आस्था

02 अप्रैल 2019   |  रितिका दीक्षित गौतम   (73 बार पढ़ा जा चुका है)

हे ईश्वर , यदि तुम हो,तो कहो

कौनसा अपराध ऐसा हुआ?

जिसका दंड ऐसा मिला ?

तुमने ही कहा था, पत्ता भी न हिलेगा

बिन इच्छा के तुम्हारे, अर्थात

किया तो ये तुमने ही है,

तनिक भी मन विचलित न हुआ तुम्हारा?

कहते हो हम सब तुम्हारे बच्चे हैं,

फिर किस तरह तुम इतने निर्दयी हुए?

हेईश्वर , यदितुमहो,तो सुनो

आस्था अटूट थी, पर

अब तुम्हारा अस्तित्व भी स्वीकार्य नहीं |



अगला लेख: याद



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
तु
02 अप्रैल 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x