कृष्णजन्माष्टमी (भाग 1)

24 अगस्त 2019   |  pradeep   (3572 बार पढ़ा जा चुका है)

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कृष्ण की पूजा करने का सबसे अच्छा तरीका है उनके विचरों पर अम्ल करना. मेरे इस विचार से तो सारे हिन्दू ही नहीं हिदुत्ववादी भी सहमत होंगे. कृष्ण को लोग अपनी अपनी सहूलियत के हिसाब से देखते है, किसी के लिए वो माखन चोर है तो किसी के लिए रसिक जो रासलीला करते थे, कोई उन्हें योद्धा मानता है तो कोई उन्हें मानता है कि उन्होंने अर्जुन को युद्ध करने के लिए कहा. ये सब एक झूठ है जो कही भी और कभी भी सच नहीं था. कृष्ण से जुड़ी कहानी और किस्से कवियों की कल्पना है ना की सच. सूरदास की रचनाएँ एक कल्पना है, सूरदास ने अपनी भक्ति में और प्रेम में एक ऐसे व्यक्तित्व की कल्पना की जो बालक है जिसमे चंचलता है, चपलता है. ऐसे ही बहुत सारे कवियों ने जो श्रृंगार रास के कवि थे उन्होंने एक रसिक के रूप में उनकी कल्पना की. युद्ध के समय लोगो ने उनको योद्धा या अपने अधिकारों के लिए युद्ध करने के लिए अर्जुन को प्रेरित करने के रूप की कल्पना की. ये सभी कल्पनाएं है सच से परे है. कृष्ण के विचारों को गीता में देखा जा सकता है. कृष्ण के बारे में महाभारत में काफी कुछ लिखा है, कुछ पुराणों में भी कृष्ण के जीवन का वर्णन है, पर इन में किसी में भी उनकी चोरी या रास लीला का ज़िक्र नहीं है. क्या कृष्ण ने गीता में युद्ध करने का उपदेश दिया है? जिन लोगो का विश्वास हिंसा में है उन्हें ऐसा ही लगता है पर जिनका विश्वास अहिंसा में है उन्हें ऐसा नहीं लगता. गीता को पढ़ने और समझने वालो की सबसे बड़ी कमी यह है कि वो लोग कुछ श्लोको को जानते है और उन्ही कुछ श्लोकों से पूरी गीता को समझ लेने की भूल करते है. यह भूल इसलिए होती है क्योकि कोई भी गीता को पढ़ने और समझने की कोशिश खुद नहीं करता बल्कि पंडितो या धर्माचार्यों से सुन कर मान लेता है कि गीता में ऐसा ही कहा गया और और उस अधूरे ज्ञान को वो सम्पूर्ण ज्ञान मान लेता है. गीता सार के पोस्टर पढ़ कर हम गीता को जानने दावा करने लगते है. गीता के उपदेश के बाद अर्जुन युद्ध के लिए तैयार हो जाता है? यह सच है कि अर्जुन इस उपदेश के बाद ही युद्ध के लिए तैयार होता है, लेकिन महाभारत के युद्ध शुरू होने से पहले जब अर्जुन युद्ध करने कुरुक्षेत्र जाता है उस वक्त का उसका युद्ध का उद्देश्य और कृष्ण के गीता का प्रवचन देने के बाद का युद्ध का उद्देश्य एक नहीं है. अर्जुन कुरुक्षेत्र जिस उद्देश्य से आता है उस के विपरीत उद्देश्य से युद्ध करता है. इस बात को कोई नहीं समझायेगा, क्योकि धर्माचार्य और पंडित जिस उद्देश्य से भक्तो को गीता सुनाते है वो कृष्ण के उद्देश्य के विपरीत है , वो गीता के कुछ श्लोक सुना कर अपने उद्देश्य की पूर्ति करते है, ना कि सही गीता का ज्ञान देते है. महात्मा गांधी को गीता अहिंसा का ज्ञान देने वाली लगती थी तो हिन्दुत्वादी हिंसात्मक लोगो को गीता से हिंसा की प्रेणना मिलती थी. धर्माचार्य और पंडित भक्तों को समझाते है क्या लेकर आये थे क्या लेकर जाएंगे, जो लिया यही लिया जो दिया यही दिया और उसके बाद वो दक्षिणा मांगेगे, चढ़ावा मांगेगे, क्यों? क्योकि उनका घरबार इससे चलता है, उनका यह कारोबार है, आज हर धर्माचार्य के पास सहूलियत के सब साधन मौजूद है, उनकी ज़िंदगी बिना मेहनत किये आराम से चल रही है, तो वो वही बताते है जिससे उनका धंधा चलता रहे. योगी भोगी बन रहे है और भक्तों को योगी बनने की सलाह दे रहे है. गीता में योग के बारे में विस्तार से बताया है क्या किसी ने गीता में जानने की कोशिश की कि योग क्या है? योग कितने प्रकार के होते है? योगी के लिए क्या ज़रूरी है? कृष्ण ने अर्जुन को योगी बनने को कहा, तो क्या योगी को युद्ध करना चाहिए? इस सवाल का जवाब भी गीता में ही है. कृष्ण को देशभक्त या राष्ट्र भक्त बताया जाता है? जो तीनो लोकों का स्वामी हो उसके कौनसा राष्ट्र उसका है और कौनसा उसका नहीं है? ( भाग 2 को भी ज़रूर पढ़े,आलिम )

अगला लेख: राजनैतिक पार्टियों का भविष्य.



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 अगस्त 2019
|| अथ श्री आदिशंकराचार्यकृतम् श्री कृष्णाष्टकं ||भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्तपापखण्डनम्,स्वभक्तचित्तरञ्जनम्, सदैव नन्दनन्दनम्,सुपिन्छगुच्छमस्तकम्, सुनादवेणुहस्तकम् ,अनङ्गरङ्गसागरम्, नमामि कृष्णनागरम् ||१||मनोजगर्वमोचनम् विशाललोललोचनम्,विधूतगोपशोचनम् नमामि पद्मलोचनम्,करारविन्दभूधरम् स्मितावलोकसुन्दरम्,म
23 अगस्त 2019
10 अगस्त 2019
फ़ौ
कितना अच्छा लगता है फ़ौज़ के लोगों की तारीफ़ करना, उनकी देशभक्ति का सम्म्मान करना. उस फ़ौज़ियों की वजह से ही हम अपने घरों में आराम से सुरक्षा के साथ रह सकते है अगर वो ना हो तो कोई भी दुशमन मुल्क हमला कर सकता है और हमें गुलाम बना
10 अगस्त 2019
01 सितम्बर 2019
पं
न्यायपालिका का जो हाल पिछले कुछ वक्त से हुआ है उसे देखकर लगता है कि मुंशी प्रेमचंद ने इस वक्त के लिए ही कहानी पंच परमेश्वर लिखी थी. गांधीजी को भी इस न्याय प्रक्रिया पर कोई भरोसा नहीं था, उनका मानना सही था कि आज़ादी नहीं मिली बस राज परिवर्तन हुआ है? गांधीजी ने वकालत छोड़ दी
01 सितम्बर 2019
18 अगस्त 2019
अखंडभारत की परिकल्पना हिंदुत्ववादी संघठन हर वक्त करते है तो सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि अखंडभारत क्या है? अखंडभारत से मतलब है पाकिस्तान और बंगला देश ? नहीं इनकी सोच इससे भी आगे जाती है. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, तिब्बत,
18 अगस्त 2019
06 सितम्बर 2019
मि
मिलने के ख्वाब की ख़ुशी, मिलकर क्यों गम में बदल जाती है, उनसे बिछड़ने का एहसास ही ख़ुशी को गम में बदल देता है. (आलिम)
06 सितम्बर 2019
10 अगस्त 2019
दर्द तो उनको होगा जिन्हे एहसास होता है, जिन्हे एहसास ना हो उन्हें दर्द कहाँ होगा. (आलिम)
10 अगस्त 2019
06 सितम्बर 2019
वै
भारतीय सविधान जब लिखा जा रहा था, तब नेहरूजी चाहते थे की उसमे इस बात को जोड़ दिया जाए सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएगी, जिसमे धार्मिक सोच नहीं होगी. नेहरू , सुभाषचद्र बोस और भगत सिंह में मतभेद बताने वाले भूल जाते है कि उनके विचार एक ही थे सिर्फ मतभेद रास्ते का था. नेहरू जी
06 सितम्बर 2019
13 अगस्त 2019
रा
राजनैतिक पार्टियों का भविष्य. मैं कोई भविष्य वक्ता नहीं हूँ, पर विश्लेषण कर सकता हूँ. आने वाले दिनों में राजनैतिक दलों की क्या स्थिति रहेगी यह बता सकता हूँ. शुरुवात कांग्रेस से करता हूँ क्योकि वो सबसे पुरानी पार्टी और अब तक सब से ज्यादा वक्त तक राज करन
13 अगस्त 2019

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x