वो जून कि गर्मी, वो पीपल का साया

03 अगस्त 2019   |  इन्दर भोले नाथ   (436 बार पढ़ा जा चुका है)

वो जून कि गर्मी, वो पीपल का साया

वो यारों की टोली, वो रिश्तों का माया

वो मिट्टी का घरौंदा, वो खपरैलों का छत

लिए सोंधी सी खुश्बू, वो काग़ज़ का ख़त


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