वक़्त

23 जुलाई 2019   |  मनु   (638 बार पढ़ा जा चुका है)

वक़्त

कभी वक़्त मिले तो बुनना

कुछ अनजाने सपनों को

कुछ अनकही सी बातों को कभी वक़्त मिले तो बुनना ,मेरी तेरी यादों की बंधी हुई इक माला को कभी वक़्त मेल तो बुनना डॉ मनु चौधरी

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सुन्दर

वक़्त का पहिया कोइ नहीं रोक सकता ....

वाह , बहुत खूब

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