शराब

07 अप्रैल 2019   |  pradeep   (28 बार पढ़ा जा चुका है)

हैं नशे दुनियां में हज़ारों लेकिन,

मज़हबी नशे से बड़ा कोई नहीं.

शराब पीने को खूब बुरा कहते हैं,

वही पीके मज़हबी ज़हर यूँ मस्त हैं.

बुरा हूँ मैं क्यूँ उनकी निगाहों में ,

मैं मज़हबी नहीं नशा शराब का करता हूँ. (आलिम)

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