हौंसला- 8 साल के बेटे को बेहतर जिंदगी देने के लिए 'लक्ष्मी' बनीं कुली

26 सितम्बर 2019   |  अभय शंकर   (389 बार पढ़ा जा चुका है)

हौंसला- 8 साल के बेटे को बेहतर जिंदगी देने के लिए 'लक्ष्मी' बनीं कुली

हम में से ना जाने ऐसे कितने ही लोग हैं जो अपने काम से खुश नहीं हैं क्योंकि उन्हें अपनी ड्रीम जॉब नहीं मिली। ऐसे में हम अक्सर सोचते हैं कि हम कितनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो ना सिर्फ अपने मुश्किल हालातों से लड़ रही है बल्कि समाज की रूढियों को तोड़ते हुए इस समाज में अपने लिए जगह बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत भी कर रही है। हम बात कर रहे हैं भोपाल जंक्शन रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करने वाली 30 वर्षीय लक्ष्मी की।

इस साल जुलाई महीने में लक्ष्मी के पति की मौ’त हो गई जिसके बाद लक्ष्मी ने ये काम शुरू कर दिया।वो अपने पति का कुली नंबर 13 का बिल्ला लगाती है। प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के आते ही लक्ष्मी यात्रियों की सामान ले जाने में मदद के लिए दौड़ पड़ती हैं। लक्ष्मी एक 8 साल के बेटे की मां हैं वो कहती हैं कि उन्होंने अपने पति की नौकरी लेने का फैसला किया क्योंकि वो अपने मुश्किल हालातों से लड़ते हुए अपने बेटे को अच्छी जिंदगी देना चाहती थीं।

लक्ष्मी बताती हैं कि मेरे पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है मुझे अपने बेटे के लिए काम करने की जरूरत है। इस काम के साथ मैं एक दिन में 50 से 100 रुपये तक कमा लेती हूं। लक्ष्मी फिलहाल अपने बेटे के साथ अपने माता—पिता के घर रह रही हैं क्योंकि उनके ससुराल वाले भी गुजर चुके हैं। कुली का काम शारीरिक श्रम का काम है लेकिन लक्ष्मी कहती हैं कि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि वो शिक्षा हासिल नहीं कर सकीं।

लक्ष्मी ने कहा कि हां ये मुश्किल है लेकिन मेरे पास ​कोई और विकल्प नहीं है। मुझे अपने बेटे के लिए कुछ करना है ताकि वो अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और अपनी जिंदगी में कुछ कर सके। लक्ष्मी ने कहा कि मुझे एक परमेनेंट नौकरी चाहिये क्योंकि इस नौकरी में अच्छे पैसे नहीं मिलते। और ऐसे भी दिन होते हैं जब आप कुछ नहीं कमाते।


लक्ष्मी अपने साथी कुली को भी श्रेय देती है जो उन्हें काम दिलाने और यात्रियों के भारी सामान को उठाने में मदद करते हैं। एक साथी कुली महेश प्रजापति कहते हैं— कभी-कभी यात्री उसे बताते हैं कि सामान उसके लिए बहुत भारी है। फिर हम यात्रियों को उसकी हालातों के बारे में समझाते हैं और फिर वे उसकी मदद करने के लिए तैयार हो जाते हैं। कभी-कभी जब सामान हमारे लिए बहुत भारी होता है तो हम उसे मदद करने के लिए कहते हैं फिर हम उसे उसका हिस्सा दे देते हैं।

महेश बताते हैं हम सरकार से उसे ग्रुप-डी की नौकरी देने के लिए कह रहे हैं। हमने अपने प्रतिनिधियों को एक पत्र भी लिखा है। स्टेशन पर समाज की रूढ़ियों को तोड़ती हुई एक महिला कुली को देखकर कई यात्री हैरान भी होते हैं। एक साथी कुली कहते हैं कि समाज वो सोचेगा जो वो चाहता है लेकिन वो आजाद होना चाहती है अपने बेटे के लिए काम करना चाहती है। वो उन लोगों के लिए एक उदाहरण है जो अपने आप से कुछ करना चाहते हैं।

लेकिन इस बीच भी लक्ष्मी यात्रियों के बीच अपना रास्ता बनाते हुए उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्हें मदद की जरूरत है।

Sources:-Live News

हौंसला- 8 साल के बेटे को बेहतर जिंदगी देने के लिए 'लक्ष्मी' बनीं कुली

https://www.ekbiharisabparbhari.com/lakshmi-worked-as-kulli-at-bhopal-sttaion/

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