रामानंद सागर को राम जी ने ही चुना

08 अक्तूबर 2019   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (3234 बार पढ़ा जा चुका है)



आज दशहरा है .जहाँ देखो रामलीला और रामायण की धूम है .आज बहुत से फिल्म निर्देशक और निर्माता रामायण की लोक प्रियता को भुनाने के मूड में हैं और राम के चरित्र से जुड़े इस कथानक पर आधारित धारावाहिकों व् फिल्मों की बाढ़ सी आ गयी है किन्तु यदि हम इन सभी की गुणवत्ता का आकलन करते हैं तो केवल रामानंद सागर जी की ''रामायण ''ही इस कसौटी पर खरी उतरती है .


सबसे पहले तो आज के धारावाहिक कहीं भी राम सीता की वह छवि प्रस्तुत नहीं कर पाते जो जन जन के मन में बसी है रामायण के राम और सीता के रूप में अरुण गोविल और दीपिका चिखिल्या ने जो अभिनय किया है वह कहीं से भी अभिनय नहीं लगता बल्कि वह उनमे हमें उसी प्रभु की छवि दिखाता है जो हमने बरसों से अपने मन में बसा रखी है अन्य धारावाहिक केवल एक नौटंकी सी लगते हैं जो गाँव गाँव में रामलीला के रूप में सामान्य जन जन द्वारा खेली जाती है .


न केवल राम सीता बल्कि यहाँ तो हर कलाकार बिलकुल रामयुग की याद दिलाते हैं भले ही महाराजा दशरथ हों या महारानी कौशल्या ,जनकराज हों या महारानी सुकन्या ,भरत ,लक्ष्मण ,सुमंत ,रावन ,मेघनाद आदि सभी असली ही लगते हैं यही नहीं कि केवल पात्र ही असली लगते हैं बल्कि संगीत ,डायलॉग ,मंच सज्जा सभी कुछ देखकर बस यही लगता है कि भगवान ने स्वयं रामानंद सागर जी को उसी तरह इसे बनाने के लिए प्रेरित किया जैसे स्वयं ब्रह्मा जी ने आकर महर्षि वाल्मीकि को रामायण लिखने के लिए प्रेरित किया था ,जैसे तुलसीदास जी ने रामचरितमानस को जन जन की जानकारी की भाषा में लिखकर इसे सभी के लिए सुलभ ग्रन्थ का स्थान दिया था वैसे ही रामानंद सागर जी ने इसे साधारण बोलचाल की भाषा में बनाकर इसे कालजयी धारावाहिक का रूप दिया है और इसी का प्रभाव है कि बरसों बरस बीतने के बाद भी हजारों लाखों बार देखने के बाद भी कोई इसे देखने के बाद उस जगह से अपने कदम नहीं हटा पता और जब तक यह चलायमान रहती है तब तक वह उसी जगह पर ठिठक कर रह जाता है .


रामायण को पढना सभी के लिए संभव नहीं और अखंड रामायण का पाठ भी सभी को अपने आदर्श राम के चरित्र से उस तरह नहीं जोड़ पाते जिस तरह रामानंद सागर जी की रामायण सभी को जोड़ देती है और इसी कारण आजकल रामलीला के दौरान लोग इसे कहीं घर में तो कहीं विभिन्न समूहों द्वारा किये गए आयोजन में देखने के लिए समय से पहले पहुँच लेते हैं और बाकायदा प्रशाद भी चढाते हैं और ये सब देख यही लगता है कि रामायण बनवाने के लिए रामानंद सागर जी को स्वयं भगवान् ने ही प्रेरणा दी होगी और रामानंद सागर जी को इस पुण्य कर्म के लिए स्वयं भगवान राम ने ही चुना होगा.


''बोलो सियावर रामचंद्र जी की जय ''


शालिनी कौशिक


[कौशल ]

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