Story in Hindi. हिंदी की ५ अलग - अलग सर्वश्रेष्ठ कहानियां

22 अगस्त 2019   |  अभिषेक पाण्डेय   (2498 बार पढ़ा जा चुका है)

Story in Hindi. हिंदी की ५ अलग - अलग सर्वश्रेष्ठ कहानियां


story in hindi इस पोस्ट में ५ हिंदी कहानियां दी जा रही हैं . मुझे उम्मीद है की यह सभी कहानिया आपको अवश्य भी पसंद आएगी . यह कहानियां इस प्रकार हैं.



1- जियो और काम करो .



2- जीना इसी का नाम है.



3- सादा जीवन उच्च विचार



4- पुरानी कहानी



5- सत्ता



1- मेरे पिता एक परिश्रमी व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी मां और मुझे संभालने के लिए बहुत ही कठिन परिश्रम किया. उन्होंने कक्षाओं में भाग लेने के बाद अपने सभी शामें बिताईं.


जिससे वे बहुत अच्छी पढ़ाई कर सकें और एक दिन बेहतर भुगतान वाली नौकरी पा सकें। रविवार को छोड़कर, पिता जी ने शायद ही अपने परिवार के साथ खाना खाया।




उन्होंने बहुत मेहनत की और पढ़ाई की, क्योंकि वह अपने परिवार को एक खुशहाल जीवन देना चाहते थे। जब भी परिवार ने शिकायत की कि वह उनके साथ पर्याप्त समय नहीं बिता रहें हैं .



तो उनका बस एक ही तर्क रहता ” यह सब परिवार के लिए ही तो कर रहा हूँ “. लेकिन वास्तव में वे अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने के लिए तरसते थे।


परीक्षा के परिणाम का दिन आ गया. उनकी मेहनत रंग लायी। उन्होंने बहुत ही अच्छे नंबर से परीक्षा पास की। उन्हें वरिष्ठ पर्यवेक्षक की नौकरी मिली और एक अच्छी पेमेंट भी।


यह उनके लिए सपने के सच होने जैसा था. अब वे परिवार को अच्छी जिंदगी दे सकते थे। जिसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी। हालाकि अभी परिवार को उनके साथ समय बिताने का ज्यादा समय नहीं मिल पा रहा था।


क्योंकि अब वे .. प्रबंधक के पद पर पदोन्नत होने की उम्मीद करते हुए खूब मेहनत कर रहे थे। उन्होंने खुद को पदोन्नति के लिए योग्य उम्मीदवार बनाने के लिए मुक्त विश्वविद्यालय में एक और पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया।


इस बार भी उनकी मेहनत रंग लायी और उन्हें प्रमोशन मिल गया. उन्होंने मां को घरेलु कार्यों से मुक्त करने के लिए एक नौकरानी रखने का फैसला लिया और उन्होंने ३ कमरों का एक बड़ा घर भी खरीदा। अब जिंदगी और भी बढ़िया और सुविधाजनक हो गयी थी.


लेकिन उन्होंने इसे और आगे बढाने का फैसला लिया और भी अधिक प्रमोशन के लिए उन्होंने और भी अधिक मेहनत शुरू कर दी। मां के यह कहने पर की ” हमारे साथ भी समय बिताया करो ” उनका वही डायलाग रहता कि यह सब तुम सभी लोगों के लिए ही तो कर रहा हूँ.


उन्होंने इसके लिए फिर से कड़ी मेहनत शुरू की और उन्हें सफलता मिली। इस बार उन्होंने एक बहुत ही बड़ा घर लिया और एक कार भी ली. अब उन्होंने यह निश्चित किया कि अब वे परिवार के साथ ही समय बितायेंगे। अब और मेहनत नहीं करेंगे।


हम सभी बहुत ही खुश थे। लेकिन अगले ही दिन हमारी ख़ुशी मातम में बदल गयी. पिताजी की तबियत बहुत बिगड़ गयी। उन्हें हॉस्पिटल में ले जाया गया और वहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया.


डाक्टर ने बताया कि बहुत अधिक मेहनत की वजह से उन्हें काफी कमजोरी हो गयी थी। हम हमें यह समझ आ रहा था कि आखिर वे ऐसा क्यों कहते थे कि ” यह सब तुम्हारे लिए ही तो कर रहा हूँ ” .


इस कहानी से यही सीख मिलती है कि पैसा कमाना अच्छी बात है , लेकिन सिर्फ ” जियो और काम करो ” के रास्ते पर चलना गलत है।





2- एक बार पचास लोगों का ग्रुप किसी मीटिंग में हिस्सा ले रहा था। मीटिंग शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि स्पीकर अचानक ही रुका और सभी पार्टिसिपेट कर रहे लोगो को गुब्बारे देते हुए बोला , ” आप सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है। ” सभी ने ऐसा ही किया।




अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया। स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा।

सारे पार्तिसिपेट्स तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे। पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था… 5 पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया।



स्पीकर बोला , ” अरे! क्या हुआ , आप सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला ?” नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…, एक पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।




“कोई बात नहीं , आप लोग एक बार फिर कमरे में जाइये , पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम पुकारे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है। “, स्पीकर ने निर्दश दिया।



एक बार फिर सभी लोग कमरे में गए. पर इस बार सब शांत थे और कमरे में किसी तरह की अफरा- तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दुसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।



स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा , बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर कोई अपने लिए ही जी रहा है , उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है , पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता .




हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई है। जब तुम औरों को उनकी खुशियां देना सीख जाओगे तो अपने आप ही तुम्हे तुम्हारी खुशियां मिल जाएँगी। और यही मानव-जीवन का उद्देश्य है .



३- एक शहर में रामगोविंद नामक एक व्यक्ति थे. वे अध्यापन का कार्य करते थे और इसी से उनका जीवन – यापन होता था. एक दिन जब वे विद्यालय जा रहे थे तो उनकी पत्नी ने कहा ” आज घर में खाना कैसे बनेगा . घर में केवल एक मुठ्ठी चावल है “. रामगोविंद जी ने एक नजर पत्नी की और देखा और बिना कुछ बोले चल दिए.

शाम को जब वे वापस लौट कर आये तो भोजन के समय थाली में थोड़े उबले हुए चावल और शाक देखा . यह देखकर अपनी पत्नी से बोले ” यह स्वादिष्ट शाक किस चीज का बना है “.




मैंने सुबह जब आपसे भोजन के विषय में पूछा था तो आपकी दृष्टि इमली के पेड़ की तरफ गयी थी . मैंने उसी के पत्ते से शाक बनाया है….पत्नी ने जवाब दिया.

रामगोविंद जी ने बड़ी ही निश्चिन्त भाव से कहा अगर इमली के पत्तों का शाक इतना स्वादिष्ट होता है तो फिर हमें भोजन की कोई चिंता ही नहीं रही.




इसी बीच शहर के एक रईस को रामगोविंद की गरीबी का पता चला तो वह स्वयं उनके घर आया और उन्हें मध्य शहर में रहने के लिए कहा . लेकिन रामगोविंद जी मना कर दिया.




इस पर रईस बहुत हैरान हुआ और उसने हाथ जोड़कर कहा कि आप विद्यार्थियों को शिक्षा देते हैं. उन्हें उचित मार्ग दिखाते हैं और आप इस तरह रहे तो यह उचित नहीं है. आप बताएं , आपको किस चीज की आवश्यकता है.




इस पर रामगोविंद जी बोले अब इसका हाल तो मेरी धर्मपत्नी ही बता सकती है. अब रईस ने रामगोविंद जी की पत्नी से वही सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिया ” अभी हमें किसी तरह का अभाव नहीं है. अभी हमारे वस्त्र इतने नहीं फटे हैं कि पहने नहीं जा सकते .



घर भी इतना नहीं टूटा है कि इसे छोड़ा जा सके और जब तक मेरे हाथों की चूड़िया सलामत हैं मुझे किसी चीज का अभाव नहीं हो सकता है और अगर सीमित संसाधनों में भी संतोष की अनुभूति हो तो जीवन आनंदमय हो जाता है. रईस को बात समझ में आ गयी और उसके बाद वह भी सादा जीवन व्यतीत करने लगा.







4- अरब देश की एक पुरानी कहानी है. एक राजा था . उसके बड़े ठाट-बाट थे. उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी. राजा जो ठहरा. एक बार वह लड़ाई पर गया.



उसने खाने – पीने के खूब सारे सामान ले लिए औए इसके लिए उसे तीन सौ ऊटों की जरुरत हुई. लड़ाई बहुत भयंकर हुई और उसमें राजा की हार हो गयी और उसे बंदी बना लिया गया.



राजा के साथ उसका रसोइयाँ था. राजा ने उससे कहा कि मुझे भूख लगी है. कुछ खाना तैयार कर दो.. जोरों की भूख लगी है. रसोइयें के पास मांस का टुकड़ा बचा हुआ था. उसने उसे देगची में उबलने के लिए रख दिया और कुछ साग सब्जी भी मिल जाए इसके खोज में निकल गया.





इतने में इक कुत्ता आया और मांस की गंध से वह इतना बेकाबू हो गया की उसने तुरंत ही देगची में मुंह डाल दिया और देगची उसके मुंह में अटक गयी



.

वह परेशान हो गया और उसने अपना मुंह निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन देगची उसके मुंह से नहीं निकली तो वह वैसे ही देगची मुंह में फंसाये भागा.



राजा ने यह दृश्य देखा तो जोर से हंस पडा. पास खड़े संतरी ने ने जाब राजा की हंसी सुनी तो उसे बड़ा ही आश्चर्य हुआ. उसने राजा से कहा ” आप इतनी मुसीबत में हैं तब भी हंस रहे हैं “.




राजा ने उत्तर दिया मुझे यह सोचकर हंसी आ रही है कि कल तक मेरे रसोई के सामान को ले जाने के लिए तीन सौ ऊटों की आवश्यकता हो रही थी, अब उसके लिए एक कुत्ता ही काफी है .




संतरी ने सोचा ठीक ही कहा गया है कि सुख में तो सभी क्खुश रहते हैं, लेकिन असली मर्द तो वह है जो मुसीबत में भी हंस सके.





5- इस कहानी के सभी नाम व पात्र काल्पनिक हैं . कहानी पढ़ते समय यह ध्यान रखें कि यह एक कहानी है . मार साले को ….. और मार…..साला हमारे बाग़ का आम तोड़ेगा……माधरजात इन बातों से ठाकुर वीरेंदर प्रताप सिंह अपने चेलों को राज कुमार उर्फ़ राजू को मारने के लिए उत्साहित कर रहे थे.




मर जाएगा बाबुसाहेब..मर जाएगा…..बस एक्के ही आम लिया बाबुसाहेब…..माफ़ कर दो …हमार लड़का मर जाएगा…..कहते हुए बाबूलाल ठाकुर वीरेंदर के पैरों में गिर पड़े.



चल हट साला…..हमारे इजाजत के बगैर एक्को चिड़िया भी हमारे बाग़ में नहीं आता साला तुम्हरे लडके की हिम्मत कैसे हुई रे…..कहते हुए ठाकुर वीरेंदर ने बाबूलाल को अपने पैरों से झटक दिया.




तभी पोलिस गाडी के सायरन की आवाज आई……लो आ गए भिखमंगे..ठाकुर धीरे से बोले




का हो ठाकुर सहेब ..जिए दोगे कि नहीं …..भरी दुपहरिया बाँध के रखे हो….ऊपर से पिटाई भी चालू है….यही मर बिलाय गया तो…..



तो का…तुम काहे के लिए हो यादव जी…..और इ का पहिला है जो मर जाएगा…..साला हमरे आम के पेड़ के खाद पानी त यही सब कुत्तन से मिलता है न…साला इसको भी यही दफना देंगे…..ठाकुर साहेब ने इन्स्पेक्टर यादव के आखों में आँख डालकर बोले



ये उतार रे…..नहीं त इ कसाई मार ही डालेंगे…और ठाकुर साहेब सरकार बदल गयी है….बहुते दबाव है……अब कुछ दिन थोड़ा शांत रहिये और इसको हम ले के जा रहे हैं थाने वहीँ …..इसकी दवाई करेंगे…….ऐ बुढऊ बाबूलाल कल आ जाना थाने में..आज मत आना , आज का प्रोग्राम कुछ दुसर है.



रात को करीब १२ बजे…… का रे सारे …….और कौनो का आम ना मिला तुझको…..साले बहुत दिन हो गया था…..कौनो को पीटे नहीं साला….बाबुसाहेब का नमक खाया है..अदा तो कर पडेगा ना….ओये रामधनिया नंगा कर साले को….आज बताते है इसको…..


नमस्कार साहेब…..


.

कौन है बे



तोर बाप….. सूरज



अरे- अरे..सूरज भैया…आइये ना….आइये….इन्स्पेक्टर यादव की भाषा शेर से सीधे बिल्ली की हो गयी थी.


का रे बहुत जोश दिखा रहा है आजकल…ठाकुर साहेब का खिलाते है रे माधरजात ….साला हमरे आने की खबर नहीं मिली थी का…..सूरज क्रोध में बोला

मिली थी सूरज भईया


तो आया काहे नाही बे…..साले भाभी को जल्द बिधवा करवाना चाहता है का रे



भैया गलती हो गयी…




अच्छा कहा रुकना है हमको……



भईया गांव के बाहर एक घर है उहां …..बाकी खाना पीना सबका इंतजाम हो गया है.


ठीक है…और इसको छोड़ दे…हम ले जायेंगे




भैया…अरे बहुत गड़बड़ हो जाएगा



इ देख रहा है ना ६ के ६ यही पिछवाड़े में उतार देंगे…समझा छोड़ इसको और हमारे लिए जीप मंगवा


जी भैया …यादव की हालत एकदम खराब हो चुकी थी..उसने सूरज की बात मान ली.



तुमसे कौनो मोह नाही है….पर तुमको ऐसे छोड़ नाही सकते थे…..रात भर में साला उ इन्स्पेक्टर तुमको मार ही डालता….चलो जाओ अब अपने घर चले जाओ…..हम इ सब दर्द देख चुकें है…जाओ….साला जब तक हाथ में हथियार ना रहे न..इ कसाई साले जिए नाही देते हैं….सूरज ने राजू से कहा



अब हम नाही जायेंगे……उ साले हमको फिर से मारेंगे……



तब का करोगे




हम भी तुम्हारी तरह बनेगे


हा हा हा…हमारी तरह….अरे पिछवाड़े में दम होना चाहिए…इ बन्दुक चलाने के लिए जिगरा होना चाहिए



भैया आजमा लो त ठीक है……इ ले बन्दुक और ठोंक दे हमको



भैया…….



काहे फट गयी……साला दम नहीं है……चले हैं भरती होने



धांय …….भैया…कुछ हुआ तो नहीं ना भईया


शाबाश…..दम है रे…तोरा में दम है…..साला बन्दुक खाली थी….हम देखना चाहते थे केतना दम है.


कल चलना…..मिलाएंगे ठाकुर ब्रिजभान से……लोग उन्हें ठाकुर साहेब कहते हैं.



ठाकुर साहेब ..इसके बारे में बोल रहे थे…..ठाकुर साहेब ने एक नजर ऊपर से नीचे राजू को देखा और कहा ठीक है….रख ले इसको और उ ठाकुर वीरेंदर प्रताप क कहानी आज खत्म…बोल इसको ठोंक दे आज ठीक है ठाकुर साहेब



इन्स्पेक्टर साहेब हमारा बेटा कहां है….बाबूलाल हाथ जोड़कर यादव जी से पूछे



अरे उ त रात को ही चला गया..हम छोड़ दिए साहेब हम गरीब है …हमरे पास कुछ नहीं है…इ लीजिये कुछ पैसा है छोड़ दीजिये राजू को अरे दिमाग मत खा बाबूलाल…ऊपर से बहुत प्रेशर है….उ चला गया रात को



बाबू जी हाथ जोड़ रहे हैं…..पैर पड रहे हैं बाबूजी…छोड़ दो बाबूजी ओये रामधनिया…अरे भगा रे इसको …साला ऊपर से साहेब डंडा किये है और उधर वीरेंदर..अब इहो आ गया साला


हे बाबूलाल…निकल रे माधरजात…कहां छुपाया रे राजुआ के…….साला हमको च….समझा है का रे..थाने गया था…केवल दिखाने के लिए…बता नाही त आज हम तुझको लटकायेंगे


लटकायेंगे तो हम तुमको…वीरेंदर सिंह ……… राजू……ठाकुर वीरेंदर फटी आखो सी देखते रह गए….राजू के साथ सूरज और उसकी गैंग थी

धांय..धांय की आवाज से पूरा इलाका थर्रा गया…..ठाकुर वीरेंदर हम तुमको ऐसी मौत देंगे……कि डर को भी डर लगने लगेगा….



इ साले को नंगा करके..गदहा पर बिठाकर पुरे गाव में घुमाओ और फिर उसे बांधकर मैदान में टांग दो…और अगर किसी ने इसे पानी भी देने की कोशिश की तो उसका भी यही हाल होगा.


इस घटना के बाद पुरे क्षेत्र में राजकुमार उर्फ़ राजू का राज हो गया. उसके बाद उसने ना जाने कितने खून किये…कितनी लूट को अंजाम दिया, उसे खुद नहीं पता था.


उसके नाम का खौफ इस कदर था कि वह जिधर से जाता उधर का इलाके में सन्नाटा छा जाता. वह ठाकुर साहेब का खास हो चुका था.




राजू


जी बोलिए सूरज भईया


इस बार का इलेक्शन बहुत टफ होने वाला है

काँहे भईया



अरे इस बार मास्टर




जी चुनाव लड़ रहे हैं ठाकुर साहेब के खिलाफ


अच्छा, मास्टर जी…..उनको सब पब्लिक बहुत पसंद करता है. लेकिन हमरे ठाकुर साहेब भी कौनो कम थोड़े ही हैं… बहुत कुछ किये हैं पब्लिक के लिए

बेटा….तुम ठाकुर साहेब के बारे में कुच्छो नही जानते और इ जो सत्ता है ना उकर नशा बहुत तगड़ा होता है. उ कुछ भी करा सकती है.



मतलब



छोड़ो…समय आने पर पता चल जाएगा. देखो सूरज, हम जानते हैं कि राजू एक बहुत उम्दा शूटर है और बहुत ही विश्वासपात्र है. लेकिन फिर भी मास्टर जी को गोली तुम ही मारोगे….ठाकुर साहेब ने कहा



ठाकुर साहेब..मास्टर जी को मारना जरुरी है का


हाँ सूरज…इ जो सत्ता का नशा होता है ना …यह ससुरा सभी नशा से खराब होता है…..अब मास्टर जी हमारे रास्ते में रुकावट बन रहे हैं…हमने उन्हें बहुत समझाया लेकिन ऊ मान ही नहीं रहे हैं तो अब हम अब का करे और एक बात आज तुम कभी किसी को मारने में सवाल नाही किया…मास्टर जी में कौन सी बात आ गयी…


नहीं कुछ नाही ठाकुर साहेब….नमक खाए हैं तुम्हारा…मरते दम तक आदेश का पालन करेंगे…..कल जब मास्टर जी विनोद चायवाले के पास चाय पिने जायेंगे…..वह उनकी आखिरी चाय होगी.



ठीक है….लेकिन चाय पी लेने के बाद मारना…मुंह मीठा मीठा रहेगा



राजेश…..इ साले सुर्जवा पर नजर रख….कुछ जादा ही चमक रहा है साला और कल मास्टर जी के बाद सूरज को भी अस्त कर दे…ठोंक दे सुबह करीब १० बजे, मास्टर जी विनोद चाय वाले के दूकान पर पहुंचे…..विनोद बेटा चाय देना तो



जी मास्टर जी..अभी लाया



तभी वहाँ राजू पास की एक नयी खुली कपडे की दूकान से कपड़ा लेने के लिए पहुंचा…..उधर मास्टर जी विनोद की दूकान से निकल रहे हैं और राजू कपडे की दूकान के अन्दर जा रहा है कि तभी धांय की आवाज और बेहिसाब चीख पुकार…अफरा तफरी



राजू गोली चलने की आवाज की ओर दौड़ा तो देखा कि मास्टर जी को गोली लग गयी है और लोग उन्हें हास्पिटल ले जा रहे थे……तभी उसने सूरज को वहाँ से भागते देखा…वह उस दिशा में भागा..उसी समय राजेश ने ठाकुर साहेब को पर साड़ी सिचुएशन बताई…तब ठाकुर साहेब ने दोनों को ही मारने को कह दिया.



कुछ देर के बाद राजू ने सूरज को पकड़ लिया और दोनों में खूब फाईट होने लगी. इसी बीच राजेश ने फायर झोंक दिया लेकिन सूरज ने वह गोली खुद पर ले ली और उधर राजू की गोली का शिकार राजेश हो गया.



तब राजू ने सूरज से इन सब का कारन पूछा तो सूरज ने बताया कि तुम्हे ठाकुर साहेब के बारे में कुछ नहीं पता है…..ठाकुर साहेब एक मशहूर गैंगेस्टर त्रिलोचन सिंह हैं.

जिन्हें पुरे राज्य की पुलिस ढूंढ रही है और ठाकुर साहेब यहाँ सत्ता की ताकत के बल पर बचे हुए हैं. अगर उनकी सत्ता गयी तो समझो त्रिलोचन सिंह भी गया..और हाँ तुम्हारे ऊपर हमला ठाकुर वीरेंदर सिंह ने इनके कहने पर ही किया था…..तुम्हारी जिंदगी बर्बाद करने वाला भी यही है.


इसने देश भर में कई दंगे करवाए, जिसका आडियो और वीडियो सबूत ठाकुर वीरेंदर के पास था….अब तुम्हें ठाकुर वीरेंदर का खास सत्तू ही उस वीडियो कैसेट के बारे में बता सकता है.


इस समय सत्तू यह सब काम छोड़कर वाराणसी में गंगा किनारे साधू बना फिर रहा है..वह रोज वाराणसी के पांडेयपुर के एक छोटे से घर में रहता है….वह तुम्हे वही मिलेगा…. उसे यह सारी बात बता देना…..वह जरुर तुम्हारी मदद करेगा.


इधर प्रदेश की राजनीति में तूफ़ान आ गया था. बड़े बड़े समाजसेवी, नेता, मिडिया मास्टर जी की तबियत जानने हास्पिटल पहुंचे. वहाँ डाक्टर ने बताया कि अब उनकी हालत खतरे से बाहर है.


उनकी सिक्योरिटी बढ़ा दी गयी…….उधर राजू वाराणसी घात पर पहुंचा और सत्तू को ढूंढ निकाला……बहुत समझाने के बाद सत्तू ने वह कैसेट उसे दे दी.


उधर ठाकुर साहेब का नाम मास्टर जी के हमले में आने पर पुलिस पर उन्हें गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ गया था……लेकिन बिना सबूत के उनपर कार्यवाही में पुलिस भी डर रही थी…कि रात ठीक १२ बजकर १ मिनट पर पोलिस एसपी को एक काल आयी.


एसपी दिवाकर माथुर ने जैसी ही अपना मोबाइल खोला तो उन्हें एक whatsapp आया हुआ था….उस पर एक youtube लिंक थी…जब उन्होंने youtube link को खोला तो उसमें ठाकुर साहेब का पूरा कच्चा चिठ्ठा था.



तब तक यह खबर मीडिया में पहुँच गयी और आधी रात को पुरे प्रदेश के राजनितिक गलियारे के फोन घनघना उठे…..पोलिस ने ठाकुर साहेब को गिरफ्तार कर लिया……और चुनाव के बाद सत्ता की चावी मास्टर जी के पास आई.



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Story in Hindi. हिंदी की ५ अलग - अलग सर्वश्रेष्ठ कहानियां

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अनिल शर्मा
25 अगस्त 2019

अच्छी कहानियां

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