जीवनी : देश के बंटवारे के समय महात्मा गांधी का हुआ था कुछ ऐसा हाल

16 सितम्बर 2019   |  स्नेहा दुबे   (448 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवनी : देश के बंटवारे के समय महात्मा गांधी का हुआ था कुछ ऐसा हाल

Mahatma Gandhi Biography- भारत के राष्ट्रपिता के रूप में पहचाने जाने वाले महात्मा गांधी का दर्जा आज भी बहुत ऊंचा है। भारतीय मुद्रा हो या फिर कोई सड़क का नाम हर जगह महात्मा गांधी को आज भी सम्मान दिया जाता है। उनकी तस्वीरें सरकारी भवनों में नजर आती हैं और इसके अलावा 15 अगस्त, 26 जनवरी के साथ ही 2 अक्टूबर को भी सरकारी छुट्टी होती है, क्योंकि इसे भी राष्ट्रीय पर्व माना जाता है। जब भी हम अपने देश भारत के इतिहास या आजादी के बारे में बात करते हैं तो स्वतंत्रता सेनानियों का नाम सामने आता है। इनमें से महात्मा गांधी का नाम भी जरूर आता है, बहुत से लोगों के अनुसार भारत को आजादी दिलाने में पूरा सहयोग महात्मा गांधी का था लेकिन इसके पीछे बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों का भी भरपूर योगदान है। फिर भी महात्मा गांधी का अलग ही नाम इस देश की आजादी को लेकर शामिल है, और आज हम आपको Mahatma Gandhi Biography बताने जा रहे हैं।


Mahatma Gandhi


Mahatma Gandhi का शुरुआती जीवन


Mahatma Gandhi

2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्में महात्मा गांधी के पिता मोहनदास करमचंद गांधी पोरबंदर में दीवान थे। इनकी मां पुतलीबाई एक धार्मिक महिला थीं। साल 1983 में जब गांधी जी साढ़े 13 साल के थे तब उनका विवाह कस्तूरबा के साथ हो गया था। जब गांधी जी 15 साल के थे तब उनकी पहली संतान हुई थी लेकिन वो ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह सकी। इसके बाद मोहनदास और कस्तूरबा के चार संताने हरीलाल गांधी (1888), मणिलाल गांधी (1992), रामदास गांधी (1897) और देवदास गांधी (1900) में हुए। मिडिल स्कूल की शिक्षा पोरबंदर में लेने के बाद हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए गांधी जी राजकोट गए। शैक्षणिक स्तर पर मोहनदास एक औसत छात्र ही थे। साल 1987 में उन्होने मैट्रिक की परीक्षा अहमदाबाद से पास की। इसके बाद वे भावनगर के शामलदास कॉलेज मे एडमिशन लिया लेकिन पढ़ाई नहीं कर पाए।


मोहनदास अपने परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे इंसान थे इसलिए उनके परिवार वाले ऐसा मानते थे कि वो अपने पिता और चाचा की तरह दीवान बनेंगे। उनके एक पारिवारिक मित्र मावजी दने ने ऐसी सलाह दी कि मोहनदास को लंदन से बेरिएस्टर की पढ़ाई करवा दो तो उन्हें दीवान की पदवी मिल सकती है लेकिन उनकी मां पुतलीबाई विदेश जाने के खिलाफ थीं। मगर मोहनदास ने कुछ चीजें करके अपनी मां को मना लिया और साल 1888 में वे यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से कानून की पढ़ाई करने और बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड गए। अपने मां को दिए वचन के अनुसार गांधी जी ने लंदन में अपना समय गुजारा। वहां उन्हें शाकाहारी रहने में कठिनाई होती थी और कई-कई दिन उन्हें भूखा रहना पड़ता था। फिर बाद में उन्हें शाकाहारी रेस्टोरेंट का पता चला और बाद में उन्होंने वेजीटेरियन सोसाइटी की सदस्या भी ले ली। इस सोसाइटी के कुछ सदस्य थियोसोफिकल सोसाइटी के सदस्य भी थे जिन्होंने मोहनदास को गीता पढ़ने की सलाह दी थी। साल 1891 में गांधी जी भारत लौट आए और वहां जाकर उन्हें अपनी मां के निधन के बारे में पता चला। उन्होंने बॉम्बे में वकालत की शुरुआत की मगर इसमें कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद वे राजकोट गए जहां उन्होने कुछ जरूरतमंदों के लिए मुकद्दमें की अर्जियां लिखने का काम शुरु किया लेकिन कुछ समय बाद उन्हें ये काम भी छोड़ना पड़ा था। बाद में साल 1893 में एक भारतीय फर्म से नेटल (दक्षिण अफ्रीका) में एक साल तक वकालत का काम किया।


गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में (1893-1914)- Gandhi ji in South Africa


Mahatma Gandhi

24 साल की उम्र में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में थे और वे प्रिटोरिया स्थित कुछ भारतीय व्यापारियों के न्यायिक सलाहकार बन गए थे। उन्होने अपने जीवन के 21 साल दक्षिण अफ्रीका में बिता दिये ते। जहां उनके राजनैतिक विचार और नेतृत्व का विकास होने लगा था। दक्षिण अफ्रीका में उनको गंभीर नस्ली भेदभाव का भी सामना करना पड़ा था, एक बार ट्रेन में प्रथम श्रेणी कोच की वैध टिकट होने के बाद तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने से इंकार करने की वजह से उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था। ये सारी घटना उनके जीनव में महत्वपूर्णं मोड़ बनी और मौजूदा सामाजिक और राजनैतिक अन्याय के प्रति जागरुकता का कारण भी बनी थी। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे अन्याय को देखकर ही उनके मन में ब्रिटिश साम्राज्य को लेकर भारतीय सम्मान तथा उनकी पहचान से संबंधित प्रश्न उठने लगे थे।


दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने भारतीयों को अपने राजनैतिक और सामाजिक अधिकारियों के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होने भारतीयों की नागरिकता संबंधित मुद्दे को भी दक्षिण अफ्रीकी सरकार के सामने उठाया और साल 1906 के जुलु युद्ध में भारतीयों को भर्ती करवाने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों को सक्रिय रूप से प्रेरित करने लगे। गांधी जी अपनी नागरिकता के दावों को कानूनी रूप से भारतीयों को ब्रिटिश युद्ध प्रयासों में सहयोग देने की कोशिश करने लगे। बाद में गांधी जी साल 1914 में भारत वापस आ गए और इस समय तक गांधी एक राष्ट्रवादी नेता और संयोजक बन चुके थे। वह उदारवादी कांग्रेस नेता गोपाल कृष्ण गोखले के कहने पर भारत आए थे और शुरुआती समय में गांधी के विचार बहुत हद तक गोखले के विचारों से प्रभावित हुआ करते थे। शुरुआत में गांधी ने देश के अलग-अलग भागों का दौरा किया और राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को समझने की कोशिश करने लगे थे। फिर यहीं से शुरु हुआ गांधी का आंदोलन जो अलग-अलग नामों से भारतीय इतिहास में दर्ज हुआ।


चम्पारण और खेड़ा सत्याग्रह- Champaran Satyagraha


Mahatma Gandhi

बिहार के चंपारण और गुजरात के खेड़ा में आंदोलनों ने महात्मा गांधी को भारत में पहली राजनैतिक सफलता दिलाई थी। चंपारण में ब्रिटिश जमींदार किसानों को खाद्य फसलों की बजाए नील खेती करने के लिए मजबूर करने लगे थे और सस्ते मूल्यों पर फसल खरीद लेते थे इससे भारतीय किसानों की हालत खराब हो रही थी। साल 1918 में पूरा खेड़ा बाढ़ और सूखे की चपेट में आ गया और इसके कारण किसान और गरीबों की स्थिति और भी खराब होती गई लोग कर माफी की मांग करने लगे थे। खेड़ा में गांधी जी के मार्गदर्शन में सरदार पटेल ने अंग्रेजों के साथ इस समस्या पर विमर्श लिया तो अंग्रेजों ने राजस्व संग्रहण से मुक्ति देकर सभी कैदियों को रिहा कर दिया था। इस तरह चंपारण और खेड़ा के बाद गांधी जी की प्रसिद्धि देशभर में फैल गई और स्वतंत्रता आंदोलन के एक महत्वपूर्ण नेता बनकर गांधी जी उभरे थे।


खिलाफत आंदोलन- Khilafat Movement


Mahatma Gandhi

कांग्रेस के अंदर और मुस्लिमों के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए गांधी जी को खिलाफत आंदोलन मिला। खिलाफत एक विश्वव्यापी आंदोलन था इसके द्वारा खलीफा के गिरते प्रभुत्व का विरोध सारी दुनिया के मुसलमानों द्वारा किया गया था। प्रथम विश्व युद्ध में पराजित होने के बाद ओटोमन साम्राज्य विखंडित हो गया था इसके कारण मुसलमानों को अपने धर्म और धार्मिक स्थलों की चिंता होने लगी। भारत में खिलाफत का नेतृत्व ऑल इंडिया मुस्लिम कांफ्रेंस द्वारा किया जा रहा था और धीरे-धीरे अंग्रेजों द्वारा सम्मान और मैडल वापस कर दिए गए। इसके बाद गांधी ना सिर्फ कांग्रेस बल्कि देश के एकमात्र ऐसे नेता बने जिसका प्रभाव अलग-अलग समुदायों पर होने लगा था।


असहयोग आंदोलन- Asahyog Andolan


Mahatma Gandhi

महात्मा गांधी के अनुसार, भारत में अंग्रेजी हुकुमत भारतीयों के सहयोग से ही संभव हुआ था और अगर हम सभी मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ हर बात असहयोग तरीके से करें तो आजादी संभव हो सकती है। गांधी जी की बढ़ती हुई लोकप्रियता ने उन्हें कांग्रेस का सबसे बड़ा नेता बना दिया था और अब ऐसी परिस्थिति थी कि अंग्रेदों के विरुद्ध असहयोह, अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिकार जैसे अस्त्रों का प्रयोग हो सके। इसी बीच जलियावाला नरसंहार होने से देश को भारी नुकसान हुआ था और इससे जनता क्रोध से भर गई थी और हर जगह हिंसा की ज्वाला उठ गई थी। गांधीजी ने स्वदेशी नीति का आह्वान किया और इसमें विदेशी चीजों खासकर अंग्रेजी चीजों का बहिष्कार कर दिया गया था। गांधी जी का कहना था कि सभी भारतीय अंग्रेजों द्वारा बनाए गए वस्त्रों की अपेक्षा हमारे अपने लोगों के हाथ से पहने खादी वस्त्र पहने। उसी दौरान उन्होंने खादी धोती पहनना शरु किया था।


पुरुषों और महिलाओं को प्रतिदिन सूत कातने को कहा और इसके अलावा गांधी जी ने ब्रिटेन की शैक्षिक संस्थानों और अदालतों का भी बहिष्कार कर दिया था। असहयोग आंदोलन को अपार सफलता मिली और इससे समाज के सभी वर्गों में जोश और भागीदारी बढ़ी। मगर फरवरी, 1922 में इसका अंत चौरा-चौरी कांड से हुआ। इस हिंसक घटना के बाद गांधी जी असहयोग आंदोलन को वापस लेने पर मजबूर हो गए। उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया फिर मुकद्दमा चला और 6 साल की कैद हो गई। खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हे दो साल बाद रिहा कर दिया गया।


स्वराज और नमक सत्याग्रह- Salt March


Mahatma Gandhi

अहसयोग आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी के बाद गांधी जी साल 1924 में रिहा हो गए थे और साल 1928 तक वे राजनीति से दूर ही रहे। इस दौरान वे स्वराज पार्टी और कांग्रेस के बीच मनमुटाव को कम करने की कोशिश में रहे। इसके अलावा अस्पृश्यता, शराब, अज्ञानता और गरीबी के खिलाफ लड़ते रहे। इसी दौरान अंग्रेजी सरकार ने सर जॉन साइमन के नेतृत्व में भारत के लिए एक नया संवेघधानिक सुधार आयोग बनाया और इसमें भारत का कोई भी सदस्य नहीं था। इसके कारण भारतीय राजनैतिक दलों ने इसका बहिष्कार किया। इसके बाद दिसंबर, 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में गांधी जी ने अंग्रेजी सरकार को कहा कि वे भारतीय साम्राज्य को सत्ता वापस कर दें नहीं देश की आजादी के लिए असहयोग आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार हो जाएं। अंग्रेजों द्वारा कोई जवाब नहीं आने पर 31 दिसंबर, 1929 को लाहौर में भारत का झंडा फहराया गया और कांग्रेस ने 26 जनवरी, 1930 को भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया था।


इसके बाद गांधी ने सरकार द्वारा नमक पर लगाए जाने विरोध में नमक सत्याग्रह किया जिसमें उन्होंने 12 मार्च से 6 अप्रैल तक अहमदाबाद से दांडी, गुजरात तक लगभग 388 किलोमीटर की यात्रा की थी। इस यात्रा का उद्देश्य स्वयं नमक उत्पन्न करना था। इस यात्रा में हजारों की संख्या में भारतीयों ने भाग लिया और अंग्रेजी सरकार को विचलित कर दिया। इस दौरान सरकार ने 60 हजार से ज्यादा लोगों को जेल में डाल दिया था। फिर लॉर्ड इरविन ने गांधी जी के साथ विचार विमर्श करके गांधी-इरविन संधि पर हस्ताक्षर कर दिए। साल 1934 में गांधी ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और फिर ग्रामिण भारत को शिक्षित करने, छुआछूत के खिलाफ आंदोलन जारी रखने, कताई-बुनाई और दूसरे कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की मुहीम चलाई थी


भारत छोड़ो आंदोलन- Quit India Movement


Mahatma Gandhi

द्वितीय विश्व युद्ध के शुरुआत में गांधी जी अंग्रेजों को अहिंसात्मक नैतिक सहयोग देने के पक्ष में थे लेकिन कांग्रेस के बहुत से नेता इस बात से खुश नहीं थे कि जनता के प्रतिनिधियों के परामर्श के लिए बिना ही सरकार ने देश को युद्ध में झोंक दिया गया था। गांधी ने घोषणा कर दी थी कि एक तरफ भारत को आजादी देने से इंकार किया जा रहा है और दूसरी तरफ लोकतांत्रिक शक्तियों की जीत के लिए भारत को युद्ध में शामिल किया गया। 'भारत छोड़ो' स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष का सर्वाधिक शक्तिशाली आंदोलन बना, इसमें व्यापक हिंसा और गिरफ्तारी भी हुई। गांधी जी ने स्पष्ट रूप से कह दिया था कि वे ब्रिटिश युद्ध प्रयासों को समर्थन नहीं करेंगे और जब तक भारत को आजादी नहीं दी जाती है। उनका मानना था कि देश मे व्याप्त सरकारी अराजकता असली अराजकता से भी खतरनाक साबित हो रही है। गांधी ने सभी कांग्रेसियों और भारतीयों को अहिंसा के साथ करो या मरो का नारा दिया।


जैसा कि सबको अनुमान था कि अंग्रेजी सरकार ने गांधी और कांग्रेस कार्य समिति के सभी सदस्यों को मुंबई में 9 अगस्त, 1942 को गिरफ्तार कर लिया गया और गांधी को पुणे के आंगा खां महल ले जाया गया जहां पर उन्हें दो सालों तक बंदी बनाकर रखा गया। इसी दौरान 22 फरवरी, 1944 उनकी पत्नी कस्तूरबा का निधन हो गया और कुछ समय बाद गांधी भी मलेरिया से पीड़ित हो गए थे। तो साल 1944 में गांधीजी को अंग्रेजों ने रिहा कर दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि वे जल्द ही भारत को उसकी सत्ता सौंप देंगे। गांधी जी ने भारत छोड़ो आंदोलन समाप्त कर दिया और सरकार ने लगभग 1 लाख कैदियों को रिहा कर दिया था।


देश का विभाजन - Partition of India


Mahatma Gandhi

भारत की आजादी के आंदोलन के साथ ही जिन्ना के नेतृत्व में एक अलग मुसलमान बाहुल्य देश (पाकिस्तान) की भी मांग तेज होने लगी। 40 के दशक में इन ताकतों ने एक अलग राष्ट्र पाकिस्तान की मां को वास्तविकता में बदल दिया। जिस देश की आजादी के लिए गांधी जी ने अपनी एक उम्र लगा दी उसका बंटवारा वे नहीं चाहते ते लेकिन जिन्ना द्वारा भड़काए हुए मुस्लिमों में आक्रोश को वे रोक नहीं पा रहे थे। गांधी जी धार्मिक एकता के सिद्धांत से बिल्कुल अलग था पर ऐसा हो ना पाया और अंग्रेजो ने जाते-जाते देश के दो टुकड़े 'भारत-पाकिस्तान' के रूप में कर दिए। मगर कुछ क्रांतिकारियों को लगता था कि ये सब गांधीजी के सहमति से हो रहा है और उन्होने गांधीजी को बहुत समझाने की कोशिश की कि देश के टुकड़े होने से आने वाले समय में बहुत सी समस्याएं आ सकती हैं लेकिन बढ़ते हुए दंगे और निर्दोष लोगों के मारे जाने से क्षतिग्रस्त गांधी जी ने देश के टुकड़े होने में ना चाहते हुए भी सहमति दिखाई और देश के टुकड़े हो गए। देश के विभाजन के सबसे बड़े विरोधी नाथूराम गोडसे थे और वे गांधी से बहुत नाराज हुए।


गांधी जी की हत्या - Death of Mahatma Gandhi


Mahatma Gandhi

30 जनवरी, 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दिल्ली के बिरला हाउस में शाम 5.17 पर एक सभा को संबोधित करके लौट रहे थे। तभी उनके सामने नाथूराम गोडसे आंखों में गुस्सा लेकर आए और गांधीजी के सीने पर तीन गोलियां दाग दीँ। ऐसा माना जाता है कि गांधी जी ने जमीन पर गिरते हुए 'हे राम' बोला था। नाथूराम ने गांधीजी को गोली मारकर आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने अपना जुर्म कबूल किया और बिना किसी सरकारी वकील को लिए सजा की मांग की। नाथूराम गोडसे और उनके सहयोगी पर मुकद्दमा चलाया गया और साल 1949 में उन्हें मौत की सजा सुना दी गई।


भारत के इन चर्चित लोगों की जीवनी पढ़ें-


Narendra Modi Biography

Pratibha Patil

Sundar Pichai

Sambhaji Maharaj Biography

Kamaladevi Chattopadhyay ki Jivani

अगला लेख: अपने बच्चे की मौत के बदले की चाह में कौआ साथियों सहित कातिल आदमी पर करता था हमला, ऐसे सामने आया मामला



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 सितम्बर 2019
भारत के सबसे मजबूत राजनीतिक परिवार में 'गांधी परिवार' का नाम भी आता है। आज भले लोग गांधी परिवार का मजाक बनाने लगे हों लेकिन इनकी शुरुआत जब हुई तो एक खास बात रहती थी। इंदिरा गांधी एक दमदार शख्सियत थीं और उनके बेटे राजीव गांधी ने भी लोगों के दिल में खास जगह बनाई थी लेकिन उनके बेटे राहुल गांधी तो आज की
12 सितम्बर 2019
03 सितम्बर 2019
सोशल मीडिया पर बहुत से लोग उसे अपने टाइमपास के लिए इस्तेमाल करते हैं। फेसबुक हो या फिर कोई और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ज्यादातर लोग यहां पर दोहरे चेहरे लगाकर ही घूमते हैं। इंसान अपने मन को खुश रखने के चक्कर में बहुत से लोगों के साथ खेल जा
03 सितम्बर 2019
12 सितम्बर 2019
भारत के सबसे मजबूत राजनीतिक परिवार में 'गांधी परिवार' का नाम भी आता है। आज भले लोग गांधी परिवार का मजाक बनाने लगे हों लेकिन इनकी शुरुआत जब हुई तो एक खास बात रहती थी। इंदिरा गांधी एक दमदार शख्सियत थीं और उनके बेटे राजीव गांधी ने भी लोगों के दिल में खास जगह बनाई थी लेकिन उनके बेटे राहुल गांधी तो आज की
12 सितम्बर 2019
03 सितम्बर 2019
जब किसी को अचनाक दौलत मिलती है तो वो शायद उसकी कद्र नहीं करे लेकिन जब किसी गरीब को शोहरत मिलने लगती है या फिर जब वो पाई-पाई का मोहताज होता है तब उसे वो मुकाम मिल जाता है जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं तो वो लोग उस शोहरत को मिलने के जरिए को कभी नहीं भूलते हैं। पिछले कुछ समय से इंटरनेट सेशन बनी रानू
03 सितम्बर 2019
02 सितम्बर 2019
भारतीय टीम इंडिया के सिर पर जितना प्रेशर होता है वो लोग उतना ही लाइफ को मजे के साथ लेते हैं। ऐसा आज से नहीं बल्कि दशकों से होता आया है। अगर टीम इंडिया के सिर पर मैच का ज्यादा स्ट्रेस रहता है तब भी वे अपने हर पल को अच्छे से व्यतीत करते हैं। कुछ ऐसा ही किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं जब टीम इंडिया ने
02 सितम्बर 2019
05 सितम्बर 2019
देशभर में गणपति की धूम है और उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक लोग गणेश पूजन करके उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश में रहते हैं। गणेश जी हर किसी की मनोकामनाएं पूरी करने वाले देवता है और अगर उनके भक्त परेशानी में रहते हैं तो वे उनके दुख भी हर लेते हैं। गणेश भगवान का पूजन करने से विचलित व्यक्ति भी स्थिर ह
05 सितम्बर 2019
06 सितम्बर 2019
मोदी सरकार के कार्यकाल को 100 दिन हो गए हैं और इन दिनो में या फिर अपने पहले कार्यकाल में पीएम नरेंद्र मोदी ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए। अब इसमें कुछ लोगों को ये नामंजूर था तो कुछ ने सहमती दी। एबीपी न्यूज ने अगस्त के आखिरी हफ्ते में 11,308 लोगों के साथ एक सर्वे किया जिसमे
06 सितम्बर 2019
26 सितम्बर 2019
आज भारत के महान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर को उनकी 200वीं जयंती पर याद किया जा रहा है। विद्यासागर 19 वीं सदी के एसे महान भारतीय व्यक्ति थे जो आज भी समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद के रूप में याद किये जाते हैं। प्रोफेसर ईश्वर चंद्र विद्
26 सितम्बर 2019
13 सितम्बर 2019
हम सभी को अपनी सेहत की फिक्र है लेकिन समय ना होने के कारण हम अपने लिये ही समय नहीं निकाल पाते। फिर होती हैं कई तरह की बीमारियां और समय पर काम ना करने की परेशानी जो बहुत से लोगों के साथ अक्सर होता ही है। मगर कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो आपकी सेहत को सही रखते हुए आपके चेहरे को हमेशा चमका कर रखता है। अक्स
13 सितम्बर 2019
02 सितम्बर 2019
90 के दशक की बहुत सारी एक्ट्रेसेस रही हैं जिनका सिक्का उस समय तो खूब चलता था लेकिन धीरे-धीरे उनका चार्म खत्म होने लगा। उस दौर की अभिनेत्रियों पर अंडरवर्ल्ड का साया भी रहता था। मगर फिर भी वे इस डर के साये में अच्छे से जिंदगी को जीना नहीं भूलती थीं, उन्हीं में से एक थीं एक्ट्रेस सोनम जो 90 के दशक में
02 सितम्बर 2019
03 सितम्बर 2019
जब किसी को अचनाक दौलत मिलती है तो वो शायद उसकी कद्र नहीं करे लेकिन जब किसी गरीब को शोहरत मिलने लगती है या फिर जब वो पाई-पाई का मोहताज होता है तब उसे वो मुकाम मिल जाता है जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं तो वो लोग उस शोहरत को मिलने के जरिए को कभी नहीं भूलते हैं। पिछले कुछ समय से इंटरनेट सेशन बनी रानू
03 सितम्बर 2019
16 सितम्बर 2019
बॉलीवुड की खबरें हमेशा से ही कोई ना कोई धमाल लेकर आती हैं। लोग फिल्म इंडस्ट्री से काफी लगाव महसूस करते हैं क्योंकि अगर वे उदास हैं, बोर हो रहे हैं या फिर एन्जॉय करना चाहते हैं तो फिल्मों का सहारा लेते हैं। बॉलीवुड में बहुत सारी गॉसिप भी चलती हैं जिससे मीडिया वालों को गरमा-गरम चटपटी बातें मिलती हैं ज
16 सितम्बर 2019
03 सितम्बर 2019
दुनिया में बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जो आम नहीं है और अक्सर उन चीजों के पीछे कोई ना कोई खास मकसद भी होता ही है। आपने फिल्मों में ऐसी कई कहानियां देखी होंगी जिसमें एक जानवर अपने मालिक या अपने किसी खास के साथ गलत हुए का बदला लेने के लिए उस कातिल का पीछा करता ही है। मगर असल में ऐसा शायद ही आपने कहीं स
03 सितम्बर 2019
02 सितम्बर 2019
देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम है और ज्यादातर घरों में बप्पा को स्थापित कर दिया गया है। हर कोई खुश है और हर किसी के मन में एक ही आस्था है कि गणेश जी घर आए हैं तो कुछ अच्छा ही करते हुए जाएंगे। कुछ लोग 3 दिन, कुछ 5, कुछ 7 तो कुछ लोग 10 दिनों के लिए घर में मूर्ति स्थापित
02 सितम्बर 2019
02 सितम्बर 2019
90 के दशक की बहुत सारी एक्ट्रेसेस रही हैं जिनका सिक्का उस समय तो खूब चलता था लेकिन धीरे-धीरे उनका चार्म खत्म होने लगा। उस दौर की अभिनेत्रियों पर अंडरवर्ल्ड का साया भी रहता था। मगर फिर भी वे इस डर के साये में अच्छे से जिंदगी को जीना नहीं भूलती थीं, उन्हीं में से एक थीं एक्ट्रेस सोनम जो 90 के दशक में
02 सितम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
चं
08 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x