देश और समाज के विकास में महिलाओं का योगदान अहम्

30 जुलाई 2019   |  swati anand   (5321 बार पढ़ा जा चुका है)



-स्वाति आनंद


नारी ईश्वर की उत्कृष्ट सृष्टि है । कहते है कि नारी को देवी का रूप मन जाता है।देश के सम्पूर्ण विकास में इस देवी की भागीदारी अनिवार्य है। किसी भी समाज या देश के विकास में नारी का योगदान महत्वपूर्ण होता है। किसी भी राष्ट्रनिर्माण या समाज के विकास में जब तक नारियों भी भागीदारी नहीं होगी तब तक एक देश कभी भी समृद्ध ,विकसित व शक्तिशाली राष्ट्र नही बन पायेगा। वर्तमान समय में नारी न केवल घर -गृहस्थी बल्कि हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में घर की चौखट और चारदीवारी से बहार निकल कर कही नारी माउंट एवरेस्ट फतह कर रही तो कहीं देश के बही- खाता संभाल रही हैं।

अगर इतिहास के पन्नो को उलट के देखें तो हमे पता चलेगा कि आज भारत यदि इस मुकाम पर पहुंचा है तो वह प्राचीन काल से ही नारियों की राष्ट्र निर्माण व समाज के लिए किये गए योगदान के कारण ही पहुंचा है।भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के समय में नारियों का पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चलने से ही भारत विकास की गति में रफ़्तार पकडे हुए है। आज के समय में भी नारी किसी मामले में पुरुषों से कम नही हैं बल्कि वह पुरुषों को भी मात देकर राष्ट्र निर्माण व् समाज के उत्थान के लिये अपनी हाथों में कमान थामी हुई हैं। भारत ही नही बल्कि संपूर्ण विश्व में ऐसा कोई राष्ट्र न होगा जिसके निर्माण में नारी का योगदान न हो। परंतु कुछ तथाकथित पुरुष आज भी नारियों को गलत दृष्टिकोण से देखते हैं व उनकी कोमलता का फायदा उठाते हैं। यदि आज हमारे देश के पुरुष वर्ग नारियों का सम्मान करेंगे ,उनकी इज्जत करना शुरू करेंगे तो भारत को विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्र की सूचि में शामिल होने से कोई नही रोक सकता।

हमें समाज ही नही बल्कि राष्ट्र के निर्माण में नारी के योगदान की बहुत आवश्यकता है। जरूरत है कि नारी जाति में व्याप्त अशिक्षा व आत्मविश्वास के अभाव को दूर किया जाए व् उन्हें खुले आसमान में उड़ने का मौका दिया जाए ताकि वे अपनी क्षमताओं का प्रयोग करके समाज व् राष्ट्र के उत्थान में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकें।



बहुत अच्छी बात लिखी स्वाति , आपकी अच्छी सोच है ये , और अच्छे से जीने का मौका मिलना आज हक़ है हमारा . पर आज भी क्या क्या हो रहा है , ये जगजाहिर है . दुःख होता है ऐसा पढ़कर जब किसी कमज़ोर मज़बूरी की ज़िन्दगी जीते हुए देखती हूँ .

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