अमन

28 अगस्त 2019   |  pradeep   (416 बार पढ़ा जा चुका है)

क्या करे बात इश्क की उनकी, कितना प्यार मुझसे करते है.

बात कहने की ज़रूरत ही नहीं, मेरे इशारों को वो समझते है.

ना समझे वो इशारा तो, हम बात उनकी को अपनी मान लेते है.

बात मन की उनकी यारों, अब हमें तो अपनी बात लगती है.

इश्क एक तरफा होता नहीं यारों, वो कहते है, हम सुन लेते है.

अमन घर का गर चाहिए आलिम उनकों ही ख़ुदा मान लेते है. (आलिम)

अगला लेख: राजनैतिक पार्टियों का भविष्य.



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 सितम्बर 2019
पं
न्यायपालिका का जो हाल पिछले कुछ वक्त से हुआ है उसे देखकर लगता है कि मुंशी प्रेमचंद ने इस वक्त के लिए ही कहानी पंच परमेश्वर लिखी थी. गांधीजी को भी इस न्याय प्रक्रिया पर कोई भरोसा नहीं था, उनका मानना सही था कि आज़ादी नहीं मिली बस राज परिवर्तन हुआ है? गांधीजी ने वकालत छोड़ दी
01 सितम्बर 2019
06 सितम्बर 2019
वै
भारतीय सविधान जब लिखा जा रहा था, तब नेहरूजी चाहते थे की उसमे इस बात को जोड़ दिया जाए सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएगी, जिसमे धार्मिक सोच नहीं होगी. नेहरू , सुभाषचद्र बोस और भगत सिंह में मतभेद बताने वाले भूल जाते है कि उनके विचार एक ही थे सिर्फ मतभेद रास्ते का था. नेहरू जी
06 सितम्बर 2019
15 अगस्त 2019
गा
गाँधी जी की विरासत के उत्तराधिकारी नेहरू. गाँधी जी ने क्यों नेहरू जी को अपना उत्तराधिकारी चुना? कुछ लोग नेहरू की बुराई करने इस हद तक चले जाते है कि शक होता है कि क्या वाकय पटेल लौहपुरुष थे? 3000 करोड़ की मूर्ति एक लौहपुरुष की य
15 अगस्त 2019

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x