अब हिंदी में भी पसंद किया जा रहा है डिजिटल किताबों को।

04 अक्तूबर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (7838 बार पढ़ा जा चुका है)

अब हर चीज़ डिजिटल हो रही है चाहे वो अखबार हो या न्यूज़ चैनल। बदलाव वक्त की मांग है। डिजिटल युग में हर चीज़ ऑनलाईन हो रही है चाहे वो शॉपिंग हो या पाठ्य सामग्री ऐसे में इसके महत्व को नाकारा नहीं जा सकता है। हालांकि अभी भी लोग किताबों का पेपर बैक एडिशन लेना पसंद करते है लेकिन डिजिटल माध्यम में उपलब्ध होने के कारण किताबों को खरीदने के लिए किसी बुक को पोस्ट से मंगाने का इंतज़ार भी नहीं करना पड़ता है साथ ही किसी बुक स्टोर में यदि कोई बुक नहीं मिलती है तो उसे डिजिटल माध्यम में प्राप्त किया जा सकता है साथ ही इनकी कीमत भी पेपरबैक की तुलना में कम होती है।

अंग्रेजी के साथ हिंदी लेखक भी डिजिटल किताबों की तरफ आकर्षित हो रहे है। इसकी पहली वजह है कि पारंपरिक पब्लिशर के अप्रूवल का इंतज़ार नहीं करना पड़ता है इसमें कुछ महीनों से सालों तक का वक्त लग सकता है और अगर आप इस क्षेत्र में नए है तो आपको लिए राह थोड़ी मुश्किल हो सकती है। अगर आपकी कहानी पसंद आ जाए तो बात बन सकती है लेकिन इसके लिए आपको धैर्य की ज़रुरत होती है।

दूसरा रास्ता बचता है वैनिटी पब्लिशिंग का जिसमें आपको ही पूरा ख़र्चा उठाना पड़ेगा एक किताब को पब्लिश करवाने के लिए, साथ ही प्रचार प्रसार भी करना पड़ेगा। किताब छपने के बाद इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि वो अपनी लागत निकाल पाएगी या नहीं, अगर आप मुनाफ़ा कमाने के हिसाब से खुद खर्च करके किताब छपवाना चाहते है तो आपको एक बार और सोचने की ज़रुरत है।

जब तक आप मशहूर ना हो तब तक आपकी किताब ख़ासकर कविता और शायरी संग्रह को बेचना थोड़ा टेड़ी खीर हो सकता है ऐसे में डिजिटल माध्यम में सेल्फ पब्लिशिंग आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है जिसका खर्च कुछ भी नहीं है।

भारत में अमेज़न किंडल डायरेक्ट पब्लिशिंग सेल्फ पब्लिशिंग का अच्छा विकल्प बनकर उभरा है इसके लिए आपको बस वर्ड फार्मेट में अपना कंटेट लिखना है और अपलोड कर देना है साथ ही उनके मानदंडों के अनुरूप कवर साईज़ और क्वालिटी का ध्यान रखते हुए कवर अपलोड करना है।

अगर आप फोटोशॉप जानते है तो कवर खुद बना सकते है या फिर किसी डिज़ायनर की सहायता ले सकते है, किताब लिखने के बाद उसे दो तीन बार अच्छी तरह चेक कर ले क्योंकि व्याकरण संबंधी त्रुटी वाली किताब स्वीकार नहीं की जाती है। साथ पब्लिशिंग कंटेट भी गाइडलाईन के अनुरूप होना चाहिए।

अमेजन के अलावा पोथी.कॉम पर भी बुक बनाई जा सकती है। अलग अलग प्लेटफार्म पर रॉयल्टी की अलग अलग दर है। आप अपने मन मुताबिक किताब की कीमत तय कर सकते है या मुफ़्त में भी उपलब्ध करा सकते है। कई मशहूर लेखकों की किताबें पैपरबेक के साथ किंडल एडिशन में भी उपलब्ध है। हाल ही में मैंने अपना कविता संग्रह मानसी ई बुक के रुप में ही प्रकाशित किया है, जिसे देखकर आप अंदाज़ा लगा सकते है कि ई बुक प्रकाशित होने के बाद कैसी दिखती है।



www.amazon.in/dp/B07YHWXD15

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