अधजल गगरी छलकत जाय :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

29 अप्रैल 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (57 बार पढ़ा जा चुका है)

अधजल गगरी छलकत जाय :--- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*इस धरती पर जन्म लेने के बाद मनुष्य को कई कर्तव्यों का पालन करना पड़ता है , इन्हीं कर्तव्यों में एक मुख्य कर्तव्य बताया गया है ज्ञान लेना एवं ज्ञान देना | सर्वप्रथम मनुष्य को किसी भी विषय में विधिवत ज्ञान प्राप्त करना चाहिए | उस विषय में पारंगत हो जाने के बाद कि मनुष्य को उस विषय की चर्चा करते हुए किसी को ज्ञान प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए | इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्राचीन काल में हमारे देश भारत में ज्ञान का प्रसार करने के उद्देश्य से स्थान स्थान पर महर्षियों आश्रम खोले थे , जहां शिष्यों को प्रत्येक विषय में विधिवत पारंगत किया जाता था | गुरुकुल आश्रम से निकलकर शिष्य भी अपने ज्ञान के बल पर संसार को उचित मार्गदर्शन प्रदान करते थे | इसीलिए हमारा देश भारत विश्व गुरु कहा जाता था | ज्ञान प्राप्त करने के लिए करने के लिए मनुष्य को धीर एवं गंभीर बन करके सुनी या पढ़ी बातों को हृदय में उतार लेना चाहिए | इसके लिए मनुष्य में गंभीरता एवं धैर्य की परम आवश्यकता होती है , क्योंकि किसी भी विषय में पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए समय के साथ साथ धैर्य का होना भी आवश्यक है | यदि धैर्य पूर्वक ज्ञान प्राप्त कर लिया जाता है तो ऐसा मनुष्य जीवन में कभी असफल नहीं होता है |* *आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य के भीतर धैर्य की कमी स्पष्ट दिखाई देती है | आज मनुष्य सब कुछ शीघ्रता से प्राप्त करना चाहता है | आज के युग में देखा जा रहा है कि मनुष्य कुछ दिन किसी सदगुरु की शरण में रह करके ज्ञान प्राप्त करने की अभिलाषा तो करता है परंतु कुछ ही दिनों में आधा अधूरा ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह स्वयं को ज्ञानी समझने लगता है एवं अपने सद्गुरु को ही ज्ञान बताने का प्रयास करने लगता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह देख कर कभी कभी हँसने लगता हूँ कि आज के लोगों की मानसिकता कितनी विशाल हो गयी है | अधकचरा ज्ञान प्राप्त करके स्वयं को ज्ञानी मानकर ज्ञान बांटने वालों की वही स्थिति होती है जैसा कि कहा गया है कि - "अधजल गगरी छलकत जाय" | आज ज्ञान लेने वालों की अपेक्षा ज्ञान बांटने वालों की संख्या अधिक दिखाई पड़ती है | एक प्रकार से यह अच्छी बात भी है , परंतु किसी को कुछ बताने से पहले उस विषय में पूर्ण जानकारी का होना भी परम आवश्यक है | परंतु आज का मनुष्य स्वयं को सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी एवं अन्य को तुच्छ समझने लगा है | अपने इस कृत्य से वह भले समाज में हंसी का पात्र बन रहा है परंतु वह इसे भी अनदेखा कर देता है | यह आज का मनुष्य का स्वभाव बन गया है |* *किसी को भी कुछ प्रदान करने के लिए उस वस्तु का अपने पास होना नितांत आवश्यक है , क्योंकि जो हमारे पास होगा हम वही तो वितरित कर सकते हैं ? इसीलिए किसी भी विषय में पूर्ण जानकारी का होना आवश्यक है |*

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