वो लेखक जिन्होंने वक्त से पहले छोड़ दी दुनिया

11 अक्तूबर 2019   |  शिल्पा रोंघे   (455 बार पढ़ा जा चुका है)

वो लेखक जिन्होंने वक्त से पहले छोड़ दी दुनिया

अपने लेखन से लोगो के जीवन में उत्साह, प्रेरणा भरने वाले, कभी कभी सोचने को मजबूर करने वाले और संवेदनशील मुद्दों पर बेबाकी से राय रखने वाले लेखक कभी कभी हालातों से इतने मजबूर हो जाते है कि आत्महत्या करने का फैसला ले लेते है। हम अपने लेख में उन लेखकों का ज़िक्र करेंगे जिन्होंने वक्त से पहले छोड़ दी ये दुनिया।



अर्नेस्ट हेमिंग्वे- ओल्ड मेन एंड सी जैसी रचना करने वाले अर्नेस्ट हेमिंग्वे अमेरिकन पत्रकार और लेखक थे। नोबल और पुलित्ज़र जैसे अवार्ड पाने वाले अर्नेस्ट हेमिंग्वे की मौत गोली लगने से हुई थी। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने आत्महत्या की थी। कहा जाता है कि परेशानियों के बोझ के कारण वो तनावग्रस्त हो गए थे।


हंटर एस थॉम्पसन- ये अमेरिकी पत्रकार और लेखक थे जो कि गोन्जो जर्नलिज़्म मूवमेंट के जनक थे। द रम डायरी, फियर एंड लोथिंग इन लॉस वेगास जैसे किताब लिखने वाले हंटर एस थॉम्पसन ने 67 साल की आयु में बंदूक के ज़रिए आत्महत्या कर ली। कहा जाता है कि वो पीठ में लगी चोट से होने वाले दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने ऐसा कदम उठाया।


एन सेक्सटन- लिव एंड डाई को लिखने वाली एन सेक्सटन पुल्तिज़र अवार्ड से नवाज़ी जा चुकी है। तनाव से जूझ रही एन सेक्सटन की कविताओं में भी उनकी दुखमय ज़िंदगी की झलक देखने को मिलती है। कार्बन मोनो ऑक्साईड गैस की वजह से उनकी जान गई, कहा गया है कि उन्होंने खुद अपनी जान ली है।


वर्जिनिया वुल्फ- मिसेस डैलोवे जिसमें डिप्रेशन से जुझ रहा एक पात्र अपनी जीवनलीला खुद समाप्त कर लेता है, किसी ने सोचा भी ना होगा कि दुनिया की इस महानतम कृति को लिखने वाली लेखिका भी खुद ही जान दे देगी। वयस्क होने से पहले ही उन्होंने अपने माता पिता को खो दिया। इन घटनाओं ने उन्हें अंदर तक तोड़ कर रख दिया। उन्होंने शादी भी की लेकिन उनके जीवन की परेशानियां खत्म नहीं हुई। उनके पति यहूदी थे इसलिए दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान नाजी सेना द्वारा उन्हें काफी परेशान किया गया। उनके प्रेस को खत्म कर दिया गया। 59 साल की उम्र में उन्होंने नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। रुम ऑफ वन्स ओन लिखने वाली वर्जिनिया का ये कहना था कि अगर कोई महिला फ़िक्शन लिखना चाहती है तो उसके पास अपना एक कमरा और पैसा होना चाहिए। उनकी ज्यादातर किताबों में स्त्री मन को टटोलने की कोशिश की गई है अवसाद जैसी समस्याओं को भी उठाया गया है।


सिल्विया प्लाथ - अपनी कविताओं के लिए दुनियाभर में मशहूर हो चुकी सिल्विया ने सच्चे दिल से प्रेम किया और हर बार उन्हें मायूसी तो कभी धोखा ही मिला नतीजा ये हुआ को वो अवसाद में चली गई। उनकी कविताओं में मन की विभिन्न अवस्थाओं का बेहतरीन वर्णन देखने को मिलता है। केवल तीस वर्ष की आयु में उन्होंने अपने घर के रसोईघर में खुद की जान ले ली।


इन लेखकों के जीवन को देखकर बस यही बात ज़हन में आती है कि काश इन्होंने ये कदम ना उठाया होता या फिर इन्हें बचा लिया गया होता।

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