ख़्याल

14 अप्रैल 2019   |  pradeep   (25 बार पढ़ा जा चुका है)

ज़ज़्बात मेरे, ख़्याल उनका, और मौसम-ए- बहारा,

ख़ुश्बू गुल की, अदा उनकी , और जश्न-ए- नज़ारा. (आलिम)


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