सुबह की सैर और तम्बाकू पसंद लोग

04 जून 2019   |  कविता रावत   (51 बार पढ़ा जा चुका है)

गर्मियों में बच्चों की स्कूल की छुट्टियाँ लगते ही सुबह-सुबह की खटरगी कम होती है, तो स्वास्थ्य लाभ के लिए सुबह की सैर करना आनंददायक बन जाता है। यूँ तो गर्मियों की सुबह-सुबह की हवा और उसके कारण आ रही प्यारी-प्यारी नींद के कारण बिस्तर छोड़ने में थोड़ा कष्ट जरूर होता है, लेकिन स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका त्याग करना जरूरी हो जाता है। सुबह की सैर से शरीर में नई स्फूर्ति मिल जाती है। सुबह-सुबह पक्षियों का कलरव, मंद-मंद सुगंधित हवा, उगते सूरज को देखना और स्वच्छ आकाश को निहारने से मन को जो सुखद अनुभूति होती है, वह अप्रतिम है।

सुबह की सैर स्वास्थ्य निर्माण का सर्वोत्तम उपाय है। यह सस्ता भी है और मीठा भी, जिसके लिए न तो डाॅक्टरों को फीस देनी पड़ती है और न कड़वी दवाएं खानी पड़ती है। बावजूद इसके जब सुबह-सुबह सड़क किनारे कहीं किसी बुजुर्ग तो कहीं किसी मासूम बच्चे को तम्बाकू-गुटखा बेचते और लोगों को खरीदते हुए देखती हूँ तो मन खराब हो जाता है, जिससे सैर के आनंद को फुर्र होते देर नहीं लगती। सुबह-सुबह सैर को निकले कई लोग जब काका, बाबा, गुरू, विमल, रजनीगंधा, राजविलास, राजश्री जैसे शाही और दिलखुश नामों वाले गुटखों को मुँह में दबाये, स्मार्ट सड़क पर रंगीन पिचकारी मारते हुए देखती हूँ, तब यह बात समझ से परे होती है कि आखिर ये लोग सुबह-सुबह कैसा स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं?

आजकल तम्बाकू-गुटखा सबसे छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक सबसे फलते-फूलते कारोबार के रूप में स्थापित होता जा रहा है। कई लोग इसका एक जरूरी प्रमुख खाद्य पदार्थ की तरह उपभोग करने लगे हैं, जिससे हरतरफ इसकी मांग जोरों पर है। यह इतना सुलभ है कि आपको दस कदम पैदल चलने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। जगह-जगह छोटे-छोटे स्टाॅलों के अलावा यह पान की दुकान, किराने की दुकान, चाय की दुकान के साथ ही ढाबों, होटलों तक अलसुबह से लेकर देर रात तक बड़ी सुगमता से मिल रहा है। आज तमाम चेतावनी के बावजूद तम्बाकू खाने वालों की कोई कमी नहीं है। हर तीसरा व्यक्ति मुंह में तम्बाकू-गुटखा दबाए बड़ी सहजता से कहीं भी नजर आ जायेगा। आज विकट स्थिति यह बनती जा रही है कि घर-परिवार के सदस्यों से लेकर एक साधारण स्कूल, मेडिकल काॅलेज, इंजीनियरिंग काॅलेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले कई बच्चे और उनके कतिपय शिक्षक, सरकारी और प्रायवेट दफ्तरों में काम करने वाले बहुसंख्य अधिकारी/कर्मचारी तमाम चेतावनियों को दरकिनार कर तम्बाकू का सेवन बड़े शौक से कर रहे हैं।

यह गंभीर विचारणीय विषय है कि तम्बाकू का सेवन हमारे देश के नौनिहालों और बुजुर्गों से लेकर युवा वर्ग, जिन्हें राष्ट्र की दूसरी पंक्ति, कल के कर्णधार, देश के नेतृत्व करने वाले और अपनी शक्ति, सामर्थ्य व साहस से देश को परम-वैभव तक पहुंचाने का दायित्व स्वीकारने वाला समझा जाता है, की सर्वाधिक पंसद बन गई है, जो हमारे देश सेवा, समाज सेवा और विश्व कल्याण के स्वर्णााक्षरों में लिखे इतिहास को धूल-धूसरित करने के लिए अग्रसर हैं।

... कविता रावत

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anubhav
06 जून 2019

koi nahi sudharne wala

अभी कुछ दिन पहले ही विश्व तम्बाकू निषेध दिवस था , पर मैंने देखा की उस दिन तो लोगों ने एक पुड़िया ज़्यादा ही खरीदी

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