मेरा दोस्त

04 अगस्त 2019   |  कपिल सिंह   (402 बार पढ़ा जा चुका है)

मेरा दोस्त

जीवन के बाइस वर्षो तक मुझे खास दोस्त और दोस्ती का अर्थ भी नहीं पता था या फिर ऐसे कहूँ कि मुझे इनकी सिर्फ कागज़ी जानकारी थी और अपने आस पास घट रहे दोस्ती के उदाहरण देख लिया करता था। इतने वर्षो के बाद मेरा मिलान एक बेहद साधारण व्यक्तित्व के इंसान से तब हुआ जब मैं बहुत घबराया हुआ था। मेरे चाचाजी अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें ब्लड की बहुत जरुरत थी। कही से भी व्यवस्था करना बहुत मुश्किल हो रहा था। ऑफिस से आये २-३ कॉलीग से मैंने ब्लड डोनेट के लिए आग्रह किया लेकिन सब ने किसी ना किसी बहाने से मना कर दिया। उनके साथ एक चश्मे वाला मोटा सा लड़का था जिसे मैंने पहली बार देखा था जो मेरे ऑफिस के कॉलीगस के साथ ही आया था, उसने मेरे पास आकर कहा "चिंता मत करो, मैं दे दूंगा ब्लड". मेरी साँसों में सांस आयी कि अब ब्लड की व्यवस्था हो पाएगी। उसने ब्लड दिया और मेरे चाचा जी स्वस्थ होकर घर आ सके। उस दिन मैं तो उसका नाम भी नहीं पूछ पाया था। जैसे ही मैं ऑफिस गया तो मैंने अपने कॉलीग से उसका नाम जानना चाहा तो मैं ये सुन कर स्तब्ध रहा गया कि उसने मेरे चाचाजी को ब्लड देने से मात्र ३ दिन पहले भी किसी को ब्लड डोनेट किया था। अब मेरे मन में उसके लिए सम्मान और बढ़ गया। मैं उस से मिला और धीरे-धीरे हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए।

आज पूरे 15 वर्ष हो गए हमारी दोस्ती हुए। हमारा रिश्ता एक बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के रिश्ते से कम नहीं है। अभी भी हमारी बहस हो जाती है और लड़ाई हो जाती है तो 4-4 दिनों तक हम बात नहीं करते। लड़ाई होने पर सबसे पहले फ़ोन करके मनाने का जिम्मा हमेशा उसका है। उसकी ये शिकायत मुझसे हमेशा रहती है कि मैं उसे पहले फ़ोन नहीं करता। लेकिन मैंने उसे कभी बताया नहीं कि मैं भी बेसब्री से उसके फ़ोन आने का इंतज़ार करता हूँ।

छोटी सी चोट से लेकर बड़ी से बड़ी पारिवारिक समस्याओं का भी साझा मैं उसके साथ करता हूँ। आनुवंशिक रूप से तो मेरे कोई भाई नहीं है लेकिन वो मेरे लिए भाई से कम नहीं है। एक जीवनसाथी की तरह वो मेरे जीवन का महत्त्वपूर्ण अंश बन गया है। उसने मेरे लिए हर तरह की भूमिका निभायी है, बड़े भाई की तरह हर क्षेत्र में सहायता की है, पिता जी की तरह जीवन के पाठ पढ़ाये है, माँ की तरह देख भाल भी की है। मैं कृतज्ञ हूँ भगवान का (और जाने अनजाने मेरे चाचा जी का भी) कि मैं "रवि" से मिल पाया।
ये लेख मैंने दोस्ती का वर्णन करने के लिए नहीं लिखा अपितु मेरे दोस्त को समर्पित किया है। ये दोस्ती और आप सबका आशीर्वाद सदैव बना रहे ।

धन्यवाद

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रेणु
05 अगस्त 2019

प्रिय कपिल , आपका संस्मरण बहुत ही भावुक कर देने वाला है । नमन करती हूँ इस नि स्वार्थ मित्रता को। 🙏🙏🙏🙏🙏और इसका रंग कभी फीका ना पड़े, ये दुआ करती हूँ। मेरी हार्दिक शुभकामनायें आप दोनों के लिए 💐💐💐💐💐💐

कपिल सिंह
05 अगस्त 2019

बहुत बहुत धन्यवाद मैम

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