महारानी पद्मावती जैसी पत्नी चाहता था खिलजी! - Padmavati history in Hindi

05 जुलाई 2019   |  स्नेहा दुबे   (106 बार पढ़ा जा चुका है)

महारानी पद्मावती जैसी पत्नी चाहता था खिलजी! - Padmavati history in Hindi

रानी पद्मावती की कहानी | Rani Padmavati Story in Hindi

इतिहास में चित्तौड़गढ़ से बहुत सी कहानियां हैं जिनके बारे में लोग दिलचस्पी के साथ पढ़ते है। इतिहास में सबसे ज्यादा लोकप्रिय रानी हैं पद्मावती औऱ इनकी खूबसूरती के बारे में कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने एक कविता भी लिखी है। रानी पद्मावती अपनी सुंदरता के लिए पूरे भारत में पहचानी जाती हैं। मगर बहुत से लोगों का मानना है कि Rani Padmavati के अस्तित्व को लेकर इतिहस में कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है लेकिन अगर आप चित्तौड़ जाते हैं तो आज भी महारानी पद्मावती की छाप आपको दिखाई देगी।

जन्म- सिंहल द्वीप

पिता- राजा गंधर्व सेन

माता- रानी चंपावती

धर्म- हिंदू, क्षत्रिय

पति- राजा रावल रत्न सिंह

मृत्यु- 1303, चित्तौड़

मृत्यु कारण- जौहर (खुद को अग्नि के हवाले करना)

रानी पद्मावती की कहानी (Rani Padmavati Story)



12वीं और 13वीं शताब्दी में चित्तौर के राजपुत राजा रावल रतन सिंह का राज्य था जो सिसोदिया राजवंश से ताल्लुक़ रखते थे। वे एक बहादुर योद्धा थे जिन्होने अपनी सूझ-बूझ से कई लड़ाई जीती थी। राजा रतन सिंह ने 13 शादियां की थीं लेकिन फिर भी वे सिंघाला एक स्वयंवर में गए, जहां रानी पद्मिनी के पिता ने एक आयोजन किया था। रतन सिंह को पद्मिनी भा गईं और उन्होंने उनसे शादी करने का फैसला किया। रानी पद्मावती बेहद खूबसूरत राजकुमारी थीं और उके सुंदरता के चर्चे कई राज्यों में थे लेकिन वे रतन सिंह की पत्नी बनकर चित्तौड़ पहुंच गईं। ऐसा बताया जाता है कि इस स्वंयवर में रावल रतन सिंह ने मलकान सिंह को हरा दिया था। रतन सिंह पत्नी पद्मावती से बहुत प्यार करने लगे थे और इसके अलावा वे कला के भी बहुत शौकीन थे। उनके दरबार में कई तरह में संगीतकार, कवि, दायक और नर्तकियां हुआ करती थीं लेकिन सबसे खास राघव चेतन भी थे जिन्हें संगीत के साथ ही काला जादू भी आता था। राघव चेतन ने पद्मावती की खूबसूरती को भांप लिया था। राघव अपने काले जादू से राजा रतन सिंह के खिलाफ कुछ करना चाहता था लेकिन कर नहीं पाता था। तभी एक बार उसने राजा रतन सिंह और पद्मावती को खास पल बिताते छिपकर देखने लगा था लेकिन पद्मावती ने महसूस कर लिया और राजा को बताया। राजा जब कमरे के बाहर देखने गए तो चेतन की महक से पहचान पाए और उसी समय उन्हें दरबार में बुलाया। इस कड़ी और घिनौनी सजा से राजा रतन सिंह ने उन्हें राज्य से निकाल दिया।



राघव चेतन अपना ये अपमान नहीं भूल पा रहा था और उसने प्रतिज्ञा कर ली कि वो राजा रावल रतन सिंह को बर्बाद कर देगा। राघव चेतन ने राज्य छोड़ दिया और दिल्ली आ गए। यहां पर वे दिल्ली के सुल्तान से हाथ मिलाकर राजा रतन सिंह को बर्बाद करना चाहते थे। अलाउद्दीन खिलजी हर दिन जंगल मं शिकार करने आते थे और उससे मिलने की चाह में राघव हर दिन वहां बांसुरी बजाता था। एक दिन राघव के बांसुरी की धुन अलाउद्दीन ने खुनी और उसे अपने दरबार में बुलवाया। दरबार में जब अलाउद्दीन ने राघव से पूछा कहां से आए हो राघव ने बताया कि वो चित्तौड़ से आया है और उसके पास इस धुन के अलावा बहुत सी सुंदर चीजें बताने के लिए हैं। अलाउद्दीन औरतों के मामले बहुत पिघला हुआ इंसान था सुंदरता से मतलब उसने कुछ लगाया और गहराई से बताने को कहा। तब राघव ने महारानी पद्मावती की सुंदरता का बखान करना शुरु कर दिया। चालाक राघव ने महारानी की सुंदरता का बखान इस तरह किया कि अलाउद्दीन की उत्सुकता बढ़ने लगी और उसने चित्तौड़ पर हमला करने के बारे में विचार करना शुरु कर दिया।


अलाउद्दीन खिलजी की चित्तौड़गढ़ पर चढ़ाई



Rani Padmavati की सुंदरता को सुनकर अलाउद्दीन खिलजी ने दो दिनों के अंदर ही चित्तौर पर चढ़ाई शुरु कर दी। वहं पहुंचकर उसने देखा कि बहुत ज्यादा सुरक्षा है तो वो निराश हो गया लेकिन अब वो पद्मावती को देखने के लिए वो कुछ भी कर सकता था। उसने युद्ध के लिए राजा को ललकारा लेकिन 6 महीनों तक कोई संदेश नहीं मिलने पर उसने रावल रत्न सिंह को एक संदेश के जरिए बताया कि वो उनसे मिलना चाहता है। रावल रतन सिंह ने उनसे मिलने के लिए हामी भरी और खाने पर उसे बुलाया। उस दौरान महल में एक भी महिला को उसके सामने आने की अनुमति नहीं थी और पुरुष ही सारा काम कर रहे थे। महारानी को देखने के लिए उत्सुक अलाउद्दीन खिलजी ने राजा से उनके परिवार से मिलने की बात कही तो राजा ने बताया यही उनका परिवार है। आखिर में उसने उनकी पत्नी रानी पद्मावती को देखने की ख्वाहिश बताई। इसपर पहले तो राजा क्रोधित हुए लेकिन अथिति देवो भव कहावत के आगे मजबूर हो गए। पहले तो राजा ने इस बात के लिए मना किया लेकिन पद्मावती ने राजा को कहा कि अगर खिलजी उन्हें देखकर चला जाएगा तो देख लेने दो कम से कम राज्य युद्ध से तो बच सकता है। फिर राजा रावल रतन सिंह ने निश्चय किया कि वो रानी का आईने में सिर्फ प्रतिबिंब देखेगा। खिलजी मान गया और जब ऐसा किया गया तो उसने रानी का प्रतिबिंब देखकर ही हैरान रह गया और उसने निश्चय किया कि वो रानी को पाकर ही रहेगा।



उस समय तो खिलजी वहां चला जाता है लेकिन अपनी चालाकी से वो राजा को भी खातिरदारी के लिए अपने कैंप में बुलाता है। राजा उसकी बात मानकर चले जाते हैं लेकिन वहां खिलजी राजा को बंदी बना लेता है और चित्तौर से रानी पद्मावती की मांग कर लेता है। पहले को इस बात को कोई नहीं मानता और सेनापती राजपूत जनरल गोरा और बादल राजा को बचाने के लिए युद्ध की बात करते हैं। मगर रानी अपनी सूझ-बूझ से राजा को बचाने का निश्चय करती हैं लेकिन वे अपनी कुछ शर्ते रख देती हैं जैसे- रानी अपनी 150 दासियों के साथ वहां जाएंगी, जहां रानी पहुंचेंगी वहां पर कोई पुरुष नहीं होगा और रानी का स्वागत खुद खिलजी की बेगम मल्लिका-ए-जहां करेंगी। खिलजी महारानी की सभी शर्तें मान लेता है और अगली सुबह पद्मावती 150 पालकी के साथ दिल्ली पहुंच जाती हैं। इसके बाद पद्मावती राजा को खिलजी की बेगम की मदद से दिल्ली से बाहर की एक सुरंग के द्वारा बाहर निकालने में कामयाब हो जाती हैं। जब ये बात खिलजी के दरबार में जाती है कि 150 दासियों में महिलाएं नहीं बल्कि रावल रतन सिंह की सेना है तो खिलजी अत्यंत क्रोधित हो जाता है। खिलजी अपनी ये हार बर्दाश्त नहीं कर पाता है और अपनी बेगम को कालकोठरी में डालने का हुकुम देकर चित्तौड़ पर आक्रमण करने का ऐलान कर देता है।


खिलजी चित्तौड़ पर आक्रमण करता है और राजा रतन सिंह भी युद्ध करने का एलान करते हैं। युद्ध में भेजने से पहले रानी पद्मावती उनसे खुद को जौहर करने की आज्ञा लेती हैं लेकिन राजा नहीं मानते हैं। तभी रानी ने उन्हें बोला कि अगर युद्ध भूमि में राजा रावल रतन सिंह वीरगति को प्राप्त होंगे तो रानी के जीने का भी कोई मतलब नहीं होगा। बहुत मुश्किल से राजा मान जाते हैं और युद्ध करने निकल पड़ते हैं। राजा अपने सैनिकों को बोलते हैं कि किले का दरवाजा खोल दिया जाए और आखिर समय तक उनसे लड़ना है। इस बात से रानी बहुत निराश होती हैं और जब किले में ये खबर आती है कि राजा रावल रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हुए फिर महारानी जौहर की तैयारी में लग जाती है।


महारानी पद्मावती की मृत्यु


ऐसा बताया जाता है कि 26 अगस्त, 1303 में पद्मावती ने जौहर कर लिया था। इसका मतलब खुद को आग के हवाले कर देना होता है। किले की महिलाएं भी महारानी के साथ जौहर कर लेती हैं और सभी महिलाओं के खत्म होने के बाद पुरुषों के पास लड़ने की कोई वजह नहीं बचती है। उन्होंने आखिरी दम तक लड़ाई की तो कुछ ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस युद्ध में अलाउद्दीन खिलजी की जीत हुई लेकिन उसने आखिरी समय तक महारानी को नहीं देखा। जब अलाउद्दीन चित्तौर के किले में पहुंचता है तो उसे वहां सिर्फ मृत शरीर, राख और हड्डियां ही मिली।


पद्मावती पर बनी बॉलीवुड में फिल्म



साल 2018 में आई निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत जितनी विवादों में रही उतनी ही पॉपुलर भी हुई थी। बॉक्स-ऑफिस पर इस फिल्म ने धमाल मचा दिया था। खुद को महारानी पद्मावती का वशंज बताने वाले करणी सेना प्रमुख ने खूब बवाल किया था और कहा था कि इस फिल्म को किसी भी हाल में रिलीज नहीं होने देंगे। फिल्म रिलीज भी हुई और 300 करोड़ का बिजनेस भी कर गई। उन्हें आपत्ति थी कि फिल्म में महारानी पद्मावत और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कुछ लव मेकिंग सीन भी दिखाए गए जबकि फिल्म देखने वालों ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं था। इसके बाद बहुत से लोगों ने महारानी पद्मावती के बारे में जानना चाहा था और आज भी लोग उनकी कहानी पढ़ना चाहते हैं।


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