क्या PM मोदी का डिजीलॉकर ऐप आपको ट्रैफिक चालान से बचा पाएगा?

06 सितम्बर 2019   |  अभय शंकर   (518 बार पढ़ा जा चुका है)

क्या PM मोदी का डिजीलॉकर ऐप आपको ट्रैफिक चालान से बचा पाएगा?

एक सितंबर 2019. नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू हुआ. इसके बाद ट्रैफिक नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लग रहा है. कई मामले मीडिया की सुर्खियां बने हैं. क्योंकि गाड़ी की कीमत से ज्यादा का चालान कट रहा है. ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग भी बढ़ गई है. चालान से बचने के लिए पलूशन सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस बनवाने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं.

लोगों को गाड़ी का पेपर लेकर न चलना पड़े, इसलिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ऐप लॉन्च किया था. जिसमें लोग अपने डीएल, आरसी और गाड़ी के अन्य पेपर रख सकते हैं. पहले से मौजूद डिजिलॉकर में रखे डॉक्यूमेंट को भी मान्यता दी थी. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने दिसंबर 2018 में एक सर्कुलर जारी किया था. इसमें कहा गया था कि ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र, बीमा और पलूशन सर्टिफिकेट को डिजिटल फॉर्म में दिखाया जा सकता है. मंत्रालय ने सभी राज्यों के परिवहन विभाग को लेटर लिखा था. इसमें कहा गया था कि डिजिलॉकर और एमपरिवहन ऐप में मौजूद गाड़ी के कागज को वैलिड माना जाए.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी किया गया सर्कुलर.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी किया गया सर्कुलर.

सुविधा मिलने के बाद लोग गाड़ी से जुड़े डॉक्यूमेंट ऐप में रखने लगे. एक सितंबर से चालान पर चालान कटने के बाद एक बार फिर इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि क्या डीएल और गाड़ी के अन्य कागज साथ में न हो, लेकिन ऐप में पड़े हों तो चालान से बचा जा सकता है?

digi locker

दीपक नाम के एक यूजर ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को टैग कर पूछा,

कई लोगों के चालान इसलिए कट रहे हैं कि क्योंकि वे गाड़ी के कागज मौके पर नहीं दिखा पा रहे हैं. क्या डिजिलॉकर को फिजिकल डॉक्यूमेंट माना जाएगा? अगर हां तो कृपया इस बारे में लोगों को जागरूक करें.

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से जवाब आया,

डिजिलॉकर में रखे डॉक्यूमेंट वैलिड हैं. लेकिन गाड़ी चलाते समय अगर कोई ऐसे ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करता है जिसमें गाड़ी को सीज करने की जरूरत पड़ती है तो ऐसे में डीएल जरूरी होगा.

इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया. बताया गया कि डिजिलॉकर में रखे गए गाड़ी के कागज मान्य हैं. लेकिन ये सामान्य चेकिंग के लिए मान्य हैं. मान लीजिए चेकिंग हो रही है और ट्रैफिक पुलिस ने आपसे गाड़ी के कागज मांगे तो आप ऐप में रखे डॉक्यूमेंट दिखा सकते हैं. लेकिन अगर आपने किसी तरह के ट्रैफिक नियम तोड़े हैं. जैसे ड्रंक एंड ड्राइविंग, रेड लाइट जंप, तो आपको ऑरिजन ड्राइविंग लाइसेंस दिखाना पड़ेगा. ऐसे में डिजिलॉकर में रखे डॉक्यूमेंट काम नहीं आएंगे.

इसकी वजह ये है कि एक सितंबर से दिल्ली में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कोर्ट के चालान काटे जा रहे हैं. नियमों के मुताबिक, कोर्ट के चालान काटते वक्त ट्रैफिक रूल तोड़ने वाले व्यक्ति का ऑरिजनल डीएल या आरसी में से कोई एक डॉक्यूमेंट जब्त करना होता है. कोर्ट में चालान भरने के बाद ही डॉक्यूमेंट वापस मिलता है.

एनबीटी की खबर के मुताबिक, ट्रैफिक रूल तोड़ने वाले व्यक्ति के गाड़ी के कागजात ऐप में हैं ऐसे में उसके डॉक्यूमेंट जब्त नहीं हो पाएंगे. लेकिन ट्रैफिक रूल तोड़ने वाले को छोड़ा भी नहीं जा सकता. ऐसे में उसकी गाड़ी जब्त करनी पड़ेगी. कोर्ट में चालान जमा करने के बाद ही उसकी गाड़ी उसे वापस मिलेगी.

हालांकि ऐसा नहीं है कि ऐप में इस तरह की सुविधा नहीं है. ऐप में ही डॉक्यूमेंट लॉक करने का सिस्टम बना हुआ है. लेकिन दिल्ली पुलिस के पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं है. इस बारे में पुलिसवालों को जानकारी भी नहीं है. इसलिए पुलिस का कहना है कि कम से कम एक ऑरिजनल डॉक्यूमेंट तो साथ में लेकर चलें ही. ताकि ट्रैफिक नियम तोड़ने पर आपकी गाड़ी जब्त न हो.

क्या है डिजिलॉकर?

डिजिलॉकर वर्चुअल लॉकर है. पीएम मोदी ने जुलाई 2015 में इसे लॉन्‍च किया था. डिजिलॉकर अकाउंट बनने के बाद आप अपने डॉक्यूमेंट अपलोड कर सकते हैं. डिजिलॉकर ऐप में पीडीएफ, जेपीईजी या पीएनजी फॉर्मेट में गाड़ी के कागज स्कैन करके अपलोड कर सकते हैं. आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की मदद से यहां अकाउंट बनाना होता है.

एम-परिवहन ऐप में भी आप ड्राइविंग लाइसेंस , रजिस्‍ट्रेशन पेपर, इंश्योरेंस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी रख सकते हैं. एम परिवहन ऐप में गाड़ी के मालिक का नाम, रजिस्ट्रेशन की तारीख, मॉडल नंबर, इंश्योरेंस की वैधता आदि की जानकारी रहती है. यहां भी लोग अपने गाड़ी के कागजात डिजिटल फॉर्म में रख सकते हैं.


https://www.thelallantop.com/news/is-carrying-driving-licence-insurance-rc-papers-in-digi-locker-and-mparivahan-app-is-enough-to-avoid-challan/

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