हिंदी है दृदय की भाषा ।

14 सितम्बर 2019   |  त्रिशला रानी जैन   (403 बार पढ़ा जा चुका है)

हिंदी का" ह" ह्रदय से जोड़ता है सबको
बड़ी ही सरल सुबोध है ये
कलिष्ट लिखो या सरल ,अर्थ नही बदलते
शब्दो का विशाल है भंडार
मात्राओं का सुंदर परिधान
प्रांतीय भाषाओं का भी है श्रोत है
किसी शब्द पर चंद्र बिंदी लगा दो
लग जाते है अक्षर पर चार चाँद
भाव एक पर अक्षर हिंदी के पास कई है
माँ कहो या अम्मा बस मातृत्व एक है
हिंदी के पास शब्दो का भंडार बहुत है
कभी जाओ वतन से दूर ये याद बहुत आती है
बच्चों को हिंदी लिखना पढ़ना सिखलाओ
उनके मन मैं हिंदी का सम्मान जगाओ
अंगेजी को मत कहो बुरा पर हिंदी को
तो उत्कृष्ट बनाओ हिंदी जन जन की भाषा
माँ जैसा सम्मान करो इसको राष्ट्र भाषा बनाओ

त्रिशला जैन।

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