शक्ति पूजन की सार्थकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

29 सितम्बर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (452 बार पढ़ा जा चुका है)

शक्ति पूजन की सार्थकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिशक्ति पराअम्बा जगदम्बा जगतजननी भगवती दुर्गा जी के पूजन का पर्व नवरात्रि प्रारम्भ होते ही पूरे देश में मातृशक्ति की आराधना घर घर में प्रारम्भ हो गयी है | जिनके बिना सृष्टि की संकल्पना नहीं की जा सकती , जो उत्पत्ति , सृजन एवं संहार की कारक हैं ऐसी महामाया का पूजन करके मनुष्य अद्भुत शक्तियां , सिद्धियां एवं ऐश्वर्य प्राप्त करता है | प्राचीनकाल से लेकर अब तक जिनकी महिमा का गुणगान देव - दानव , मानव , यक्ष , किन्नर , गन्धर्व किया करते हैं ऐसी ममतामयी मैया अम्बिका ने यह दिखाया है कि नारी में असीम शक्ति है | नारी यदि सृजन कर सकती है तो पाल एवं संहार करने में भी सक्षम है | मधु कैटभ , महिषासुर , रक्तबीज , शुम्भ - निशुम्भ , चण्ड - मुण्ड आदि से भीषण युद्ध करके उनका संहार करके महामाया ने यह दर्शाया है कि नारी यद्यपि सौम्यस्वरूपा है परंतु यदि कभी कोई ऐसा अवसर आ जाय जहाँ मर्यादा का हनन होने लगे , जहाँ सृष्टि के विपरीत कार्य होने वहाँ वह उग्र स्वरूप धारण करके चण्डी और काली भी बन जाती है | अत: समस्त मातृशक्तियों का सदैव सम्मान होते रहना चाहिए | जहाँ नारी का असम्मान होने लगता है वहाँ का विनाश प्रारम्भ हो जाता है चाहे त्रेता का सीताहरण हो चाहे द्वापर का द्रौपदी चीरहरण नारी के सम्मान पर आंच आई तो विनाश ही हुआ है | नारी से ही समस्त सृष्टि है इसीलिए नारी की सुरक्षा , संरक्षा एवं सम्मान करना समस्त मानवजाति की नैतिक जिम्मेदारी है |*


*आज नवरात्रि का प्रथम दिन है जगह - जगह भव्य पाण्डाल बनाकर ममतामयी मैया की मूर्ति स्थापना करके भक्तजन महामाया को प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे | नौ दिन तक शक्तिपूजन करके मनुष्य यह समझता है कि मुझे महामाई की कृपा प्राप्त हो जायेगी | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज समाज में जो देख पा रहा हूं उसके अनुसार घर घर में जिस प्रकार मातृशक्तियों का अपमान हो रहा है वह उचित नहीं कहा जा सकता है | घर में उपस्थित मातृशक्ति चाहे वह बेटी हो , बहन हो या माता हो या पत्नी उनका तिरस्कार एवं अपमान करके पांडाल में में सजी दुर्गा जी की मूर्तियों की कृपा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले विचार करें कि उनको महामाया की कृपा कितनी और कैसे प्राप्त हो पाएगी ? यदि महामाया की कृपा प्राप्त करना है तो समस्त नारी जाति का सम्मान करने की आदत डालनी होगी अन्यथा दुर्गा पूजा मनाने से कोई लाभ नहीं मिलने वाला है | आज देश की जो दशा - दुर्दशा है , नित्य समाचार पत्रों के माध्यम से जिस प्रकार के समाचार पढ़ने को मिलते हैं उससे हृदय कम्पित हो जाता है और यह विचार करने पर विवश होना पड़ता है कि आज मनुष्य की मानसिकता किस प्रकार विकृत हो गई है | नारी शक्ति का पूजन करने का ढोंग करने वाला मनुष्य नारियों के प्रति कितना निर्लज्ज एवं वीभत्स हो गया है यह बताने की आवश्यकता नहीं है | विकृत मानसिकता के लोग पूरे समाज को विकृत करने का प्रयास कर रहे हैं ! ऐसे लोग यदि महामाया का पूजन करने का प्रयास करते हैं तो उनके द्वारा आदिशक्ति का पूजन वरदान नहीं वरन् श्राप ही प्रदान करने वाला हो सकता है |*


*नवरात्रि के नौ दिनों में नारी शक्ति की आराधना करना तभी सफल हो पाएगा जब जीवन पर्यंत नारी शक्ति का सम्मान करने का संकल्प लिया जाय |*

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