कहां जायेंगे

07 मई 2019   |  मंजू गीत   (7 बार पढ़ा जा चुका है)

जब लोगों को अपने पन से तकलीफ होने लगें, आपकी बातें उन्हें ताने लगनी लगे, तो कहां जाओगे? उन्हें कब तक अपना समझ, समझाओगे, मनाओगे? जिसके दिल की जगहें संकुचित होने लगे। प्रेम और समझ ,शक में सिमटने, सिकुड़ने लगे। समाज जंजीर बन जकड़ने लगे। आपका विश्वास (साथी)आपसे अकड़ने लगे। तो दूरी के सिवा क्या दवा है। किसी ने बहुत खूब लिखा है। जब तालुक बोझ बन जाये, उसे छोड़ना अच्छा... ना हम देखें, ना वो देखें नाराज नज़रों से। नज़रों से गिरने से अच्छा है। फिर अजनबी बन जाएं हम। गिले शिकवे बढ़ कर बना दे दर्द का दरिया, उससे पहले सब्र का घूंट पी कर, उसे खुबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा। जब लोगों को अपने पन से तकलीफ होने लगें, आपकी बातें उन्हें ताने लगनी लगे, तो कहां जायेंगे?

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