एक वृक्ष सौ पुत्र समान :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

25 जून 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (42 बार पढ़ा जा चुका है)

एक वृक्ष सौ पुत्र समान :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही मनुष्य एवं प्रकृति का अटूट सम्बन्ध रहा है | सृष्टि के प्रारम्भ से ही मनुष्य प्रकृति की गोद में फलता - फूलती रहा है | प्रकृति ईश्वर की शक्ति का क्षेत्र है | इस धरती का आभूषण कही जाने वाली प्रकृति की महत्ता समझते हुए हमारे महापुरुषों ने इसके संरक्षण के लिए सनातन धर्म के लगभग सभी ग्रंथों में दिशा निर्देश दिया है | वेदव्यास जी ने पद्मपुराण में लिखा है कि :- जो मनुष्य किसी भी मार्ग के किनारे एवं जलाशयों के तट पर जितने वृक्ष लगाता है वह स्वर्ग में उतने ही दिन तक सुखभोग करता है | इसके अतिरिक्त भी प्रकृति के संरक्षण करने का ही उपदेश मिलता रहता है | प्रकृति की ही गोद में बैठकर हमारे महर्षियों ने कठोर साधना की , कवियों ने जब प्रकृति की सुंदरता का दर्शन किया तो उनके हृदय से कवितायें फूट पड़ीं | हमारे धर्मग्रन्थ , ऋषि - मुनियों की वाणियाँ , कवि की काव्य रचनायें , सन्तों के अमृत वचन ये सभी प्रकृति के महत्त्व से भरे पड़े हैं | भारत ही नहीं अपित विश्व की लगभग सभी सभ्यताओं का विकास प्रकृति की हा गोद में हुआ है | इसी प्रकृति के संयोग से ही मनुष्य में रागात्मक भाव प्रकट हुआ | मनुष्य ने प्रकृति पर कभी आघात न करने एवं उसके संरक्षण की सौगंध ली थी परंतु मनुष्य अपनी सौगंध को समय के साथ भूलता चला गया और स्थिति भयावह होती चली गयी |* * आज प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है तो इसका कारण कहीं ना कहीं से मन से ही है प्रतिदिन नष्ट होते जंगलों एवं दिव्य औषधियों के कारण ही प्राकृतिक का विघटन कार्य स्वरूप आज देखने को मिल रहा है मनुष्य जिस अनुपात में आज वृक्षों को काट रहा है उसकी अपेक्षा एक भी पिक्चर नहीं लगाना चाहता है जबकि प्रकृति का आधार व्यक्ति ही कहा गया है वृक्षों के कम हो जाने के कारण धरती के तापमान में वृद्धि हुई है जिसके कारण अनेकों हिमनद पिघल रहे जलवायु में परिवर्तन देखने को मिल रहा है कहीं भयंकर बाढ़ तो कहीं अकाल तो पढ़ ही रहे हैं साथ ही बीच बीच में आने वाले भूकंप संपूर्ण पृथ्वी को खिला देते हैं यदि हमारा यही हाल रहा तो आने वाले कुछ दशकों में यह धरती वृक्ष विहीन हो जायेगी | जहाँ तक मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" जान पाया हूँ वह यह है कि प्रकृति कभी किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं करती सबके लिए समान रूप से व्यवहार करती है परंतु जब हम प्रकृति के साथ अनावश्यक खिलवाड़ करते हैं तब उसकी प्रतिक्रिया भूकंप सूखा बाढ़ और तूफान की शक्ल में देखने को मिलती है जिसके कारण अनेकों लोग काल के गाल में समा जाते हैं ऐसी स्थिति ना आने पाए या ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए हमको प्रकृति का संरक्षण करते रहना चाहिए क्योंकि जब जीवन ही नहीं रहेगा तो संसार के समस्त ऐश्वर्या लेकर के क्या किया जाएगा

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anubhav
26 जून 2019

Nice

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