समय को पहचानें :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

09 सितम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (428 बार पढ़ा जा चुका है)

समय को पहचानें :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर मनुष्य को अनेक मूल्यवान संपदायें प्राप्त हुई हैं | किसी को पैतृक तो किसी ने अपने बाहुबल से यह अमूल्य संपदायें अपने नाम की हैं | संसार में एक से बढ़कर एक मूल्यवान वस्तुएं विद्यमान हैं परंतु इन सबसे ऊपर यदि देखा जाए तो सबसे मूल्यवान समय ही होता है | समय ही मानव जीवन का पर्याय है , मनुष्य के पास कुल जितना समय है उतना ही उसका जीवन है | जो व्यक्ति अपने समय की पहचान करके उसका आदर नहीं कर पाता समय भी उसकी पहचान मिटा करके उसका निरादर कर देता है | यह अकाट्य सत्य है कि समय किसी के लिए नहीं ठहरता है ना ही किसी के लिए रुकता है बल्कि मनुष्य को ही समय के साथ आगे बढ़ना होता है | समय के साथ अपना तालमेल बैठाते हुए जो अपने क्रियाकलाप करता है वही जीवन में सफल हो पाता है | हमारे इतिहासकारों ने बताया है कि जीवन में यदि सफल होना है तो समय का सदुपयोग करने के साथ व्यक्ति के अंदर हर क्षण कुछ न कुछ नया सीखने की ललक भी पैदा करनी होगी | समय का सदुपयोग तभी हो पाएगा जब कोई भी कार्य करने के लिए सही समय पर उचित निर्णय लिया जाय , क्योंकि मनुष्य जैसा निर्णय लेता है वैसा ही कार्य करने लगता है और उसकी जीवन की दिशाधारा समय की उसी धार में बहने लगती है जिस दिशा में मनुष्य के निर्णय होते हैं | सही समय पर उचित निर्णय लेने की कला उस व्यक्ति के पास ही होती है जो दूरदर्शी , विवेकशील एवं समय की पहचान रखने वाला होता है | मनुष्य को अपने जीवन में किस समय क्या करना चाहिए ? क्या करने का उचित समय है ? इसे जानने के लिए उसे सजग रहना आवश्यक है | जब मनुष्य वर्तमान में घट रही घटनाओं का साक्षी होता है तो उसे यह ज्ञान हो जाता है इस समय में किस तरह के कार्य को करने की प्राथमिकता दी जाय | जिसने समय को पहचाना वह सफल हो गया और समय को न पहचानने वाले या पहचान करके अनदेखा कर देने वाले संसार की भीड़ में विलुप्त हो जाते हैं | प्रत्येक मनुष्य को सबसे मूल्यवान समय की पहचान एवं उसका सदुपयोग अवश्य करना चाहिए |*


*आज के वर्तमान युग में लगातार बदलती जीवन शैली व निरंतर बढ़ती प्रतिस्पर्धा से सभी परिचित हैं | प्रत्येक व्यक्ति यह जानता है कि यदि सही समय पर सही निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य अंधकार के गर्त में जा गिरता है , इसलिए समय प्रबंधन अर्थात समय का सही सदुपयोग कैसे किया जाए यह प्रश्न प्रायः लोगों के मस्तिष्क में उठता रहता है | जो इस प्रश्न को हल कर लेता है वही इस जीवन में सफल होता है क्योंकि समयानुसार विचार करना , व्यवहार करना और फिर कर्म करना सफलता प्राप्त का एक साधन है | जहां आज के आधुनिक युग में समय को पहचान करके मनुष्य सफलता अर्जित करता चला जा रहा है वही मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" समाज में कुछ ऐसे लोगों को भी देख रहा हूं जो टालमटोल करने की आदत से ग्रसित है | यह टालमटोल करने की आदत समय के प्रबंधन में बहुत बड़ी बाधा है | इसके कारण मनुष्य अपने आवश्यक कार्यों को समय पर पूरा नहीं कर पाता और फिर बाद में उन्हें पूरा करना भी भूल जाता है फिर उसके पास पछतावे के अतिरिक्त और कुछ नहीं शेष बचता है | वैसे तो प्रत्येक कार्य की अपनी महत्ता है परंतु समय पर किसी भी कार्य के पूरा होने पर उसकी महत्ता बढ़ जाती है , अन्यथा कार्य भले ही बहुत अच्छे ढंग से किया गया हो परंतु समय निकल जाने पर वह निरर्थक हो जाता है | शायद इसीलिए कहा गया है कि समय सबसे बलवान एवं सबसे मूल्यवान होता है इसे पहचान कर , इसका आदर एवं सम्मान करते हुए समय के अनुरूप स्वयं को ढाल लिया जाए तो समझो मनुष्य सफलता की सीढ़ी चढ़ता चला जाएगा | आज के इस युग में जिसने समय को साध लिया , समय का सही सदुपयोग कर लिया एवं समय अनुसार अपने को सुव्यवस्थित कर लिया वही व्यक्ति सही मायने में अपने जीवन में सफल है |*


*जो समय की धारा से विपरीत बहने का प्रयास करता है वह अस्तित्वविहीन हो जाता है | अत: प्रत्येक मनुष्य को समय की पहचान करते उसके अनुरूप ही क्रियाकलाप करना चाहिए |*

अगला लेख: संतान सप्तमी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 सितम्बर 2019
*हमारा भारत देश एवं उसकी संस्कृति इतनी दिव्य एवं अलौकिक है यहां नित्य कोई ना कोई पर्व , कोई न कोई व्रत मनाया कि जाता रहता है | हमारे ऋषि - महर्षियों ने मात्र के कल्याण के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में इतने विधान बता दिये हैं कि शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन कोई व्रत - उपवास , पर्व - त्यौहार ना हो
05 सितम्बर 2019
10 सितम्बर 2019
*सनातन धर्म ने मानव जीवन में आने वाली प्राय: सभी समस्याओं का निराकरण बताने करने का प्रयास अपने विधानों के माध्यम से किया है | नि:संतान दम्पत्ति या सुसंस्कृत , सदाचारी सन्तति की प्राप्ति के लिए "पयोव्रत" का विधान हमारे शास्त्रों में बताया गया है | दैत्यराजा बलि के आक्रमण से देवता स्वर्ग से पलायन करके
10 सितम्बर 2019
16 सितम्बर 2019
*सनातन धर्म के अनुयायी अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए धर्म और शास्त्रों के अनुसार हविष्ययुक्त पिंड को प्रदान करते हैं यही कर्म श्राद्ध कहलाता है | जब मनुष्य अपने पितरों के लिए श्रद्धा करते हैं तो इससे उनके पितरों को शांति मिलती हैं और वे सदैव प्रसन्न रहते हुए दीर्घायु, प्रसिद्धि एवं कुसलता प्
16 सितम्बर 2019
29 अगस्त 2019
*इस संसार में मनुष्य अनेकों प्रकार के कर्म करके अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करता रहता है | मनुष्य जाने अनजाने में कृत्य - कुकृत्य किया करता है | कभी-कभी तो अपराधी अपराध करने के बाद भी दंड नहीं पाता तो उसको यह नहीं सोचना चाहिए कि वह पूर्णतया दण्ड से मुक्त हो गया है क्योंकि एक दिन सबको ही यह संस
29 अगस्त 2019
09 सितम्बर 2019
*इस सृष्टि में ईश्वर का विधान इतना सुंदर एवं निर्णायक है कि यहां हर चीज का समय निश्चित होता है | इस धरा धाम पर सृष्टि के आदिकाल से लेकर के अब तक अनेकों बलवान , धनवान तथा सम्पत्तिवान हुए परंतु इन सब से भी अधिक बलवान यदि किसी को माना जाता है तो वह है इस समय | समय के आगे किसी की नहीं चलती है | इस सृष्ट
09 सितम्बर 2019
12 सितम्बर 2019
*सनातन धर्म में मानव कल्याण के लिए अनेकों व्रत विधान की एक लंबी श्रृंखला है जो कि जो मानव जीवन के कष्टों को हरण करते हुए मनुष्य को मोक्ष दिलाने का साधन भी है | इसी क्रम में भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को "अनंत चतुर्दशी" का व्रत किया जाता है | भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है यह व्रत | अनन्त अर्
12 सितम्बर 2019
13 सितम्बर 2019
*मानव जीवन ही नहीं सृष्टि के सभी अंग - उपांगों मे अनुशासन का विशेष महत्व है | समस्त प्रकृति एक अनुशासन में बंधकर चलती है इसलिए उसके किसी भी क्रियाकलापों में बाधा नहीं आती है | दिन – रात नियमित रूप से आते रहते हैं इससे स्पष्ट है कि अनुशासन के द्वारा ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है | विचार कीजिए कि
13 सितम्बर 2019
02 सितम्बर 2019
*यह संसार बड़ा ही विचित्र है | इस पृथ्वी पर रहने वाले अनेक जीव है जो कि एक से बढ़कर एक विचित्रताओं से भरे हुए हैं | इन सभी जीवों में सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य सबसे ज्यादा विचित्र है | मनुष्य की विचित्रता का आंकलन इसी से किया जा सकता है कि यदि मनुष्य से यह प्रश्न कर दिया जाय कि इस संसार में सबसे दुर
02 सितम्बर 2019
21 सितम्बर 2019
*सनातन धर्म में प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण करना अनिवार्य बताया गया है | जो व्यक्ति तर्पण / श्राद्ध नहीं कर पाता है उसके पितर उससे अप्रसन्न होकर के अनेकों बाधाएं खड़ी करते हैं | जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए श्राद्ध एवं तर्पण अनिवार्य है उसी प्रकार श्राद्ध पक्ष के कुछ न
21 सितम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x