और क्या मँगोगे ?

09 अप्रैल 2019   |  जानू नागर   (44 बार पढ़ा जा चुका है)

और क्या मँगोगे ?

महावत से हाथी , तालाब से कमल, किसान से हल,मजदूर से साईकिल, आदिवासियों से तीर कमान, दार्जलिंग से चाय पत्ती, मानव से हाथ, गाँव से लालटेन, आसमान से चाँद तारे रंग चुराए प्रकृति से , यह राजनेता भी कितने अजीब हैं कहते हैं करते नहीं हर चुनाव मे एक नई मुसीबत मांग लेते हैं पूरा नहीं करते।

1 (रोटी, कपड़ा और मकान) परबाबा

2 (रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा) बाबा

3 ( रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, और स्वस्थ) दादा

4 (रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वस्थ और नौकरी ) पापा

5 (रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वस्थ, नौकरी और पानी ) युवा

6 ( रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वस्थ, नौकरी, पानी और मौत) पर पोता

आने वाले समय मे कुछ नहीं रह जाएगा मानव एक दूसरे को नोच-नोच के खाएगा।

और क्या मँगोगे? आने वाले समय मे सामने वाले को नोच के खाओगे।


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