भारत का वो वीर बहादुर जिसने पाकिस्तान के दो टुकड़े करने में निभाई थी अहम भूमिका

25 मई 2019   |  प्रियंका शर्मा   (41 बार पढ़ा जा चुका है)

भारत का वो वीर बहादुर जिसने पाकिस्तान के दो टुकड़े करने में निभाई थी अहम भूमिका - शब्द (shabd.in)

भारत की जल या थल सेना हो या वायु सेना हो इसके इतिहास से लेकर आजतक ऐसे वीर पैदा हुए हैं, जिनकी गाथाएं अमर हैं। साथ ही, ये गाथाएं सदियों तक याद की जाएंगी। ऐसे ही एक अमर वीर की कहानी हम आपको बताएंगे जिनकी बहादुरी के किस्से हर भारतीय को जानना चाहिए।

फील्ड मार्शल सैम होर्मूसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ, जिन्हे एमसी के नाम से जाना जाता है। ऐसे विद्रोही, जो पिता की इच्छा के विरुद्ध भारतीय सेना से जुड़े। 3 अप्रैल 1914 को पंजाब के अमृतसर में एक पारसी परिवार में इनका जन्म हुआ था।


पहले विश्वयुद्ध के दौरान सैम मानेकशॉ के पिता होर्मूसजी मानेकशॉ ने बतौर डॉक्टर अंग्रेजी सेना में सेवा दी थी। होर्मूसजी, सैम को भी डॉक्टर बनाना चाहते थे पर सैम ने 1932 में देहरादून में इंडियन मिलिट्री एकेडमी में दाखिला ले लिया। इंडियन मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग के दौरान सैम मानेकशॉ ने अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। मिलिट्री एकेडमी से ट्रेनिंग खत्म होने के बाद सबसे पहले सैम 2nd बटालियन, द रॉयल स्कॉट्स से जुड़े। इसके बाद 54th सिख रेजिमेंट , बर्मा में उनकी पोस्टिंग हुई।


सैम मानेकशॉ की भाषाओं पर अच्छी पकड़ थी। उन्हें पंजाबी, हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी और गुजराती तो बोलनी आती ही थी, पश्तो में भी उन्हें महारत हासिल थी। अक्टूबर 1938 में उन्हें पश्तो में हायर स्टैण्डर्ड आर्मी इंटरप्रेटर बनाया गया।

सेना में उनके कार्यकाल का एक अहम हिस्सा था 1971 का युद्ध। 1971 में भारतीय सेना की पूर्व पाकिस्तान में विजय का पूरा श्रेय मानेकशॉ को जाता है। मानेकशॉ और आघा मुहम्मद खान (1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख) अविभाजित भारत में फील्ड मार्शल सर क्लॉउड़े ऑचिंक्लिक के साथ काम किया था। आघा खान को मानेकशॉ की लाल जेम्स मोटरसाइकिल काफी पसंद थी, जिसे उसने मानेकशॉ से 1000 रुपए देने के वादे पर विभाजन के समय खरीदा था। भारतीय सेना ने बांग्लादेश की आजादी में सहायता की और मानेकशॉ ने जनरल पर चुटकी लेते हुए कहा, 'उसने मेरी बाइक के लिए 1000 रुपए कभी नहीं दिए, अब आधा देश देकर कीमत चुकानी पड़ी है।'



अगला लेख: मोदी ने अपने नाम के आगे से चौकीदार हटाया, वजह भी बताई



बहुत ही उपयोगी और पुरानी सुखद स्मृतियों में खो जाने को बाध्य कर देने वाला यह लेख है आपका | पढ़ कर बहुत अच्छा लगा | पर इतने दिन आप कहाँ गुम रहीं | आपके जाने के बाद जैसे सारी शब्द नगरी ही बिखर कर एक नए प्रकार की हो गई | अनेक बहुत अच्छे लेखक कवि और शायर जो प्रति दिन बहुत सक्रिय रहते थे एक एक करके जाने कहाँ अदृश्य हो गए |

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
24 मई 2019
भारत और पाकिस्तान सांस्कृतिक एवं भाषाई सभ्यताओं से आज भी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. बंटवारे के बाद भारत ने अपनी प्राचीन सभ्यता को बनाए रख कर एक बेहतर लोकशाही बनने की ओर कदम बढाएं वहीँ पाकिस्तान ने हर वो कदम उठाया कि जिससे वह भारत से खुद को अलग बता सके.दुःख की बात है, सैंतालीस के पहले रावलपिंडी, लाहौर
24 मई 2019
23 मई 2019
लोकसभा चुनाव 2019 में धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद पीएम मोदी ने अपने नाम से चौकीदार शब्द हटा लिया है. उन्होंने खुद इस बारे में ट्वीट करके जानकारी दी. पीएम का ये ट्वीट अंग्रेजी में है. उन्होंने अपने ट्वीट में औरों को भी यही करने को कहा है. मोदी ने लिखा है-वक्त आ गया है कि चौकीदार वाली भावना को अगले
23 मई 2019
03 जून 2019
भगवान राम के पिता राजा दशरथ के एक बेस्ट फ्रेंड हुआ करते थे- चित्ररथ. इनको रोमपाद के नाम से भी जाना जाता था. रोमपाद को कोई बेबी नहीं था और दशरथ की एक बेटी हो चुकी थी. नाम था शांता. दशरथ ने दोस्ती निभाते हुए अपनी बेटी शांता रोमपाद को गिफ्ट कर दी. रोमपाद ने उसे गोद लिया.
03 जून 2019
20 मई 2019
"क्या ,आज भी तुम बाहर जा रहे हो ??तंग आ गई हूँ मैं तुम्हारे इस रोज रोज के टूर और मिटिंग से ,कभी हमारे लिए भी वक़्त निकल लिया करो। " जैसे ही उस आलिशान बँगले के दरवाज़े पर हम पहुंचे और नौकर ने दरवाज़ा खोला ,अंदर से एक तेज़ आवाज़ कानो में पड़ी ,हमारे कदम वही ठिठक गये। लेकिन तभी बड़ी शालीनता के साथ नौकर न
20 मई 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
26 मई 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x