हाइकु

03 अक्तूबर 2019   |  व्यंजना आनंद   (407 बार पढ़ा जा चुका है)

हाइकु

""""""""

1)माँ तू ही तो है-

भू को ढ़के अम्बर

सबसे न्यारी।


2)तेरे उर में-

मिलता है पूर्ण ही

जन्नत मुझे ।

3) सपनों की है-

दुनिया यह सारी

खुले आकाश ।


4)खगों की गूँज-

नहीं है अब बात

कैसी बैचैनी ।


5) कलयुग का-

आतंक चौतरफा

मन व्याकुल ।


6)अश्रु भरे हैं,

घटा फटने वाली

व्याकुल आँखें ।


7) ज़िद है तेरी,

नहीं मिला मुझे तो

पेड़ है सूखे ।


8)जिन्दगी भारी-

उजड़ा चमन है

खत्म हैं ख्वाब ।


9) बेटी निःशब्द -

बाबुल से विदाई

सुना वातास।


10) हौसला साथ-

टिमटिमाते तारे

माँ का आशीष ।

"""""""""""""""""""""""""

व्यंजना आनंद (मिथ्या) ✍

अगला लेख: श्रीमद्भगवद्गीता- 2



अद्भभुत हाइकु👌👌👌👌👌

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