तलाश

08 सितम्बर 2019   |  tejaswi यदलपति   (449 बार पढ़ा जा चुका है)

तलाश हैं उन राहों कि

जो मंज़िल तक पहुंचा सकती हैं

तलाश हैं उस रौशनी कि
जो अँधेरे को मिटा सकती हैं

तलाश हैं उस हकीकत कि

जो सपनों को सच बना सकती हैं

तलाश हैं उन पलों कि

जो ज़िंदगी को पूरी कर सकती हैं

अगला लेख: वक़्त



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 सितम्बर 2019
शा
वही अक्सर ठहरे पानी में डूब जाया करते हैं,जो शनावर दरिया में बेबाक तैरा करते हैं !https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.comhttps://spirituality.ghazalsofghalib.com
02 सितम्बर 2019
26 अगस्त 2019
"भारतीय शौर्य गाथा" - कश्मीर - युद्ध की पृष्ठ्भूमि पर आधारित प्रबंध-काव्य
26 अगस्त 2019
10 सितम्बर 2019
मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं
10 सितम्बर 2019
18 सितम्बर 2019
कुछ हंसना था कुछ रोना था ए ज़िंदगी तेरे साथ , लिखना था ज़माने को फूलों का पैग़ाम तेरे साथ , इतनी ईमानदारी क्यों दिखाया मौत को किसलिए , "रंजन" को जब जाना होगा मिलेगा क्या तेरे साथ !! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com https
18 सितम्बर 2019
16 सितम्बर 2019
पितृपक्ष चल रहा है | सभी हिन्दू धर्मावलम्बी अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धासुमन समर्पित कर रहे हैं | हमने भी प्रतिपदा को माँ का श्राद्ध किया और अब दशमी कोपिताजी का करेंगे | कुछ पंक्तियाँ इस अवसर पर अनायास ही प्रस्फुटित हो गईं... सुधीपाठकों के लिए समर्पित हैं...भरी भीड़ में मन बेचारा खड़ा हुआ कुछ
16 सितम्बर 2019
25 अगस्त 2019
दि
जो लफ़्ज़ों से होती नहीं बयान उन्हें आँखे जाती हैं आंखो से नहीं पद्सकें तो मेरी खामोशी को पहचान लो दिल से दिल तक बात पहुंचाने के बहुत रास्ते हैं बस सुनने और समझने की ही देरी हैं
25 अगस्त 2019
27 अगस्त 2019
Main Vidyut Mein Tumhein Niharu - Gopal Singh Nepali Poems In Hindiमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँनील गगन में पंख पसारूँ;दुःख है, तुमसे बिछड़ गया हूँ किन्तु तुम्हारी सुधि न बिसारूँ!उलझन में दुःख में वियोग मेंअब तुम याद बहुत आती हो;घनी घटा में तुमको खोजूँमैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ!जब से बिछुड़
27 अगस्त 2019
25 अगस्त 2019
मं
ख्वाहिशों की मंज़िल बहुत मुश्किल हैं हिम्मत के रास्ते से चलना हैं रहे कुले हैं बस आज़माने की देरी हैं
25 अगस्त 2019
26 अगस्त 2019
"भारतीय शौर्य गाथा" - कश्मीर - युद्ध की पृष्ठ्भूमि पर आधारित प्रबंध-काव्यरचयिता - स्व. श्री दया शंकर द्विवेदी सम्पादक - श्रीमति आशा त्रिपाठी "क्षमा"
26 अगस्त 2019
21 सितम्बर 2019
वक़्त में छुपा हैं एक अनोखा राज़ ढूंढा तोह मिला नै वह कल आज पुछा में ने उस से वह बात उसने कहा में ही दर्द का मरहम भी और उसके साथ जीने की वजह भी .
21 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
"हमारा संबंध", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :https://hindi.pratilipi.com/story/srpcyca7uvmf?utm_source=android&utm_campaign=content_shareभारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!
17 सितम्बर 2019
31 अगस्त 2019
जवाँ आँखों का मंज़र खो गया हैहर एक अहसास खंज़र हो गया है...तमन्ना थी खिले बाग़-ए-चमन कीमग़र दिल एक बंज़र हो गया है...तृप्ति की इक बूँद पाने की ललक मेंसमूचा मन समन्दर हो गया है...न जाने कौन सा मोती लुटा है बड़ा सुनसान अन्दर हो गया है....!..............✍💔✍..…..........
31 अगस्त 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
13 सितम्बर 2019
दि
25 अगस्त 2019
मं
25 अगस्त 2019
13 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
28 अगस्त 2019
21 सितम्बर 2019
13 सितम्बर 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x