व्यक्तित्व निर्माण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

18 अप्रैल 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (21 बार पढ़ा जा चुका है)

व्यक्तित्व निर्माण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से समस्त विश्व में भारत को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था | यह सर्वोच्च स्थान हमारे देश भारत को ऐसे ही नहीं मिल गया था बल्कि इसके पीछे भारत की आध्यात्मिकता , वैज्ञानिकता एवं संस्कृति / संस्कार का महत्वपूर्ण योगदान था | हमारे देश भारत में प्रारंभ से ही व्यक्ति की अपेक्षा व्यक्तित्व का आदर्श ग्रहण किया जाता रहा है | प्रत्येक माता पिता अपनी संतान को शिक्षित बनाकर के समाज में स्थापित करना चाहते हैं | संसार में जितनी भी प्रकार की शिक्षा है सबका उद्देश्य एक ही है वह है व्यक्तित्व का विकास | वह व्यक्तित्व जो अपना प्रभाव सब पर डालता है , जो अपने साथियों पर जादू सा कर देता है | यह शक्ति का एक महान केंद्र है , जब यह शक्तिशाली व्यक्तित्व तैयार हो जाता है तो जो चाहे वह कर सकता है | यह व्यक्तित्व जिस वस्तु , व्यक्ति या समाज पर अपना प्रभाव डालता है उसी को कर्मठ बना देता है | इसीलिए हमारे पूर्वजों ने व्यक्ति की अपेक्षा व्यक्तित्व निर्माण को महत्व दिया है | व्यक्तित्व का निर्माण परिवार के संस्कार एवं किसी योग्य सद्गुरु के कुशल नेतृत्व में ही संभव है | व्यक्तित्व निर्माण का समय बाल्यावस्था का त्याग एवं युवावस्था के प्रारंभ से ही किया जा सकता है | किसी भी देश के लिए युवा ही ऊर्जा का काम करते हैं , जिस देश के युवाओं का व्यक्तित्व विकासशील होता है वहीं देश समृद्धशाली कहा जा सकता है और हमारे देश भारत में ऐसा ही था | इतिहास में अनेक युवाओं ने अपने कर्मों से देश का मान तो बढ़ाया ही साथ ही अपने पीछे एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर गए |* *आज के भौतिकवादी युग में माता पिता अपनी संतान को प्रभावशाली तो बनाना चाहते हैं परंतु उनमें संस्कारों का आरोपण नहीं कर पा रहे हैं | ऐसा ना कर पाने का विशेष कारण यह भी कहा जा सकता है कि आज माता पिता स्वयं कहीं ना कहीं से संस्कार हीन होते चले जा रहे हैं | आज के समाज में जो देखने को मिल रहा है अभिभावक अपने बच्चों के लिए संपत्ति तो इकट्ठा कर रहे हैं परंतु जो उनके जीवन को प्रकाशित कर सके ऐसे संस्कार नहीं दे पा रहे हैं | बच्चों के दुलार में उनकी प्रत्येक उचित - अनुचित मांग को पूरा करना प्रत्येक अभिभावक अपना दायित्व समझते हैं | परंतु मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि संतान की समस्त इच्छाओं को अवश्य पूरा करें परंतु यह भी ध्यान रखें कि उसकी कौन सी मांग उचित है कौन अनुचित , क्योंकि जब संतान की प्रत्येक उचित - अनुचित मांगे पूरी होने लगती है तब हम उनमें ना तो अपने संस्कार आरोपित कर पाएंगे और ना ही उन्हें व्यक्तित्व प्रकट होगा जो कि समाज के लिए लाभकारी हो | प्रत्येक मनुष्य को अपने बच्चों में एक आदर्श व्यक्तित्व का विकास करने का प्रयास करना चाहिए , यदि प्रत्येक माता पिता अपने मन में यह निर्णय कर ले कि हम अपनी संतान में आदर्श व्यक्तित्व का विकास करेंगे तो विश्वास मानिए हमारा देश भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है |* *आज आवश्यकता है युवाओं को ऐसी शिक्षा देने की जून में एक आदर्श व्यक्तित्व की नींव डाल सके और यह मात्र विद्यालय प्रशासन का कार्य नहीं है अपितु इसके लिए अभिभावकों को भी प्रयास करना चाहिए |*

अगला लेख: जाकी रही भावना जैसी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 अप्रैल 2019
*मनुष्य अपने जीवनकाल में अनेकों क्रिया - कलाप करता रहता है , भिन्न - भिन्न स्वभाव के लोगों की संगत करता रहता है | अपने स्वभाव के विपरीत लोगों के साथ रहकर अपने स्वभाव को बदलने का भी प्रयास करता रहता है | इसमें वह कुछ हद तक सफल भी हो जाता है , समय आने पर वह अपना मूल स्वभाव कहीं जाता नहीं है | वही व्यक
23 अप्रैल 2019
23 अप्रैल 2019
*परमपिता परमात्मा ने इस सुंदर सृष्टि रचना की और इस सुंदर सृष्टि में सबसे सुंदर बनाया मनुष्य को | मनुष्य की सुंदरता दो प्रकार से परिभाषित की जाती है एक तो शरीर की सुंदरता दूसरे मन की सुंदरता | तन और मन का चोली दामन की तरह साथ होता है | यह दोनों ही एक दूसरे के पूरक और पोषक है , किंतु मनुष्य का सारा ध
23 अप्रैल 2019
23 अप्रैल 2019
*आदिकाल से इस धरा धाम पर मनुष्य अपने कर्मों के माध्यम से सफलता एवं विफलता प्राप्त करता रहा है | किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम मनुष्य को छलहीन एवं निष्कपट होना परम आवश्यक है | मनुष्य कुछ देर के लिए सफल होकर अपनी सफलता पर प्रसन्न तो हो सकता है परंतु उसकी प्रसन्नता चिरस्थाई नह
23 अप्रैल 2019
05 अप्रैल 2019
*चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद जीव को देव दुर्लभ मानव शरीर प्राप्त होता है | इस शरीर को पाकर के मनुष्य की प्रथम प्राथमिकता होती है स्वयं को एवं अपने समाज को जानने की , उसके लिए मनुष्य को आवश्यकता होती है ज्ञान की | बिना ज्ञान प्राप्त किये मनुष्य का जीवन व्यर्थ है | ज्ञान प्राप्त कर लेना महत्व
05 अप्रैल 2019
05 अप्रैल 2019
*इस संसार में मनुष्य जन्म लेने के बाद विवाहोपरांत मनुष्य की सबसे बड़ी कामना होती है संतान उत्पन्न करना | जब घर में पुत्र का जन्म होता है तो माता-पिता स्वयं को धन्य मानते हैं | हमारे शास्त्रों में भी लिखा है :- "अपुत्रस्तो गतिर्नास्ति" अर्थात जिसके यहां पुत्र नहीं होता उसकी सद्गति नहीं होती | संतान क
05 अप्रैल 2019
23 अप्रैल 2019
*परमपिता परमात्मा ने इस सुंदर सृष्टि रचना की और इस सुंदर सृष्टि में सबसे सुंदर बनाया मनुष्य को | मनुष्य की सुंदरता दो प्रकार से परिभाषित की जाती है एक तो शरीर की सुंदरता दूसरे मन की सुंदरता | तन और मन का चोली दामन की तरह साथ होता है | यह दोनों ही एक दूसरे के पूरक और पोषक है , किंतु मनुष्य का सारा ध
23 अप्रैल 2019
16 अप्रैल 2019
*मनुष्य की इच्छायें एवं आवश्यकतायें अनन्त हैं | जब से मनुष्य इस धराधाम पर आया तब से ही यह दोनों चीजें विद्यमान हैं | एक सुंदर एवं व्यवस्थित जीवन जीने के लिए मनुष्य को नित्य नये आविष्कार करने पड़े , जहाँ जैसी आवश्यकता मनुष्य को प्रतीत हुई वहाँ वैसे आविष्कार मनुष्य करता चला गया | अपने इन्हीं आविष्कार
16 अप्रैल 2019
05 अप्रैल 2019
*मानव जीवन में यदि मनुष्य अपने कर्मों का शुभाशुभ फल प्राप्त करता है तो वहीं उसके जीवन पर कुण्डली में उपस्थित ग्रहों का भी सीधा प्रभाव देखने को मिलता है | ग्रहों के दुष्प्रभाव से मनुष्य का जीवन इतना अधिक प्रभावित हो जाता है कि मनुष्य राजा भी बन सकता है एवं कुछ ही पलों में राजा भी रंक हो जाता है | कभी
05 अप्रैल 2019
23 अप्रैल 2019
*परमपिता परमात्मा ने सुंदर संसार की रचना की , और इस संसार को एक उपवन की तरह बनाया | इस संसार में आपको प्रत्येक वस्तु मिलेगी चाहे वह सकारात्मक हो चाहे नकारात्मक | गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने मानस में लिखा है :-- "जड़ चेतन गुण दोषमय विश्व कीन्ह करतार" अर्थात यहां गुण भी हैं और दोष भी | यह आपकी दृष्टि
23 अप्रैल 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x