महेश नवमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

10 जून 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (107 बार पढ़ा जा चुका है)

महेश नवमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म का प्रत्येक अंग किसी न किसी मान्यता व परम्परा से जुड़ा हुआ है | चाहे जड़ हो या चेतन , पर्व हो या त्यौहार , यहाँ तक कि समाज का वर्गीकरण भी पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं से ही सम्बन्धित है | आज ज्येष्ठ शुक्लपक्ष की नवमी को "महेश नवमी" के नाम से जाना जाता है | इसका नाम महेश नवमी क्यों पड़ा ? इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता है जो "माहेश्वरी"(वैश्य वर्ण) समाज के उद्गम का स्रोत माना जाता है | धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश के थे | इस वंश के लोग शिकार खेलते - खेलते ऋषियों के आश्रम में पहुँच गये जिससे उनकी तपस्या भमग होने लगी | तब ऋषियों ने श्राप देकर उनके वंश को समाप्त कर दिया तथा उन शिकारियों को जड़वत् बना दिया | बहुत काल बीतने पर आज ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की नवमी को भगवान शिव ने उन्हें शाप से मुक्त कर उनके पूर्वजों की रक्षा की व उन्हें हिंसा छोड़कर अहिंसा का मार्ग बताया तथा अपनी कृपा से इस समाज को अपना नाम भी दिया इसलिए यह समुदाय 'माहेश्वरी' नाम से प्रसिद्ध हुआ |


भगवान शिव की आज्ञा से ही माहेश्वरी (महेश = शिव , वारि = समुदाय) समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य/व्यापारिक कार्य को अपनाया, तब से ही माहेश्वरी समाज व्यापारिक समुदाय के रूप में पहचाना जाता है | पूरे देश में महेश नवमी का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया जाता है तथा शिव-पार्वती से खुशहाल जीवन का आशीर्वाद मांगा जाता है |* *आज का दिन माहेश्वरी समाज का उत्पत्ति दिवस होने के कारण उस समाज का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है | महेश नवमी को माहेश्वरी समाज के लोग आदिदेव महादेव की पूजा करके यह पर्व मनाते हैं | यह दिन माहेश्वरी समुदाय के लिए बहुत धार्मिक महत्व लिए होता है | यह त्योहार ३ दिन पहले प्रारम्भ हो जाता है जिसमें चल समारोह, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है | यह दिन माहेश्वरी समाज के द्वारा भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए समर्पित है | महेश स्वरूप में आराध्य भगवान 'शिव' पृथ्वी से भी ऊपर कोमल कमल पुष्प पर बेलपत्ती, त्रिपुंड, त्रिशूल, डमरू के साथ लिंग रूप में शोभायमान होते हैं | शिवलिंग पर भस्म से लगा त्रिपुंड त्याग व वैराग्य का सूचक माना जाता है |


इस दिन भगवान महेश का लिंग रूप में विशेष पूजन व्यापार में उन्नति तथा त्रिशूल का विशिष्ट पूजन किया जाता है | आज के दिन भगवान शिव (महेश) को पृथ्वी के रूप में रोट चढ़ाया जाता है | शिव पूजन में डमरू बजाए जाते हैं, जो जनमानस की जागृति का प्रतीक है | यह त्यौहार मनाकर "माहेश्वरी समाज" अपने स्रष्टा भगवान महेश के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करता है |* *यदि सूक्ष्मता से देखा जाय तो सृष्टि के प्रत्येक अवयव किसी न किसी रूप से सनातन की मान्यताओं एवं कथाओं से सम्बद्ध हैं | आवश्यकता है सनातन धर्म को जानने एवं समझने की |*

महेश नवमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

अगला लेख: त्रिकाल संध्या :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



anubhav
11 जून 2019

bilkul sahi jankari

अच्छी जानकारी दी आपने , हर हर महादेव

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
25 जून 2019
*सृष्टि के प्रारम्भ में जब ईश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारम्भ की तो अनेकों औषधियों , वनस्पतियों के साथ अनेकानेक जीव सृजित किये इन्हीं जीवों में मनुष्य भी था | देवता की कृपा से मनुष्य धरती पर आया | आदिकाल से ही देवता और मनुष्य का अटूट सम्बन्ध रहा है | पहले देवता ने मनुष्य की रचना की बाद में मनुष्य ने द
25 जून 2019
17 जून 2019
*इस संसार में ब्रह्मा जी ने अलोकिक सृष्टि की है | यदि उन्हों ने दुख बनाया तो सुख की रचना भी की है | दिन - रात , साधु - असाधु , पाप - पुण्य आदि सब कुछ इस सृष्टि में मिलेगा | मनुष्य जन्म लेकर एक ही परिवार में रहते हुए भी भिन्न विचारधाराओं का अनुगामी हो जाता है | जिस परिवार में रावण जैसा दुर्दान्त विचा
17 जून 2019
25 जून 2019
*आदिकाल से ही मनुष्य एवं प्रकृति का अटूट सम्बन्ध रहा है | सृष्टि के प्रारम्भ से ही मनुष्य प्रकृति की गोद में फलता - फूलती रहा है | प्रकृति ईश्वर की शक्ति का क्षेत्र है | इस धरती का आभूषण कही जाने वाली प्रकृति की महत्ता समझते हुए हमारे महापुरुषों ने इसके संरक्षण के लिए सनातन धर्म के लगभग सभी ग्रंथों
25 जून 2019
23 जून 2019
सबसे पहले हम ये जाने की कीर्तन का सही अर्थ क्या है.Kirtan का सही अर्थ मैंने अभी कुछ दिन पहले सुप्रसिद्ध भागवत वाचक Goswami Shri Pundrik Ji Maharaj से जाना उनोहने जो बताया में आज आप लोगो से शेयर करती हूँ.Goswami Shri Pundrik Ji Maharaj के अनुसार हम जब किसी एक विशेष भगव
23 जून 2019
24 जून 2019
*सनातन धर्म बहुत ही वृहद होते हुए असंख्य मान्यताओं को स्वयं को समेटे हुए है | सनातन धर्म में समय - समय पर अनेक देवी - देवताओं के साथ ग्रामदेवता , स्थानदेवता , ईष्टदेवता एवं कुलदेवता की पूजा आदिकाल से की जाती रही है | प्रत्येक कुल के एक विशेष आराध्य होते हैं जिन्हें कुलदेवी या कुलदेवता के नाम से जाना
24 जून 2019
16 जून 2019
*मानव जीवन अनेक विचित्रताओं से भरा हुआ है | मनुष्य की इच्छा इतनी प्रबल होती है कि वह इस संसार में उपलब्ध समस्त ज्ञान , सम्पदायें एवं पद प्राप्त कर लेना चाहता है | अपने दृढ़ इच्छाशक्ति एवं किसी भी विषय में श्रद्धा एवं विश्वास के बल पर मनुष्य ने सब कुछ प्राप्त भी किया है | मानव जीवन में श्रद्धा एवं वि
16 जून 2019
23 जून 2019
*इस संसार में परमात्मा ने बड़ी विचित्र सृष्टि की है | देखने में तो सभी पक्षी एक प्रकार के ही दिखते हैं , सभी मनुष्यों की आकृति एक समान ही बनाई है परमात्मा ने परंतु विचित्रता यह है कि एक समान आकृति होते हुए भी प्रत्येक प्राणी के गुण एवं स्वभाव भिन्न - भिन्न ही हैं | अपने गुण , स्वभाव एवं कर्मों से ही
23 जून 2019
16 जून 2019
*मानव जीवन अनेक विचित्रताओं से भरा हुआ है | मनुष्य की इच्छा इतनी प्रबल होती है कि वह इस संसार में उपलब्ध समस्त ज्ञान , सम्पदायें एवं पद प्राप्त कर लेना चाहता है | अपने दृढ़ इच्छाशक्ति एवं किसी भी विषय में श्रद्धा एवं विश्वास के बल पर मनुष्य ने सब कुछ प्राप्त भी किया है | मानव जीवन में श्रद्धा एवं वि
16 जून 2019
24 जून 2019
*सनातन धर्म बहुत ही वृहद होते हुए असंख्य मान्यताओं को स्वयं को समेटे हुए है | सनातन धर्म में समय - समय पर अनेक देवी - देवताओं के साथ ग्रामदेवता , स्थानदेवता , ईष्टदेवता एवं कुलदेवता की पूजा आदिकाल से की जाती रही है | प्रत्येक कुल के एक विशेष आराध्य होते हैं जिन्हें कुलदेवी या कुलदेवता के नाम से जाना
24 जून 2019
11 जून 2019
*विशाल देश भारत में सनातन धर्म का उद्भव हुआ | सनातन धर्म भिन्न-भिन्न रूपों में समस्त पृथ्वीमंडल पर फैला हुआ है , इसका मुख्य कारण यह है कि सनातन धर्म के पहले कोई धर्म था ही नहीं | आज इस पृथ्वी मंडल पर जितने भी धर्म विद्यमान हैं वह सभी कहीं न कहीं से सनातन धर्म की शाखाएं हैं | सनातन धर्म इतना व्यापक
11 जून 2019
23 जून 2019
जब भी बैंगलोर या दक्षिण भारत जाना होता है तो चाय बंद हो जाती है और उस की जगह कॉफ़ी ले लेती है. कुछ मौसम का या शायद कॉफ़ी की खुशबू का असर होता है जिसके कारण चाय के बजाए कॉफ़ी पीने का मन करता है. एक और कारण भी है साउथ में चाय के ढाबे कम हैं और 'कॉफ़ी हाउस' ज्यादा लोकप्रिय हैं.
23 जून 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x