कमलादेवी चटोपाध्याय जीवनी: राजनीतिक चुनाव लड़ने वाली पहली महिला, जिन्होंने खाई थी जेल की हवा

22 जुलाई 2019   |  सौरभ श्रीवास्तव   (76 बार पढ़ा जा चुका है)

कमलादेवी चटोपाध्याय जीवनी: राजनीतिक चुनाव लड़ने वाली पहली महिला, जिन्होंने खाई थी जेल की हवा

आजाद भारत को देखने के लिए ना सिर्फ महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू या कई स्वतंत्रता सेनानियों का सपना था बल्कि कुछ और भी क्रांतिकारियों ने जेल की हवा खाई थी। उन्हीं में से एक थीं कमालदेवी चट्टोपाध्याय जिन्होंने समाज और देश के लिए बहुत से ऐसे काम किये जिनके लिए हमें उनके ऊपर गर्व होगा। kamaladevi chattopadhyay ki jivani के बारे में हम सभी को पता होना चाहिए क्योंकि वे देश का गौरव हैं जिन्होंने अपने आखिरी समय तक देश के बारे में सोचा और इसी के हक में काम किए।

कौन थीं कमला देवी चट्टोपाध्याय? Who is Kamladevi Chatopadhyay


kamaladevi chattopadhyay

कमलादेवी जी ने भारत के हस्तशिल्प को फिर से जीवित किया और इसके साथ ही देश के सभी राष्ट्रीय संस्थानों जैसे नृत्य, नाटक, कला, रंगमंच, को प्रचार प्रसार में लगाने पर बल दिया। कमलादेवी चट्टोपाध्याय न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी, अभिनेता या सामाजिक कार्यकर्ता थीं बल्कि भारतीय कलाओं के प्रति उनके अंदर उत्साह, राजनीती, नारीवाद और भारतीय संस्कृति के श्रेत्र में उनके अमूल्य योगदानों को याद किया जाता है और ये योगदान भारत देश के बाहर काफी कम लोग जानते है।


इंटरनेशनल नारीवादी आंदोलन में कमलादेवी जी की अहम भूमिका रही है। सन् 1920 से 1940 और उसके बाद भी कमलादेवी को भारत की महिलाओं और राजनीतिक स्वतंत्रता के दूत की उपाधी दे दी। अगर हम उनकी वकालत के संदर्भ में बात करें तो यह पता चलता है कि उन्होंने देश में नस्लवाद, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था जैसे अंतरराष्ट्रीय कारणों की भी उच्च स्तर पर वकालत की। यहां तक की इन्हेंने सन् 1929 में Berlin में International Alaince of Women में भी भाग लिया था। मैंगलोर के ब्राह्मण कुल में पैदा हुई कमलादेवी गांधी के विचारों और अहिंसा की अवधारणा से बहुत ही प्रेरित थीं। यहां तक की इनके माता पिता भी स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे। कमलादेवी के उपर से कम उम्र में ही पिता का साया हट गया और इसके बाद इनका पालन-पोषण इनकी मां के पास हुआ।



राजनीति में पहला पड़ाव -


राजनीति के क्षेत्र में पहला पड़ाव उन्हेंने मामा के घर से शुरू किया एक उल्लेखनीय समाज सुधारक, प्रसिद्ध वकीलों, राजनीतिक प्रकाशकों, और सार्वजनिक हस्तियों ने कमलादेवी को गोखले, श्रीनिवास शास्त्री, पंडिता रमाबाई, और सर तेज बहादुर के बीच धकेल दिया। सन् 1923 तक कमलादेवी, गांधी जी की विचारधारा पर चलते हुए, कांग्रेस पार्टी मे शामिल होकर काम करना शुरू किया। मात्र 3 वर्ष के बाद कमलादेवी Kamaladevi Chattopadhyay ने मद्रास विधान सभा की सीट के लिए चुनाव लड़ा और केवल 55 वोटों से हारीं।



आंदोलन में सहयोग -


kamaladevi chattopadhyay

नमक सत्याग्रह आंदोलन की एक मजबूत अधिवक्ता थीं, लेकिन आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी न होने के गांधी के फैसले में मतभेद व्यक्त किया। कमलादेवी के ऊपर पर नमक के कानून को तोड़ने का आरोप लगाया गया था जिससे उन्हें जेल की सजा सुना दी गयाी। कमलादेवी देश के साथ-साथ भारत के बाहर अन्य देशों से भी अच्छे राजनीतिक संबंध बना रही थीं। सन् 1926 कमलादेवी Irish-Indian-Suffragette Margret Cousins से मुलाकात की। जिसने अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की स्थापना की थी। कमलादेवी महान लेखिका भी थीं और भारतीय महिलाओं के अधिकारों पर उन्होंने पहला लेख लिखा था। 1929 के लिए। INDIAN WOMEN BATTLE FOR FREEDOM इनकी आखिरी किताब सन् 1982 में प्रकाशित हुई।



फरीदाबाद की स्थापना -




सबसे रूचि की बात तो यह है कि फरीदाबाद के जन्म में कमलादेवी ने अहम भूमिका निभाई और इस बात की जानकारी बहुत कम भारतीयों को है। INDIAN COOPERATIVE UNION (ICU) के संस्थापक भी रहीं और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत NORTH WEST FRONTIER PROVINCE (NWFP) से कुल पचास हजार पठानों को फिर से एकता में बांधने का का काम किया। हस्तशिल्प में उनके योगदान के अलावा, उन्होंने 1944 में भारतीय राष्ट्रीय रंगमंच or INDIAN NATIONAL THEATRE (INT) की स्थापना की। जिसे आज हम सभी भारतीय राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रूप में जानते हैं। यह नृत्य, लोककथाओं और मुशायरों जैसे प्रदर्शन के स्वदेशी तरीकों को पहचानने और नकारने के लिए और स्वतंत्रता संग्राम में मदद करने के लिए एक आंदोलन का रूप था।


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