दीनी सियासत का तोड़ क्या है ?श्रीलंका के ताजा बम धमाके

02 मई 2019   |  शोभा भारद्वाज   (45 बार पढ़ा जा चुका है)

दीनी सियासत का तोड़ क्या है ?श्रीलंका के ताजा बम धमाके  - शब्द (shabd.in)

दीनी सियासत का तोड़ क्या है ? श्रीलंका में ताजा बम धमाके

डॉ शोभा भारद्वाज

दीनी आधार पर की जाने वाली राजनीति की काट दिखाई नहीं देती है ? हर तर्क पर मौलाना अपने समाज से प्रश्न करते हैं क्या तुम इस्लाम के दुश्मन हो , दीन के विरुद्ध हो ? या धमकियाँ श्री लंका में ईस्टर के दिन चर्च में इबादत करने आये क्रिश्चन समाज एवं होटलों में ठहरे लोगों पर किये जाने वाले फिदायीन हमलों नें विश्व को हिला दिया| लंका में मुश्किल से एलटीटीई का खात्मा करने के बाद शान्ति लौटी थी| एलटीटीई की स्थापना वेलुपिल्लई प्रभाकरण ने की थी इसका उद्देश्य उत्तर पूर्वी श्री लंका में तमिलों के लिए अलग राज्य की स्थापना करना था | 26 वर्ष तक श्रीलंका ने गृह युद्ध झेला इससे भारत भी अछूता नहीं रहा एक आत्मघाती हमले में भारत के पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की चुनाव प्रचार के दौरान हत्या कर दी गयी| कारण ?राजीव गांधी जी के कार्यकाल में श्रीलंका के राष्ट्रपति जे आर जयवर्धने के साथ शन्ति समझौता हुआ जिसमें भारत की पीस कीपिंग फ़ोर्स लिट्टे एवं अन्य तमिल आतंकियों से हथियार डलवा कर श्री लंका में शान्ति की स्थापना करवाएगी समझौते से तमिल आतंकी नाराज हो गये परिणाम राजीव जी की हत्या | लंका गृह युद्ध लिट्टे के खातमें से समाप्त हो सका | 10 वर्ष की शांति ऐसे टूटेगी किसी ने सोचा भी नहीं था|श्री लंका की आर्थिक स्थित खराब थी |शान्ति काल में बड़ी मेहनत से यहाँ टूरिज्म का विकास हुआ था श्री लंका खूबसूरत भी है यहाँ कुछ दिन रहना सस्ता भी है लोग घूमने आते थे|

ईस्टर का पर्व था ईसाई धर्म के अनुसार गुड फ्राईडे के दिन ईसा को सलीब पर लटकाया गया था मान्यता है गुड फ्राईडे के तीसरे दिन इतवार को ईसा नें पुन : जीवित होकर चालीस दिन तक शिष्यों एवं मित्रों के साथ रह कर प्रवचन दिए अंत में वह स्वर्ग चले गये |ईस्टर पर्व को मनाने पूजा अर्चना करने गिरजा घरों में क्रिश्चन समाज इकठ्ठा था होटलों में टूरिस्ट भी ठहरे थे यहाँ एक साथ बम धमाके हुए जिसमें लगभग 253 लोग मारे गये 500 घायल |धमाकों में 45 विदेशी नागरिक जिनमें 8 भी थे मारे गये मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य जेहाद के नाम पर इस्लामिक फिदायीन द्वारा किया गया |इंसानों के शव ऐसे क्षति ग्रस्त होकर बिखरे हुए थे जिनकी पहचान मुश्किल थी | श्रीलंका को ऐसा घाव दिया जिसे भरना आसान नहीं होगा | आत्मघाती हमले की चेतावनी विदेशी एजेंसियों एवं भारत सरकार ने हमले से 15 दिन पहले ही श्रीलंका सरकार को चेतावनी दी थी वहाँ चर्चों पर हमले हो सकते हैं | भारत सरकार के गृह मंत्रालय को दक्षिणी भारत से गिरफ्तार आईएस के सदस्य द्वारा सुराग मिला था

श्रीलंका की कुल आबादी में 70.2 प्रतिशत बौद्ध, 12.6 फीसदी हिंदू, करीब 9.7 फीसदी मुस्लिम और 7.4 फीसदी ईसाई हैं। मुस्लिम शांतिपूर्ण रहता थे लेकिन उनमें भी कुछ कट्टरवादी तत्व बढ़ रहे हैं। वर्ष 2016 में श्रीलंका की संसद में बताया गया था कि श्रीलंका के अच्छे पढ़े-लिखे परिवारों के करीब 32 मुस्लिम जवान इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गए हैं।श्रीलंका ही नहीं विश्व के अनेक देशों के मुस्लिम युवको को जेहाद के नाम पर भड़काया जा रहा था |श्री लंका सरकार का मानना है उनके यहाँ के फिदायीन हमले अंतर्राष्ट्रिय संगठन इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के साथ मिल कर स्थानीय इस्लामिक चरम पंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात द्वारा किये गये हैं |इस्लामिक स्टेट ने तीन दिन बाद आत्मघाती धमाकों के लिए जमात की मदद की जिम्मेदारी ली है | धमाका करने वाले नेशनल तौहीद जमात के लड़ाकों के पास आतंकी गतिविधियों का कोई पूर्व अनुभव नहीं था उन्हें प्रशिक्षण की जरूरत थी उन्हें आईएसआईएस के भगोड़ों ने प्रशिक्षित किया उनके पास मध्यपूर्व में आतंक फैलाने का अच्छा खासा अनुभव था। हमलावरों में तीन इस्लामिक स्टेट के फिदायीन भी शामिल थे|

श्रीलंका के पूर्वी हिस्से में इस संगठन ने बहावी विचारधारा को बढ़ावा दिया यहाँ मस्जिदों का निर्माण हो रहा था महिलाओं को हिजाब पहनने के आदेश दिए गयेयहीं नहीं शरिया कानून की भी वकालत होने लगी पहले तर्क दिया जाता था गरीबी आतंकवाद की राह पर ले जाती है गरीब नौजवानों को जन्नत का शोर्ट कट, शहादत जेहाद का रास्ता है जल्दी समझ में आता है उनकी जिन्दगी में अभाव ही अभाव है काफिर मान कर निर्दोषों को मारो इनाम में जन्नत के द्वार खुले हैं |लेकिन इन हमलों के पीछे अच्छे पढ़े लिखे , सम्पन्न परिवारों से सम्बन्ध रखने वाले फिदायीन थे | बताया जा रहा है कि हमला करने वाले दो आत्मघाती हमलावर आपस में सगे भाई कोलंबो के एक अमीर मसाला व्यापारी के बेटे उन्होंने खुद को उड़ा लिया। अब पढ़े लिखे टेक्नोक्रेट पर भी कुर्बानी का जनून चढ़ा है संसार से कुफ्र खत्म करना है सारे जहान को इस्लाम करने का जनून जो काम पैगम्बर के आदेश पर खलीफाओं द्वारा अधूरा रह गया है उसे पूरा करने का जनून | ‘एक दिन दुनिया इस्लाम हो जायेंगीऐसे खुदाई कार्य में वह भी भागीदार होंगे जवान धीरे धीरे कुछ कर गुजरने की भावना के भाव में बह जाते हैं बुतशिकनी मानसिकता के इस संगठन पर भगवान बुद्धकी मूर्तियाँ तोड़ने का इल्जाम लगा यही नहीं संगठन के सेकेट्री अब्दुल रैजिक ने बौद्ध धर्म पर अपशब्द कहे |उसे अशांति फैलाने के जुर्म में कैद कर लिया था |

2014 में श्रीलंका के शान्ति प्रिय जीवन जीने के इच्छुक समाज ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार, श्रीलंका के राष्ट्रपति और अन्य कई राजनयिकों को पत्र लिखे उन्होंने देखा जमात उनके देश में इस्लामिक विचारधारा थोप रहा है अब श्रीलंका की सत्तारूढ़ सरकार को आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर आलोचना का सामना करन पड़ रहा है | विक्रमसिंघे ने सफाई पेश करते हुए कहा हमले से पहले संदिग्ध हमलावरों को हिरासत में लेने का अधिकारियों के पास कोई मजबूत सबूत नहीं था | वाह ने प्रजातंत्र की विडम्बना प्रशासन इंतजार करे आतंकी घटनाओं के बाद लाशें गिनें ?तब कार्यवाही करें |

सीरिया एवं इस्लामिक स्टेट के खत्म होने के बाद लौटे कट्टरपंथियों को लेकर विश्व के देश चिंता में है। सैकड़ों लड़ाके इस्लामिक स्टेट में शामिल हुए थे। अब वह अपने देश में आने के उत्सुक हैं कुछ आतंकी मर चुके हैं लेकिन उनकी पत्नियां अपने बच्चों को लेकर स्वदेश लौटना चाहती हैं | श्रीलंका में मानना है कट्टरपंथियों के सीरिया में पैर उखड़ गये वहाँ से लौटने के बाद ये लोग तौहीद जमात संगठन को धार देने में लगे रहे। चारों तरफ समुद्र से घिरी श्री लंका एवं दक्षिणी भारत के बीच में समुद्र है श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति पर इस्लामिक स्टेट की नजर है श्रीलंका में हुए धमाके खतरे की आहट हैं भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र हैं यहाँ तौहीद जमात एक इस्लामी संगठन का एक धड़ा तमिलनाडु में भी सक्रिय है, लेकिन इसकी गतिविधियां सामाजिक क्षेत्रों में हैं, जो सामुदायिक रसोई चलाने और रक्तदान शिविर आयोजित करने का काम करता है। लेकिन आईएस की विचार धारा से प्रभावित है | पांच वर्ष बाद फिर बगदादी ज़िंदा हो उठा है

श्रीलंका में बौद्ध धर्मावलम्बी इस्लाम को खतरा मान रहे मार्च 2018 में श्रीलंका में बौद्ध एवं मुस्लिम दंगे हुए। दक्षिण एशिया में इस्लाम को हराने और बौद्धधर्म को बचाने के लिए बोदु बल संगठन का गठन किया था जिसे सिंहली बौद्ध राष्ट्रवादी संगठन माना जाता है। इस संगठन के अनुसार श्रीलंका दुनिया का सबसे पुराना बौद्ध राष्ट्र है। उसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करना चाहिए क्योकि बौद्धों पर धर्मांतरण का खतरा मंडरा रहा है। उनका आरोप है कि सिंहली परिवारों में एक या दो बच्चे होते हैं, जबकि अल्पसंख्यक धर्म की दुहाई देकर अनेक बच्चे पैदा कर आबादी का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। यह श्री लंका की ही समस्या नहीं है ,समस्या को लेकर प्रजातांत्रिक व्यवस्था वाले राष्ट्रों के बुद्धिजीवी परेशान हैं क्योकि बहुमत के बल पर सत्ता पर अधिकार का खतरा रहता है |श्रीलंका के ताजा हमलों को न्यूजीलैंड में मस्जिदों में संहार का बदला भी माना जा रहा है |मंगलवार को रक्षा मंत्री रुवान विजयवर्धने ने संसद में कहा कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि श्रीलंका में रविवार को जो हुआ वो क्राइस्टचर्च में मुसलमानों के खिलाफ हुए हमले का बदला था इसमें निर्दोष श्रीलंका के निवासियों का क्या दोष था?

चीन से कर्ज या मदद लेने के बाद भय है यदि चीनी वापस नहीं गये उनका देश कहीं चीन के उपनिवेश न बन जायें श्रीलंका को हम्बनटोटा बन्दरगाह 99 वर्ष की लीज पर देना पड़ा यह श्री लंका का सबसे बड़ा बंदरगाह चीन के नियंत्रण में है। इस बंदरगाह पर गोपनीय परिवहन और खुफिया गतिविधियों पर निगरानी के लिए श्रीलंका के पास कोई मशीनरी नहीं है। इसके अलावा वह चीन से लिए कर्ज कारण शतों से बंधा हुआ है।

1900 की शुरुआत में बुर्के और हिजाब का चलन नहीं था अब श्रीलंका में आपतकालीन स्थिति में बुर्के यही नहीं चेहरे को ढकने वाले नकाब पर बैन लगा दिया है क्योकि ताजा आतंकी वारदात में महिलायें भी शामिल थी | मौलानों ने भी समय की मजबूरी समझ कर बुर्के पर बैन स्वीकार कर लिया है आतंकवाद को खत्म करने के लिए अवैध विदेशी एवं विदेशी मौलानाओं को देश से बाहर किया जा रहा है | एशिया एवं योरोप के कुछ देश बुर्का पहनने पर प्रतिबन्ध लगा चुके हैं कई बार बुर्के की आड़ में आतंकियों ने आतंकी वारदातों को अंजाम दिया है सार्वजनिक स्थानों पर स्नान के लिए बुर्कनी का भी विरोध हो रहा है |

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