आँख में उम्र कैद

11 अक्तूबर 2019   |  जानू नागर   (418 बार पढ़ा जा चुका है)

आँख में उम्र कैद

बल्ब की रोशनी लकड़ी की मेज मे पड़ रही थी, मेज के ऊपर एक किताब जिसके मुख्यप्रष्ठ मे उभरता शब्द शहर की तरफ ले गया शहर नदी के किनारे बसा परछाई को उसके पानी मे पाता हैं| दिन की रोशनी और रात की रोशनी मे अलग-अलग दिखता| इन दोनों की परछाई मे एक बस्ती शामिल थी जिसकी परछाई नदी मे डूबी रहती| सावन का महिना गाँव होता तो हरियाली दिखती साँप बिच्छू खनखजूर दिखते शहर मे नाली व गंदेनाले मे बहता काला मटमैला पानी नदी मे आकर गिरता| मोर की आवाज नहीं लेकिन हाँ रेल की होरन कानो मे गूंज मचाती वह भी नदी मे बने लोहे के पुल से धड़धड़ाते हुए धीरे-धीरे गुजरती कभी कुहकी भरते हुए तो कभी पो... करते हुए| कभी तो लगता की रेल नदी के पानी से होकर जा रही हैं उसकी परछाई भी खिसकती हुई दिखती |पुल के बीचों बीच एक छोटी से छतरी उसमे बैठा हुआ, कभी खड़ा हुआ नेपाली सैनिक अपने कंधे मे पड़ी रायफल को संभालता रहता ट्रेन के आने से पहले जाने के बाद वह कभी-कभी गायब भी दिखता|

नदी के किनारे बना एनटीपीसी का प्लांट जिससे अक्सर खट्ट-पट्ट की आवाजों के साथ आसमान की तरफ उड़ता काला धुआं शहर की तरफ जाता| कभी-कभी बस्ती की तरफ आज जाता| गंदेनाले का नदी मे गिरता पानी एक चमक लिए मिलता रहता फूल मलाए केले के पत्ते भी कभी कबार हिलकोरे लेते हुए पश्चिम से पूर्व की ओर बहे चले जाते केले के पत्ते मे एक मकड़ी थी वह भी पानी प्रवाह का आनंद लेते हुए मौत के गर्क मे जाएगी यह उसे मालूम नहीं था| बस्ती मे रहने वाले जोड़े का भी प्यार परवान चढ़ रहा था| वह दोनों अक्सर शाम सूरज ढलने से पहले उन परछाइयों से खेलने पहुँच जाते कभी-कभी उन बन रही परछाइयों को अपने पैरो से मिटा देते| परछाइयाँ कुछ पल के लिए पानी के हिलकोरे मे गायब हो जाती और उन दोनों के पैरो के ठंडापन का एहसास देती यह एहसास कई सालो से मिल रहा था| वह अक्सर अपने पैरो को पानी के अंदर ड़ाल कर एक दूसरे के पैरो को रगड़ भी देते, पानी को हाथ की हथेलियो से उछालते हुए एक दूसरे के चेहरो को भिंगो देते |

यह कोई नदी का घाट या पार्यटन स्थल नहीं था, न हैं| वह दोनों मौज मस्ती करने के लिए रेतीली मुडेर मे बैठ जाते बस्ती से दूर, वह लड़की सुंदर तो नहीं लेकिन आंखो मे नूर था जो भी उसकी आंखो और पलक मे घुंडी दार उभरी बरौनी को देखते हुए उसकी आंखो मे ऊतर जाता या पालको मे बंद होने का मन भौरे की तरह करता| उसकी उभरी गोला काली आंखे, उभरी बरौनी ऐसे मुड़ी थी की उनमे अगर माचिस की तिली को टिकाते तो वह गिरने का नाम न लेती| लड़का बस उसकी आंखो का दीवाना बन चुका था| वह सिर्फ उन आंखो के दीदार के लिए उसे नदी के किनारे ले जाता और उसके आंखो के नमकीन नीर मे खो जाता| उसे यह तक न मालूम चलता की सामने नदी हैं, अगल-बगल भी कोई आ जा भी रहा हैं| लड़की की मोटी थाइयों मे हाथ जमाए बैठा रहता| सावन के बादल फुहार लिए आए कि अचानक लड़की की तरफ की रेत फिसली और वह नदी मे चली गईं लड़के ने अपने आप को संभालते हुए उसको पकड़ नहीं पाया न जाने कैसे उसकी आँख उसके हाथो मे आ गईं? हाथो मे खून और आँख लड़का घबराया चिल्लाया पर वह उस आँख के चक्कर मे उसे डूबने से नहीं बचा पाया|

चिल्लाता हुआ भागा बस्ती की तरफ वह डूब गई उसे बचाओ, वह डूब रही हैं, मै उसकी आँख को अस्पताल की आई सी यू मे रखा कर आता हूँ आँख खून से लतपथ थी मुट्ठी मे बंद थी वह भाग रहा था चिल्ला रहा था यह कहते उसे बचाओं वह नदी मे डूब रही हैं मै अभी अस्पताल से आता हूँ। बस्ती से दूर रेलवे के पार अस्पताल पहुंचा चीखते चिल्लाते हुए| डॉक्टर भी पागल हो गए यह देख कर यह कैसे हो गया? यह नहीं हो सकता इसमे कोई राज हैं लड़का इसमे? कोई राज नहीं यह मेरी चाहत हैं आप इसे जिंदा रखो मै अभी उसे लेकर आता हूँ| डॉक्टर के सामने रखे कटोरे मे आँख रख दिया इसे आप संभालो मै अभी आया वह भागता हुआ नदी के किनारे गया जहाँ पर बस्ती की परछाई ही नहीं लोग ही लोग जमा थे पुलिस आ चुकी थी उसके जाते ही पुलिस उसे पकड़ कर अपने सवाल दागने लगी, हाथ क्यो नहीं पकड़ा? बाल क्यो नहीं पकड़ा? क्या आँख बंद कर बैठा था? यहाँ... बस्ती से दूर क्यो बैठा था? वह खामोश था सब कुछ उथल पुथल था| नदी मे जाल पड़ चुके पानी मे नाव तैरने लगी रेत का कटाव बढ़ रहा था पानी मे बहाव तेज था|शाम और गहरी हो रही थी लड़की मिली नहीं|

लड़का पुलिस की हथेलियो मे जकड़ा था एक हाथ खून से सना था यह देख उसके प्रेम को भी नकारा जा रहा था लड़की के आंखो कि चर्चा पूरी बस्ती मे फैल चुकी थी| आज यह आँख वाली बस्ती बन गई थी| लड़का पुलिस डॉक्टर तीनो हैरान यह हुआ तो हुआ कैसे? डॉक्टर को यकीन नहीं, यह हो नहीं सकता| पुलिस इसने मर्डर कर उसकी आँख निकाली होगी| लड़का सिर्फ उसकी खून भरी आंखो मे खोया था कई बार पुलिस वाले ने उसको थप्पड़ भी जड़ दिए लेकिन वह अपनी भींगे आसूँओ मे भी उसकी बाहर निकली आँख की परछाई को देखता रहा|

वह उसकी आंखो का कातिल बना किसी जेल के कोने मे बैठा आंखो को ही सोच रहा होगा? अरे हाथ आ जाता, बाल पकड़ लेता, पैर पकड़ कर खीच लेता वही सारे पुलिस के सवाल उसके कानो मे गूंज रहे होगे| जो आँख बचाया भी तो उसको डॉक्टर ने क्या किया होगा? अगर वह आँख किसी के लगी होगी तो वह आँख जरूर जिंदा होगी| हो सकता हैं वह किसी अंधी लड़की के आंखो मे लगी होगी वह कितनी सुंदर लग रही होगी और मै उसकी आँख के कारण कैदी बना बैठा हूँ| तारीखों मे जेल से कोर्ट भी जाता होगा आँख क्या निकली वह शक के घेरे मे आ गया और सजा उम्र कैद की पा गया|

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