हम एवं हमारे पूर्वज :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

22 अगस्त 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (2646 बार पढ़ा जा चुका है)

हम एवं हमारे पूर्वज :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीनकाल में जब मनुष्य अपन्े विकास पथ पर अग्रसर हुआ तो उसके पास उसकी सहायता करने के लिए साधनों का अभाव था | शारीरिक एवं बौद्धिक बल को आधार बनाकर मनुष्य ने अपने विकास में सहायक साधनों का निर्माण करना प्रारम्भ किया | आवश्यक आवश्यकताओं के अनुसार मनुष्य ने साधन तो प्राप्त कर लिए परंतु ज्ञान प्राप्त करने के साधन सीमित ही थे | वेद , पुराण , उपनिषद , रामायण आदि धर्मग्रंथ सब को पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं होते थे , इनकी सुविधा कुछ गिने-चुने लोगों के पास ही होती थी , परंतु उन लोगों के माध्यम से एक पूरा समाज एक साथ बैठकर के सत्संग के माध्यम से इन धर्म ग्रंथों की बातों को सुन करके उनको जीवन में उतारने का प्रयास करता था | जिससे मनुष्य की मनोभूमि संस्कारित होती रहती थी , और हमारे पूर्वज संस्कृति एवं संस्कार के अनुपम उदाहरण भी बने | मनुष्य के विकास में एवं मनुष्य को संस्कारित करने में हमारे धर्म ग्रंथों एवं उनके माध्यम से होने वाले सत्संगों का बहुत बड़ा योगदान रहा है | जीवन में चर्चा - परिचर्चा एवं सत्संग - स्वाध्याय का महत्व हमारे पूर्वजों ने समझा था और उसका पालन करके उन्होंने हम एक सुंदर वातावरण तैयार करके दिया | हमारे पूर्वज ज्यादा पढ़े लिखे तो नहीं थे परंतु वे जो सुनते थे उसको जीवन में उतारने का प्रयास करते थे | वही उनके लिए शिक्षा होती थी और उसी का प्रभाव है कि कम पढ़े लिखे होने के बाद भी उनको आज के पढ़े लिखे लोगों से अधिक ज्ञानी कहा जा सकता है | मात्र किसी विषय को पढ़ लेना ही नहीं महत्वपूर्ण है अपितु महत्वपूर्ण है उसको अपने जीवन में धारण करना | यही रहस्य हमारे पूर्वजों ने समझा था |*


*आज के आधुनिक युग में मनुष्य को अधिक विकसित एवं समर्थ करने का प्रयास बहुत ही तेजी से चल रहा है | एक तरफ जहां विज्ञान के रूप में मनुष्य को ऐसा हथियार मिल गया है जिसके बल पर वह दूरगामी लक्ष्य को भी आसानी से शीघ्रता के साथ निशाना बना रहा है | जहां पहले मनुष्य के पास साधन का अभाव था , पढ़ने लिखने की सुविधाएं सीमित थीं , सारा जीवन प्रयत्न करने पर भी कोई व्यक्ति किसी एक क्षेत्र में ही पहुंच पाता था वहींं आज स्थिति अलग है | थोड़ी सी सूझबूझ और थोड़ा सा पैसा मिलाकर व्यक्ति थोड़े से समय में ही चाहे तो अपने विचार और अपने निष्कर्ष हजारों लाखों नहीं करोड़ों तक पहुंचा सकता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह कह सकता हूं कि आज लाखों की संख्या में धर्मग्रंथ छप रहे हैं और हाथों हाथ बिक भी जा रहे हैं लोग उनका स्वाध्याय भी कर रहे हैं परंतु इतना सब होने के बाद भी पहले की अपेक्षा मनुष्य की आंतरिक चेतना में गिरावट आई है | क्योंकि पहले के लोग जहां धर्मग्रंथों की बात पढ़कर या सुनकर उन्हें आचरण में लाने का प्रयास करते थे वहीं आज के युग में सत्संग स्वाध्याय केवल मनोरंजन या वाग्विलास का साधन बनकर रह गया है | जिस प्रकार चिकने घड़े पर पानी की बूंद भी नहीं ठहरती है उसी प्रकार लोगों के मनोभूमि में इतनी गिरावट आती जा रही है कि उन पर इन प्रेरणा का कोई असर होता नहीं दिख रहा है | पुस्तकें पढ़ लेने मात्र से कुछ नहीं होता है , सत्संग सुन लेने मात्र से जीवन नहीं सुधरता है बल्कि सत्संग एवं पुस्तकों में वर्णित व्याख्यान को स्वयं के जीवन में उतारना पड़ता है | यही आज हम नहीं कर पा रहे हैं और दिग्भ्रमित हो करके जीवन यापन कर रहे हैं |*


*यदि हमारे पूर्वज अनपढ़ होते हुए भी ज्ञानवान हो गए थे तो उसका कारण था कि वे कहीं से भी सुने हुए ज्ञान को आत्मसात कर लेते थे | परंतु आज का मनुष्य स्वयं इतना ज्ञानी हो गया है कि दूसरों की बात उसके हृदय में ठहरती ही नहीं है | यही कारण है कि हम आधुनिक होते हुए भी अपने पूर्वजों से बहुत पीछे रह गये हैं |*

अगला लेख: संयुक्त परिवार :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
19 अगस्त 2019
निर्माण नशेमन का नित करती, वह नन्हीं चिड़िया ज़िद करती। तिनके अब बहुत दूर-दूर मिलते, मोहब्बत के नक़्श-ए-क़दम नहीं मिलते।ख़ामोशियों में डूबी चिड़िया उदास नहीं, दरिया-ए-ग़म का किनारा भी पास नहीं। दिल में ख़लिश ता-उम्र सब्र का साथ लिये, गुज़रना है ख़ामोशी से हाथ में हाथ लिये। शजर
19 अगस्त 2019
26 अगस्त 2019
*इस धराधाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है | हमारा आत्मविश्वास ही हमारा मार्गदर्शन करते हुए सत्पथ पर चलने की प्रेरणा देता है | जीवन के रहस्य को समझने के लिए मनुष्य को आत्मविश्वास का सहारा लेना ही पड़ता है क्योंकि जी
26 अगस्त 2019
31 अगस्त 2019
सुनो छोटी सी गुड़िया की नन्ही कहानी...सच में एक ऐसी मासूम कहानी जो आज पूरे देश में सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल हो गई। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में एक मासूम बच्ची की खबर फोटो के साथ प्रकाशित की थी। जिसमें उस मासूम बच्ची की जिद थी कि उसकी गुड़िया के पैरों पर प्ला
31 अगस्त 2019
03 सितम्बर 2019
*चौरासी लाख योनियों में सबसे अधिक बुद्धिमान , विवेकवान , ऐश्वर्यवान , संपत्तिवान अर्थात सर्वगुण संपन्न होने के बाद भी मनुष्य को गलतियों का पुतला कहां गया है | यहां जाने अनजाने में मनुष्य से नैतिक एवं अनैतिक गलतियां होती रहती हैं | यदि मनुष्य से गलतियां होती रहती है तो उसका प्रायश्चित करने का विधान
03 सितम्बर 2019
05 सितम्बर 2019
*हमारा भारत देश एवं उसकी संस्कृति इतनी दिव्य एवं अलौकिक है यहां नित्य कोई ना कोई पर्व , कोई न कोई व्रत मनाया कि जाता रहता है | हमारे ऋषि - महर्षियों ने मात्र के कल्याण के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में इतने विधान बता दिये हैं कि शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन कोई व्रत - उपवास , पर्व - त्यौहार ना हो
05 सितम्बर 2019
02 सितम्बर 2019
*यह संसार बड़ा ही विचित्र है | इस पृथ्वी पर रहने वाले अनेक जीव है जो कि एक से बढ़कर एक विचित्रताओं से भरे हुए हैं | इन सभी जीवों में सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य सबसे ज्यादा विचित्र है | मनुष्य की विचित्रता का आंकलन इसी से किया जा सकता है कि यदि मनुष्य से यह प्रश्न कर दिया जाय कि इस संसार में सबसे दुर
02 सितम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x