कांग्रेस में 2019 के चुनाव में हार पर मंथन चल रहा है

29 मई 2019   |  शोभा भारद्वाज   (126 बार पढ़ा जा चुका है)

कांग्रेस में 2019 के चुनाव में हार पर मंथन चल रहा है  - शब्द (shabd.in)

कांग्रेस में 2019 के चुनाव में हार पर मंथन चल रहा है - डॉ शोभा भारद्वाज


महात्मा गांधी ने आजादी के बाद कांग्रेस को भंग करने की अपील की थी लेकिन स्वतन्त्रता आन्दोलन का प्रतिनिधित्व करने वाला दल मजबूत राजनीतिक दल बन गया था| कांग्रेस पर शुरू से प्रधान मंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू हावी थे उनकी एवं स्वर्गीय प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यू के बाद स्वर्गीय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी जी के कार्यकाल में कांग्रेस का विभाजन हुआ था | हाथ के निशान वाली कांग्रेस ने इंदिराजी के नेतृत्व में सत्ता पर पकड़ मजबूत की थी उन्होंने अपने कार्यकाल में अपने पुत्र संजय गाँधी का कांग्रेस में प्रभाव बढ़ाया लेकिन संजय की मृत्यू के बाद वह राजीव गाँधी को राजनीति में लाईं अब दल नेहरू गाँधी परिवार का बन कर रह गया |इंदिराजी के बाद राजीव गांधी देश के प्रधान मंत्री बनें उनकी शहादत के पाँच वर्ष तक नरसिंहा राव प्रधान मंत्री रहे |स्वर्गीय राजीव जी की पत्नि सोनिया गांधी राजनीति में आने इच्छुक नहीं थीं कहा नहीं जा सकता लेकिन बाहर से उनकी नजर कांग्रेस की राजनीति पर थी |अप्रैल 1998 में उन्होंने नेहरू गाँधी परिवार की पाँचवी पीढ़ी के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली स्वर्गीय सीता राम को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया उन दिनों सोनिया गाँधी के सामने कांग्रेसी जन कहते सुने गये हैं सोनिया जी आईये देश बचाईये उनके नेतृत्व में हुये चुनावों में यूपीए की जीत हुई लेकिन वह देश की प्रधानमन्त्री नहीं बन सकीं उनका विदेशी मूल का मुद्दा आड़े आ गया उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह के नाम का अनुमोदन किया लेकिन सत्ता पर उनकी पकड़ कभी कम नहीं हुई कांग्रेसी 10 जनपथ पर हाजरी देते रहते थे ,वह यूपीए की चेयर पर्सन थीं |2014 के चुनाव में कांग्रेस लोकसभा में कुल 44 सीटें आयीं अब कांग्रेस लोकसभा में विपक्षी दल थी | सोनिया गाँधी अपने पुत्र राहुल गांधी को आगे लाना चाहती थी उन्होंने पहले उन्हें उपाध्यक्ष बाद में अध्यक्ष बनाया उन्हीं की अध्यक्षता में अबकी बार तीन राज्यों राजस्थान , मध्यप्रदेश एवं छत्तीस गढ़ में कांग्रेस की सरकारे बनी | 2019 के चुनाव में कांग्रेस को केवल 52 सीटें मिलीं जबकि राहुल गाँधी की मेहनत में कहीं कमी नहीं थी उनकी बहन प्रियंका भी चुनाव प्रचार में उनके साथ थीं |


कांग्रेस एक ऐसा दल हैं जिसमें विचारकों की कभी कमी नहीं रही लेकिन अध्यक्ष पद पर नेहरू एवं गाँधी ही विराजे हैं |सीटें कितनी भी कम आई हों कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इसका दोष अपने को ही दिया प्रियंका इससे भी आगे बढ़ गईं उनका आरोप हैं चुनाव प्रचार में मेरे भाई को अकेला छोड़ दिया |राहुल अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहते हैं लेकिन स्वीकार नहीं किया जा रहा| राजनीतिक ड्रामा जोरों पर हैं कांग्रेस की हालत का जिम्मेदार कौन है? आजकल मंथन चल रहा है | राहुल जी ने टिकट बटवारे को लेकर परिवारवाद की निंदा की लेकिन वह स्वयं भी तो इसी परम्परा में आते हैं संजय गांधी की मृत्यू के बाद इंदिराजी की इच्छा से राजीव गांधी राजनीति में आये वह रिलेकटेंट राजनेता थे| उनकी शहादत इतिहास के पन्नों पर अमर हैं उनकी पत्नी जब राजनीति में आयीं कांग्रेस अध्यक्ष ,एवं यूपीए की चेयर पर्सन रहीं उनके पुत्र राहुल को पहले उपाध्यक्ष थे चुनाव का ड्रामा हुआ फिर अध्यक्ष बने | चुनाव में राहुल के साथ उनकी बहन चुनाव प्रसार में उतरीं उन्हें पश्चिम उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाया गया था लेकिन उन्होंने अन्य स्थानों पर भी प्रचार एवं रोड शो किये लगता था चुनावों में प्रियंका वाड्रा गांधी का नतीजों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ उनके रोड शो की भीड़ वोटों में परिवर्तित नहीं हुई उनके पति राबर्ट वाड्रा भी राजनीति में आने की इच्छा जता चुके हैं लेकिन उन पर जमीन घोटाला मामले में एफआईआर दर्ज हैं यही नहीं मनी लांड्रिंग का केस चल रहा है वह अग्रिम जमानत पर हैं| अमेठी में जब राहुल पर्चा भरने गये पूरा परिवार राबर्ट वाड्रा, प्रियंका के बच्चे भी ट्रक पर चढ़ कर हाथ हिला रहे थे चुनाव का पर्चा भरते समय इस तरह खड़े किये गये मीडिया की नजरों में रहे |


चुनाव प्रचार का जिम्मा कार्यकर्ताओं पर होता है बसें भर कर भीड़ इकठ्ठी करना, रैलियों का आयोजन, झंडे बैनर ,धूमधाम उम्मीदवारों पर टनों फूलों की वर्षा करना , नेताओं के लिए किस्से कहानियाँ गढ़ना उनका प्रचार करना लेकिन जब टिकट की बारी आती हैं नेताओं के बेटे पोते बहुयें बहनें दामाद अपने ही परिवार के लोगों में टिकट बटवारा होता है आजकल सितारों को टिकट देने का चलन बढ़ गया वह चुनाव प्रचार ही नहीं स्वयं भी चुनाव लड़ते हैं जबकि विभिन्न क्षेत्रो में प्रसिद्ध 12 महानुभावों को राज्यसभा के लिए राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं | कार्यकता भी चाहते हैं वह विधान सभा एवं संसद का चुनाव लड़ें | राजनेता एक फर्म की तरह अपने रिश्तेदारों को अपनी विरासत सोंपना चाहते हैं | राहुल समझ गये थे अबकी बार अमेठी में चुनाव जीतना मुश्किल है उन्होंने केरला में वायनाड का रुख किया |एक ऐतिहासिक घटना याद आई सत्ता का संघर्ष चल रहा था संघर्ष ओरंगजेब एवं उनके भाई दारा शिकोह के बीच में था दारा की जीत निश्चित थी लेकिन वह अपने सिपहसालार की राय से अपना शाही हाथी छोड़ कर घोड़े पर सवार हो गये सेना अपने सेनापति को शाही हाथी पर न देख के गलत फहमी का शिकार हो गयी हाथी पर चढ़े ओरंगजेब को सत्ता मिली दारा जीती जंग हार गये तब राजतन्त्र था अब तो प्रजातांत्रिक व्यवस्था है जनता सब कुछ हैं| राहुल का अपना गढ़ छोड़ कर वायनाड जाना अमेठी के मतदाता को हतोत्साहित कर गया उन्होंने मतदान से पहले ही हार मान ली |


देश का सबसे बड़ा लोकतंत्र बहुमत दल के नेता प्रधान मंत्री मोदी जी जिनके सफेद कुरते पर ज़रा सा दाग नहीं है राहुल का नारा ‘चौकीदार’ रैली में इकठ्ठी की गयी भीड़ कहती थी चोर हैं ऐसी सलाह राहुल जी को किसने दी उनके प्रवक्ता मीडिया में होने वाली बहसों में हाथ उठा –उठा कर नारे लगाते चौकीदार चोर है , आक्रामक रुख दिखाते जनता को तकलीफ होती थी| राहुल कहते हैं यह तो जन भावना थी फिर भावना वोटों में क्यों नही बदली |हिटलर के जमाने में जर्मनी के प्रचार मंत्री गोयबल का विचार था झूठ को सौ बार बोलो लोग सच मान लेते हैं |राफेल के मामले में अलग –अलग बयानबाजी करना, राफेल में भारी बईमानी हुई है, चौकीदार ने अंबानी की जेब में 30 हजार करोड़ डाल दिए राहुल रफेल डील पर बोफोर्स तोप डील जैसा समा बनाने की कोशिश कर रहे थे क्या बन पाया ? आज का मतदाता जागरूक है |यही नहीं राहुल ने सुप्रीम कोर्ट के नाम पर वक्तव्य दिया अब तो सुप्रीम कोर्ट भी मान रहा है चौकीदार चोर है उन्हें लिखित में माफ़ी मांगनी पड़ी|

सबसे बड़ा हार का कारण बना उरी में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के जबाब में सर्जिकल स्ट्राईक पर कांग्रेस ने प्रश्न उठाये प्रूफ मांगे ,पुलवामा के फिदायीन हमले पर अजीबोगरीब ब्यान दिए गये कहा जनता को भ्रमित किया गया है यहाँ तक बालकोट में आतंकी कैंपों पर की गयी एयर स्ट्राईक को झूठ करार दिया गया उस पर प्रश्न उठाये जबकि सेना एवं मोदी जी दोनों प्रशंसा के पात्र थे | मोदी जी ने सेना को छूट दी वह उनके पीछे खड़े थे, पाकिस्तान को उसके कृत्य पर करारा जबाब दिया जाय| जनता में मोदी जी का सम्मान बढ़ा वह उत्साहित थी |देश पाकिस्तान के आतंकी हमलों को आये दिन झेलता है सीमा पर गोलाबारी चलती रहती है| शहीदों के पार्थिव शरीर जब आते हैं उनके अंतिम संस्कार में भारी भीड़ जुटती हैं वन्दे मातरम् के नारों की गूंज दूर तक सुनाई देती है | उन्हें अपनी सरकार से ऐसे ही उत्तर की आशा थी | मोदी जी ने एयर स्ट्राईक एवं सर्जिकल स्ट्राईक का अपने चुनावी भाषणों में जम कर जिक्र किया |


कांग्रेस का चुनाव घोषणा पत्र क्या था वोट बैंक बनाने की कवायद देश द्रोह एक्ट को खत्म कर देंगे,जबकि देश की जनता जेएनयू में लगे देश

विरोधी नारों से खफा थी ,सुरक्षा बलों के विशेषाधिकारों को कम किया जाएगा ,जम्मू कश्मीर में सेना सीमा पर रहेगी सुरक्षा व्यवस्था जम्मू कश्मीर पुलिस के हाथों में दी जायेगी |आतंक के सफाये के लिए सेना को विशेषाधिकार दिए गये हैं धारा 370 एवं 35 A को खत्म नहीं किया जाएगा ,गरीबी दूर करने के लिए न्याय योजना गरीब के अकाउंट में 72 .000 रूपये प्रतिवर्ष डाले जायेंगे परन्तु रुपया कहाँ से आयेगा ? राहुल के गुरु सैम पित्रोदा के पास उत्तर था मध्यम वर्ग से लिया जाएगा एक और जबाब था अनिल अंबानी की जेब से निकाला जायेगा|

चुनाव प्रचार में कुछ प्रवक्ताओं के अटपटे बोल कांग्रेस के लिए घातक हो गये पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू को अपनी ताकत बढ़ाने की जल्दी थी उनका पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री इमरान प्रेम ,सेनाध्यक्ष बाजवा से गले मिलना मोदी जी के विरुद्ध अटपटे बोल मोदी जी को हारने के लिए मुस्लिम से एक जुट हो कर वोट देने की अपील की वह मारा छक्का मोदी बाउंड्री से पार मरा कांग्रेस के लिए घातक बने कुछ कसर सैम पित्रोदा के बयानों ने पूरी कर दी एयर स्ट्राईक पर प्रश्न उठाया मुम्बई हमलों पर कांग्रेस सरकार भी पाकिस्तान प्लेन भेज सकती थी लेकिन ऐसा करना उचित नहीं है | जनता सुनना नहीं चाहती |


चुनाव का रिजल्ट आने के बाद कांग्रेस में मंथन चल रहा है | राहुल इस्तीफा देने पर अड़े हैं कांग्रेसी मनाने पर जुटे हैं |नेहरू गाँधी परिवार ने कभी किसी कांग्रेसी को सिर उठा कर कांग्रेस की अध्यक्षता का खुल कर मौका ही नहीं दिया |

अगला लेख: ' 2019 का चुनाव ' के अपने अलग तरह के रंग



बहुत ही सुंदर लेख।

धन्यवाद

बहुत ही गहरी रिसर्च होती है आपकी शोभा जी , बढ़िया ....

खुश रहो

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