चुनाव जीतने के हथकंडे

17 अप्रैल 2019   |  शोभा भारद्वाज   (84 बार पढ़ा जा चुका है)

चुनाव जीतने के हथकंडे

चुनाव जीतने के हथकंडे

डॉ शोभा भारद्वाज

लोकसभा के चुनावो का सीजन चल रहा है पहला चरण समाप्त हो गया अब दूसरे चरण का चुनाव हो रहा है | चुनाव जीतने के तरीके अब पहले जैसे नहीं रहे चुनाव आयोग की कोशिश रही है निष्पक्ष रूप से चुनाव कराये जा सकें ,चुनावों में धन का अपव्यय न हो योग्य व्यक्ति चुनाव लड़ने की हिम्मत कर सके मतदाता सुयोग्य व्यक्ति को वोट दे | अब चुनाव वहुत महंगे हो चुके हैं जम करा काला धन बहाया जाता है नेताओं की नजर में पैसा, पैसा होता है न काला न सफेद उद्देश्य चुनाव जीतना है टिकट मिलने के बाद नामांकन के लिए ऐसे शानो शौकत से जाते हैं जैसे विजय जलूस, खुली जीप या ट्रकों पर सजाये गए मंचों पर उम्मीवार अपने एरिया की जनता को हाथ जोड़ते एवं हाथ हिलाते हुए निकलते हैं उनके साथ कार्यकर्त्ताओं की लम्बी भीड़ फूल बरसाती चलती है गाड़ियों की लम्बी कतारों का काफिला घरों की छतों घर की बालकनी पर तमाशा देखने वाले नजारा देखते हैं श्री राम की रावण पर विजय के उपलक्ष में दशहरे का जलूस फीका पड़ जाता हैं झांकियों को छोड़ कर सभी लाव लश्कर देखे जा सकते हैं | गांधीनगर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जी ने पर्चा भरा उनके साथ भाजपा और एनडीए घटक दलों के नेता मौजूद थे ऐसा शानदार जलूस गाँधीनगर वासी चटकारे लेकर महीनों चर्चा करेंगे |

वायनाड से राहुल जी ने पर्चा भरा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता झड़ियों बैनरों के साथ जलूस की शोभा बढ़ा रहे थे जिनमें कांग्रेस के अपने झंडे दब गए | अमेठी कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव क्षेत्र रहा है उनके पर्चा भरने की यात्रा के लिए ट्रक पर मंच सजाया गया उनके साथ उनकी बहन प्रियंका ,प्रियंका के पति राबर्ड बाड्रा उनके दोनों बच्चे, गाड़ी में सोनिया गांधी जी सवार थीं ,पूरा परिवार तीनों पीढ़िया मौजूद थी | विशाल रोड शो किसी दल का आठ मील तो किसी का बारह मील ,कई मील लम्बे काफिले के साथ नामांकन भरनें जाना आज का चुनावी प्रोपगंडा है सड़को पर भारी जाम से त्रस्त लोग घंटो जाम खुलने का इंतजार करते हैं | चुनावी रैलियों में दूर दराज से लोगों को गाड़ियों एवं बसों में भर कर लाया जाता है रैलियों में भीड़ देख कर हैरानी होती है इतनी भीड़ लाई कैसे जाती है क्या जनता के पास अपना कोइ काम नहीं था स्पष्ट है ज्यादातर दिहाड़ी देकर भीड़ लाई गयी है ?भीड़ क्या वोट में परिवर्तित हो सकेगी इसकी गारंटी नहीं है | नेताओं के भाषण के लिए शानदार ऊंचे मंच बनाये जाते हैं मंच पर अपनी सूरत दिखाने के लिए कार्यकर्ता बेचैन रहते हैं कई बार मंच ही टूट जाता है मंच पर सम्मानीय मुख्य वक्ता के गले में उनके वजन से भी बड़ा फूलों का हार पहना कर पहनाने वाले भी अपना चेहरा दिखाते हैं फोटो सेशन होता है |
भाषणों के दौरान प्रतिद्वंदी पार्टियों और नेताओं पर बिना प्रूफ के आरोप प्रत्यारोपों की झड़ी लगाना, बिना सोचे समझे ऐसे बोल बोलना जैसे एक दूसरे के दुश्मन आमने सामने खड़े हैं , नये सूत्र गढ़े जाते हैं | मुस्लिम वोट बैंक को जतलाया जाता है तुम हमारे वोट बैंक हो उनके कल्याण या विकास की चिंता के स्थान पर उनको वोट बैंक बनाने की होड़ लग जाती है हर दल बढ़ चढ़ कर उनके कल्याण के दावे करते हैं उनको मंचों से समझाया जाता है वही उनके सच्चे हित चिंतक है अपना वोट बटने नहीं देना है मुस्लिम कार्ड खेलना पहले कांग्रेस अपना अघिकार समझती थी अब अन्य दल सपा ,बसपा और आरजेडी ( माई मुस्लिम एवं यादव ) ने वोट बैंक में सेंध लगा ली कई मुस्लिम नेता भी अपनी पार्टियाँ बना कर मुस्लिम समाज को एक जुट कर रहे हैं | ओबेसी भी मुस्लिम समाज के हमदर्द बन कर बड़े बड़े डायलाग बोल कर मुस्लिम समाज के बल पर राष्ट्रीय नेता बनने के इच्छुक हैं| भाजपा को मुस्लिम विरोधी दल करार किया जा रहा है उनका अपना तर्क है हमें मुस्लिम वोट नहीं देते हम सबका विकास सबको साथ लेकर चलते हैं ,विकास में सबकी हिस्सेदारी होती है ट्रिपल तलाक का मामला भी जोर शोर से चल रहा है|मुस्लिम समाज को रिझाना फैशन बन गया है | सपा नेता मंच पर आसीन थे उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश भी मौजूद थे सपा के शक्तिशाली गाजी प्रवृति के नेता चुनाव में उम्मीदवार ने भाजपा की उम्मीदवार जयप्रदा के लिए ऐसे अपशब्दों का प्रयोग किया जिससे मानवता भी शर्मा जाए यह जनाब संसद के निचले सदन लोकसभा की शोभा बढ़ाने का स्वप्न देख रहें हैं | हैरानी दिग्गज महिला नेताओं पर हुई जिन्हें ऐसे नेता के विरोध में शब्द नहीं मिले | आबादी की आधी जनसंख्या महिलाएं हैं उनका वोट चाहिए | महिला नेता पर भद्दे कमेंट करने वाले महानुभाव को चुनाव आयोग ने बस तीन दिन के लिए उनके द्वारा किये जाने वाले चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी | आजम खां के पुत्र ने मुस्लिम कार्ड खेलने में जरा भी देर नहीं लगाई देश का बुद्धिजीवी वर्ग भी अधिकांशतया मौन रहा जैसे ही ऐसे अपमान करने वाले शब्द बोलते ही मीडिया की सुर्ख़ियों में छा जाते हैं |उनके पक्ष एवं विपक्ष में बहस शुरू हो जाती है | ऐसे विवादित बोल बोले जाते हैं जिससे मीडिया आकर्षित हो कर हेड लाइन बना ले |बिना कुछ बोले प्रोपगंडा शुरू हो जाये उनके पक्ष में लहर बने|
आज का जागरूक मीडिया विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा अनेक चुनावी विषयों पर बहस कराते हैं जनता को भी सवाल पूछने का मौका दिया जाता है लेकिन ज्यादा तर बहसों में शोर अधिक होता है प्रत्येक प्रवक्ता एक दूसरे की बात ही काटते नजर आते हैं कुछ समझ नहीं आता वह कहना क्या चाहते हैं ?अब जिन जिलों में चुनाव होना है मीडिया की टीम वहीँ पहुंच जाती है लोकल लोगों को इकठ्ठा कर उनको भी अपनी बात कहने का मौका मिलता है जनमत बनाने का अच्छा प्रयत्न है लेकिन चैनल निष्पक्ष वार्ता कराएं घुमा फिरा कर अपनी ही बात पर मोहर न लगवाएं तब सही जनमत बनता है | कुछ प्रवक्त्ता बहस के मूड में न होकर अपने आप को सताया हुआ बताने की कोशिश में चैनलों का प्राईम टाईम खराब करते हैं पुरानी घिसी पिटी बातें टीवी दर्शक भी चुनावी बहस सुनने के बजाय सीरियल देखने में अधिक रूचि लेते हैं| नोट बंदी जीएसटी को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की गयी भाजपा के प्रचारक उसके लाभ गिना रहे हैं अन्य दल उससे होने वाले नुक्सान बता रहें हैं | ा मुद्दे कम हैं राहुल जी चौकीदार जनता से चोर है के हर मंच के पर नारे लगवा रहे हैं प्रधान मंत्री विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के लोकसभा में बहुमत दल के नेता हैं हैरानी होती हैं अब इसकी तोड़ निकाली गयी है भाजपा के हर नेता अपने साथ मैं भी चौकीदार लिख रहे हैं |
रिजल्ट आने से पहले ही प्री पोल का चैनलों में चलन बढ़ा है कुछ लोगों से पूछ कर किस दल के कितने उम्मीदवार विजयी होंगे लेकिन अब चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है |
चुनावी परिणाम पूरी तरह से प्रोपगंडे पर ही आधारित नहीं होते कई तिकड़में लगाई जाती हैं आज का मतदाता जागरूक है प्रिंट मीडिया में खबरों के अलावा सम्पादकीय में अच्छे लेखकों के लेख छपते हैं लोग उन्हें पढ़ते ही नहीं आपस में बहस भी ककरते हैं | पहले चुनावों में बाहुबलियों को चुनाव में ठेका दिया जाता था मतदान की शुरूआत ही बूथ कैप्चरिंग से होती थी सब के वोट पर एक उम्मीदवार का ठप्पा लगा दिया जाता था पुलिस देखती रहती थी, मतदाता भय से बोल नहीं पाते | बाहुबलियों ने सोचा दूसरों को जिताने से अच्छा है वह स्वयं ही चुनाव लड़ लें | संसद रुपी प्रजातन्त्र के मन्दिर में अपराधी पहुंच गये जिन पर कई अपराधिक मामले चल रहे है | इसका निदान निकाला गया चुनाव कई चरणों में हो रहे हैं | पुलिस बल लगा कर शान्ति पूर्ण ढंग से चुनाव कराने की कोशिश की जाती है| संसद में अपराधियों को जाने से रोकने के लिए भी कई कानून बने हैं लेकिन जब तक किसी का अपराध सिद्ध न हो जाये उन्हें चुनाव लड़ने से कैसे रोका जा सकता है? एफआईआर दर्ज है पर उम्मीदवार धडल्ले से चुनाव लड़ रहे हैं क्योकि हमारी न्याय प्रक्रिया की गति धीमीं है |
चुनाव जीतने के लिए खुल कर प्रलोभन देने का चलन बढ़ रहा है किसानों का ऋण माफ़ कर देंगे, और भी न जाने क्या-क्या ?असली वोट की खरीद फ़रोख्त चुनाव से पहले की रात में होती है जम कर शराब पियो कम्बल बांटना आम बात है |जेब में नोट डाले जाते थे महिलाओं के वोट हासिल करने के लिए कई योजनाये शुरू करने की घोषणायें विशेष पैकेज जबकि हर महिला और बाल कल्याण सरकार के कार्यों में शामिल है | चुनाव से पहले ही वोटर लिस्ट से मौका लगते ही वोटरों का नाम कटवा दिया जाता है और नकली वोट बनवा कर वोट पक्के कर लेते हैं | क्या यह सब जनता की सेवा के लिए किया जा रहा है ?दो दुश्मन दलों ने चुनाव जीतने के लिए गठबंधन बना लिए मायावती जी बुआ और अखिलेश भतीजा | सपा बसपा का संगम उनमें अजीत सिंह जी की पार्टी भी मिल गयी चैनलों में यूपी ही चर्चा का केंद्र बना है | दल अपना चुनाव घोषणा पत्र निकालते हैं घोषणा पत्र वादों का पिटारा अबकी बार कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए 55 पेज का घोषणा पत्र निकाला कश्मीर समस्या का हल हल्के में लिया सुरक्षा बलों की शक्ति कम करने के वायदे , देशद्रोह 124 A को खत्म कर देंगे जीतने के बाद गरीब वर्ग को 72 हजार प्रतिवर्ष दिया जाएगा वर्षों से कांग्रेस ने गरीबी हटाने का नारा दिया अब तो गरीबी मिटाने का आकर्षक आश्वासन लेकिन इसके लिए धन कहाँ से आएगा ? भाजपा का संकल्प पत्र चुनाव घोषणा पत्र है जिसमें कई जन कल्याणकारी योजनाएं हैं कोशिश की गयी है जनता की माली हालत सुलझे लेकिन चुनावों में फुलबामा , एयर स्ट्राइक सेना के शौर्य की चर्चा के नाम पर वोट मांगना | राष्ट्रवाद वाद की अपने अर्थों में व्याख्या देना | देश की सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या पर रोक किसी दल के चुनाव घोषणा पत्र में नहीं है
विज्ञापन एजेंसिया नामी क्रिएटिव डायरेक्टर उनकी टीम नये जुमले गढ़ने के काम पर लगे है रोज रोचक जुमले फिर उनकी काट ,काट की भी काट| चुनाव जीतने के तरीके बदल गये हैं झंडियाँ बैनर कम दिखाई देते हैं ढोल नगाड़े भी कम सुनाई देते हैं | राम मन्दिर का मुद्दा फिर से उछाला गया जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है | मुस्लिम महिलाओं को ही अपने पक्ष में किया जा सके कुछ मुद्दे तो केवल चुनावी प्रपंच हैं ज्यादातर भाषणों में जनता को उलझाने की कोशिश की जाती है लच्छे दार जुमलों से जनता को हंसाते और उत्तेजित कर तालियाँ पिटवाते हैं या नारे लगवाते हैं |
नेतागण जो बोलते हैं उन्हें भी याद नहीं रहता | हैरानी होती है हंसी आती है जब कहते हैं हमें साम्प्रदायिक ताकतों को रोकना है उनसे लड़ना है जबकि देश संविधान से चलता है संविधान की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट है | चुनाव सम्पन्न हो जायेंगे उत्सव का माहौल और मेला झमेला सब खत्म हो जाएगा नेता मतदाता से दूर होते जायेंगे यदि बहुमत मिल गया, केंद्र में मजबूत सरकार बन जायेगी यदि नहीं मिला, मिली जुली सरकार के जोड़ तोड़ में लग जायेंगे या विपक्ष में बैठ कर सदन चलने नहीं देंगे जनता भी जानती है अपनी मेहनत से ही उनका भला होगा |

चुनावों में अभिनेता भी पीछे नहीं हैं कुछ टिकट मिलने पर चुनाव लड़ते हैं कुछ चुनाव प्रचार करते हैं बंगाल में तो चुनाव प्रचारों के लिए बंगला देश के अभिनेता बुला लिए गए

हर दल में सम्मानित नेताओं के बच्चे भी चुनाव लड़ रहे हैं वह अपनी ताकत दिखाने के लिए कारों का काफिला और अपने लोग लेकर चलते हैं जिन्हें कभी देखा नहीं वह जनता की सेवा का दम भरते हैं जबकि मतदाता उन्हें पहचानते भी नहीं हाँ उनके नाम के साथ उनके पिता का नाम चल रहा है | अब तो चुनावों में नई परिपाटी चल निकली हैं नेता जी मुलायम सिंह ,लालू प्रसाद ,देवगौड़ा और गांधी नेहरु परिवार की तो विरासत चल ही रही थे अब हर नेता अपनी पत्नी, बेटे, बेटी ,दामाद, भाई बहू धेवते और भतीजों को चुनाव लड़वा रहे हैं कार्यकर्ता एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं एक दिन उनको भी चुनाव में टिकट मिलेगा वह जनता की समस्याए सुनते थे उनके काम कराते हैं , कुछ नेता टिकट न मिलने से कुंद हैं भीतरी फूट उनके वक्तव्यों से उजागर हो ही जाती है| एक मोदी जी हैं जिनको किसी को अपनी विरासत नहीं देनी जबकि उनके भी भाई हैं |

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