षी , मनुष्य , जलचर आदि जीवों का सृजन किया | कहने को तो यह सभी एक जैसे हैं परंतु विचित्रता यही है कि एक मनुष्य का चेहरा दूसरे मनुष्य से नहीं मिलता है | असंख्य प्रकार के जीव हैं , एक ही योनि के होन
27 मार्च 2019
20 मार्च 2019
*आदिकाल में जब इस सृष्टि में मनुष्य का प्रादुर्भाव हुआ तो उनको जीवन जीने के लिए वेदों का सहारा लेना पड़ा | सर्वप्रथम हमारे सप्तऋषियों ने वेद की रचनाओं से मनुष्य के जीवन जीने में सहयोगी नीतियों / रीतियों का प्रतिपादन किया जिन्हें "वेदरीति" का नाम दिया गया | फिर धीरे धीरे धराधाम पर मनुष्य का विस्तार ह
20 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*इस धराधाम पर सर्वोच्च प्राणी मनुष्य ने अपने व्यवहार व कुशल नीतियों के कारण समस्त पृथ्वी पर शासन करता चला आ रहा है | मानव जीवन में कौन किसका हितैषी है और कौन विपक्षी यह मनुष्य के वचन एवं व्यवहार से परिलक्षित होता रहा है | मनुष्य जीवन में मनुष्य अपने वचन पर स्थिर रहते हुए वचन पालन करते हुए समाज में स
16 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों के माध्यम से प्रतिपादित किया गया है | ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ एवं सन्यास | सनातन धर्म में आश्रम व्यवस्था विशेष महत्व रखती है | यही आश्रम व्यवस्था मनुष्य के क्रमिक विकास के चार सोपान हैं , जिनमें धर्म , अर्थ , काम एवं मोक्ष आदि पुरुषार्थ चतुष्टय के समन
16 मार्च 2019
20 मार्च 2019
*भारतीय संस्कृति में समय-समय पर त्यौहार एवं पर्वों का आगमन होता रहता है | यह त्यौहार भारतीय संस्कृति की दिव्यता तो दर्शाते ही हैं साथ ही सामाजिकता एवं वैज्ञानिकता को भी अपने आप में समेटे हुए हैं | विभिन्न त्यौहारों में होली का अपना एक अलग एवं महत्त्वपूर्ण स्थान है | होली मनाने के एक दिन पूर्व "होलि
20 मार्च 2019
20 मार्च 2019
*आदिकाल में जब इस सृष्टि में मनुष्य का प्रादुर्भाव हुआ तो उनको जीवन जीने के लिए वेदों का सहारा लेना पड़ा | सर्वप्रथम हमारे सप्तऋषियों ने वेद की रचनाओं से मनुष्य के जीवन जीने में सहयोगी नीतियों / रीतियों का प्रतिपादन किया जिन्हें "वेदरीति" का नाम दिया गया | फिर धीरे धीरे धराधाम पर मनुष्य का विस्तार ह
20 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*इस पृथ्वी पर जन्म लेने के बाद मनुष्य का परम लक्ष्य होता है भगवतप्राप्ति करना | भगवान को प्राप्त करने के लिए हमारे महापुरुषों ने अनेकानेक उपाय बताये हैं | अनेक उपाय करने के पहले आवश्यक है कि मनुष्य के हृदय में भक्ति का उदय हो क्योंकि बिना भक्ति के भगवान को प्राप्त कर पाना कठिन ही नहीं वरन् असम्भव है
16 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*सनातन काल से मनुष्य भगवान को प्राप्त करने के अनेकानेक उपाय करता रहा है , परंतु इसके साथ ही भगवान का पूजन , ध्यान एवं सत्संग करने से कतराता भी रहता है | मनुष्य का मानना है कि भगवान का भजन करने के लिए एक निश्चित आयु होती है | जबकि हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के जीवन का कोई भरोसा नहीं ह
16 मार्च 2019
27 मार्च 2019
*ईश्वर की बनाई इस महान श्रृष्टि में सबसे प्रमुखता कर्मों को दी गई है | चराचर जगत में जड़ , चेतन , जलचर , थलचर , नभचर या चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करने वाला कोई भी जीवमात्र हो | सबको अपने कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ता है | ईश्वर समदर्शी है , ईश्वर की न्यायशीलता प्रसिद्ध है | ईश्वर का न्याय सिद्ध
27 मार्च 2019
21 मार्च 2019
*रामनवमी का पवित्र दिवस जिसे श्री राम के प्राकट्योत्सव के रूप में मनाया जाता है दो दिन बाद आने वाला है | प्रतिवर्ष हम सभी बड़े हर्षोल्लास के यह पर्व मनाते चले आ रहे हैं | एक दिन यह पर्व मनाकर हम फिर इसे या भगवान राम के बताये मार्गों को भूलने लगते हैं | मर्यादापुरुषोत्तम की मर्यादा का पालन करना आज हम
21 मार्च 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x