आओ मिलकर पेड़ लगाएँ

09 अगस्त 2019   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (567 बार पढ़ा जा चुका है)

आओ मिलकर पेड़  लगाएँ

आओ मिलकर पेड़ लगाएँ, जीवन में खुशहाली लाएँ |

निज अस्तित्व बचाने को हम इन वृक्षों का मान बढ़ाएँ ||

सुबह सवेरे सूरज आकर आँख मिचौली करता इनसे |

कभी डाल पर, कभी पुष्प पर, कभी फलों पर करता डेरा ||

हरे भरे पेड़ों पर ही तो पंछी गाते गान सुरीला |

और पेड़ की छाया में ही हर पंछी का रैन बसेरा ||

पुष्प हवा फल खुशबू से है महका जाता हर घर आँगन |

और भँवरे का मस्त गान सुन नाच दिखाता मस्त मयूरा ||

बौरा जाते आम तो कोयल पञ्चम का तब राग सुनाती |

मस्त वसन्त धनुष पर अपने कामदेव का बाण चढ़ाता ||

शीतलहर का हल्का झोंका मन में अनगिन भाव जगाता |

कभी ताप से व्याकुल पंथी छाया में विश्राम है पाता ||

इनसे ही हैं साँसें अपनी, इनसे ही है जीवन अपना |

आओ मिलकर पेड़ लगाएँ, जीवन में खुशहाली लाएँ ||

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