ख़िलाफ़त

25 अप्रैल 2019   |  pradeep   (28 बार पढ़ा जा चुका है)

ना उनको ज़वाब देना है, ना हमको सवाल करना है,

मज़ा तो ये है कि हमको ग़रीबी पर मखौल करना है.

उनकी हाँ में हाँ करना है, उनकी ना पे ना करना है,

नहीं तो कर ख़िलाफ़त क्या तर्ज़े ज़िंदगी खराब करना है. (आलिम)

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