पुस्तक का महत्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

29 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (86 बार पढ़ा जा चुका है)

पुस्तक का महत्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जो एक समाज में रहता है | किसी भी समाज में रहने के लिए मनुष्य को समाज से संबंधित बहुत से विषय का ज्ञान होना चाहिए , और मानव जीवन से संबंधित सभी प्रकार के ज्ञान हमारे महापुरुषों ने पुस्तकों में संकलित किया है | पुस्तकें हमें ज्ञान देती हैं | किसी भी विषय के बारे में जानने के लिए हम भले ही विद्यालय गुरु के पास जाते हैं परंतु ज्ञान का स्रोत इन पुस्तकों में ही मिलता है | जो इन पुस्तकों का अध्ययन करता है उसका सामाजिक और मानसिक विकास होता है | मनुष्य का उचित मार्गदर्शन करके पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती है , जिन्हें पढ़कर मनुष्य अपनी संस्कृति व सभ्यता के विषय में ज्ञान प्राप्त करता है | इस नश्वर संसार में सब कुछ परिवर्तनशील है | अनेक पौराणिक एवं ऐतिहासिक भवन एवं घटनाएं भले ही नष्ट हो गई है परंतु आज भी हमारी पुस्तकों में यह सब सुरक्षित है , जिनको पढ़कर के मनुष्य अपने इतिहास के विषय में जान पाता है | वहीं धार्मिक पुस्तकों को पढ़करके मनुष्य परम शांति का अनुभव करता है | पुस्तकों में लिखी हुई प्रत्येक बात जीवन के किसी न किसी पड़ाव में अवश्य काम आती है | यह सब देखते हुए कहा जा सकता है कि पुस्तकों का मानव जीवन पर बहुत महत्व है , जो मनुष्य को संस्कार और ज्ञान दे करके मानव से महामानव बना सकती हैं | इस संसार में पुस्तकें अमर हैं उनका कभी निधन नहीं होता है | बहुत सी प्राचीन पुस्तक लिखने वालों का तो निधन हो गया लेकिन उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक आज भी जीवित है , और मानव मात्र का मार्गदर्शन कर रही हैं | प्रत्येक मनुष्य समय समय पर पुस्तकों का अध्ययन अवश्य करते रहना चाहिए |* *आज हमारे देश का दुर्भाग्य है कि आज की अधिकतर युवा पीढ़ी की पुस्तकों के अध्ययन की आदत कम हो रही है अर्थात हमारी युवा पुस्तकों से अपनी दूरी बना रहे है | यदि देखा जाय तो एक और जहां हिन्दी पुस्तकों को पढ़ने के प्रति युवाओं में अरुचि पैदा हुई है तो वही संपन्न वर्ग की पसंदीदा अंग्रेजी पुस्तकों के प्रकाशन में तेजी आई है | युवा पीढ़ी के लोग पुस्तकों का अध्ययन न करने के पीछे अपना यह तर्क दे सकते हैं कि आज उनके पास स्मार्टफोन और कंप्यूटर है , और इंटरनेट पर गूगल सर्च का इस्तेमाल करके कोई भी सूचना आसानी से प्राप्त कर सकते हैं | एक सीमा तक उनका यह तर्क सही भी है क्योंकि इनके माध्यम से किसी भी तरह की जानकारी को घर बैठे आसानी से देखा जा सकता है | परंतु मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि पढ़ने का जो आनन्द हमें पुस्तकों में मिलता है वह आनन्द हमें इंटरनेट के माध्यम से , या मोबाइल / कंप्यूटर से पढ़ने से नहीं प्राप्त हो सकता है | इन उपकरणों पर अधिक देर तक देखते रहने से आंखों में तनाव परेशानी बढ़ती है जबकि पुस्तकों को देर तक आसानी से पढ़ा जा सकता है | प्रत्येक मनुष्य को अच्छी पुस्तकें पढ़ने की आदत होनी चाहिए , क्योंकि कुछ अच्छा पढ़ने की प्रक्रिया से हमारे मन को मानसिक आहार मिलता है , विचारों को पोषण मिलता है और व्यक्ति के अंदर मानसिक समझदारी विकसित होती है | मनुष्य को अपने व्यक्तित्व में जिस तरह के आयाम का विकास करना हो उससे संबंधित पुस्तकों को उसे अवश्य पढ़ना चाहिए और उनकी अच्छे विचारों को ग्रहण करना चाहिए |* *यह सत्य है कि इंटरनेट व गूगल सर्च से हमें सभी प्रकार की जानकारियां प्राप्त हो रही हैं परंतु इनको पुस्तकों के विकल्प के रूप में नहीं रखा जा सकता है | इंटरनेट , गूगल सर्च पुस्तकों का विकल्प कभी भी नहीं बन सकता है |*

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