तुम

02 अप्रैल 2019   |  रितिका दीक्षित गौतम   (67 बार पढ़ा जा चुका है)

सूनी थी नज़र,

ख्वाब देखना तुम सिखा गए

खामोश होठो को

मुस्कुरना सिखा गए

तन्हा कर जाने का

ग़िला क्या करे तुमसे

तन्हाई में भी खुश

रहना तुम सिखा गए |

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dhanywaad

आलोक सिन्हा
04 अप्रैल 2019

बहुत सुंदर ।

Vijay Singh
04 अप्रैल 2019

bahuut sunder lines h ...

Vijay Singh
04 अप्रैल 2019

bahuut sunder lines h ...

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