अस्तित्व

03 अगस्त 2019   |  लाखम राठौङ   (471 बार पढ़ा जा चुका है)

सितारों,

आज कहां छुपे हो?

गुंफित से फिर नहीं दिखे हो

चमक दिखी

न दिखा वो नूर

कैसे भैया चकनाचूर?

~~~~~

नहीं दिखेंगे अब से तुमको

क्या मिलेगा हमसे सबको

तिमिर गया

न गया वो अंधेरा

सूरज से ही होत सवेरा !

~~~~~~

करो न अपने दिल को छोटा

छोटे से बढ बनते मोटा

सूरज भी इक तारा है

तुमसे नहीं वो न्यारा है।

~~~~

ना मान मिला न होती पूजा

सूरज तो सबसे है दूजा

प्यार मिला उसको भरपूर

हम तो हो गये चकनाचूर,

~~~~~

सुनो, सितारों बात हमारी

सुन्दरता पहचान तुम्हारी

खुद में जीना अच्छा है

जो मिला ,खूब वो सच्चा है

करो न अब तुम आनाकानी

आओ बाहर अमृत दानी

~~~~



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