ध्यान धर्म नहीं है

14 अक्तूबर 2019   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (455 बार पढ़ा जा चुका है)

ध्यान धर्म नहीं है

ध्यान धर्म नहीं है :

पिछले अध्याय में हम चर्चा कर रहे थे कि भ्रमवश कुछ अन्य स्थितियों को भी ध्यान समझ लिया जाता है | जैसे चिन्तन मनन अथवा सम्मोहन आदि की स्थिति को भी ध्यान समझ लिया जाता है |

किन्तु हम आपको बता दें कि ध्यान न तो चिन्तन मनन है और न ही किसी प्रकार की सम्मोहन अथवा आत्म विमोहन की स्थिति है | ध्यान कोई ऐसा अपरिचित अभ्यास भी नहीं है जिसके कारण आपको अपनी मान्यताओं और संस्कृति को त्यागना पड़े अथवा धर्म परिवर्तन करना पड़े | बल्कि ध्यान स्वयं को प्रत्येक स्तर पर जानने की एक व्यावहारिक, वैज्ञानिक और क्रमबद्ध पद्धति है | ध्यान का सम्बन्ध संसार की किसी संस्कृति अथवा धर्म से नहीं है, बल्कि यह एक शुद्ध और सरल पद्धति है जीवन को गहराई से जानने की और अन्त में प्रकृतिस्थ हो जाने की |

कुछ लोग अपने स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए किसी व्यक्तिगत अभ्यास की प्रक्रिया को “ध्यान” बताकर साधक को दिग्भ्रमित कर देते हैं | किन्तु वास्तव में वे लोग ध्यान का धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ मिश्रण कर देते हैं | जिसका परिणाम ये होता है कि साधक चिन्ता में पड़ जाता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ध्यान के अभ्यास से उसके धार्मिक विश्वासों में बाधा उत्पन्न हो जाएगी अथवा किसी अन्य संस्कृति या धर्म को अपनाना पड़ेगा | ऐसा कुछ भी नहीं है |

धर्म जहाँ सिखाता है कि आपकी धारणाएँ और विश्वास क्या होने चाहियें, वहीं ध्यान सीधा स्वयं को अनुभव करना सिखाता है | धर्म और ध्यान इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच किसी प्रकार का संघर्ष है ही नहीं | पूजा अर्चना धर्म के अंग हैं, जिनके द्वारा दिव्य शक्ति से सम्पर्क साधने का प्रयास किया जाता है | आप एक साथ दोनों ही हो सकते हैं – पूजा अर्चना करने वाले धार्मिक व्यक्ति भी और ध्यान का अभ्यास करने वाले साधक भी | लेकिन ध्यान के अभ्यास के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं कि आप जिस धर्म का पालन कर रहे हैं वही करते रहे अथवा उसे छोड़ दें और कोई नया धर्म अपना लें |

ध्यान का अभ्यास शुद्ध सरल भाव से व्यवस्थित और क्रमबद्ध रीति से करने की आवश्यकता होती है | ध्यान के क्रम में जिन प्रमुख बातों को सीखने की आवश्यकता होती है वे हैं:

· शरीर को किस प्रकार विश्राम कराया जाए |

· ध्यान के लिए किस प्रकार सुविधापूर्ण और स्थिर आसन में बैठना है |

· श्वास की प्रक्रिया को किस प्रकार लयबद्ध और स्थिर करना है |

· मन की गाड़ी में चल रहे विचारों को किस प्रकार शान्तिपूर्वक देखना है |

· अपने विचारों का किस प्रकार निरीक्षण करना है और उनमें से उन विचारों को किस प्रकार उन्नत करना है जो सकारात्मक हैं और आपकी उन्नति में सहायक हैं |

· अच्छी बुरी जैसी भी परिस्थिति है उसमें किस प्रकार केन्द्रस्थ और अविचल रहा जाए |

आगे इन्हीं सब बातों पर विचार किया जाएगा ताकि आपका ध्यान अधिक आनन्ददायक, गहन और प्रभावशाली हो सके | यदि आप ध्यान की समझ, उचित प्रक्रिया और व्यवहार के साथ ध्यान का अभ्यास करते हैं तो आप स्वयं को चुस्त और ऊर्जा से भरा हुआ अनुभव करेंगे |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/10/14/meditation-and-its-practices-10/

अगला लेख: ७ से १३ अक्टूबर तक का साप्ताहिक राशिफल



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 अक्तूबर 2019
पंचमा स्कन्दमाता नवदुर्गा – पञ्चम नवरात्र – देवीके स्कन्दमाता रूप की उपासना सौम्या सौम्यतराशेष सौम्येभ्यस्त्वतिसुन्दरी, परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी |पञ्चमस्कन्दमातेति – देवी का पञ्चम स्वरूप स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है औरनवरात्र के पाँचवें दिन माँ दुर्गा के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है।
02 अक्तूबर 2019
02 अक्तूबर 2019
ध्यान और इसका अभ्यासध्यान की प्रक्रिया और मन्त्र :ध्यान के साधकों को मन को एकाग्र करनेमें सहायता मिले इसके लिए किसी ध्वनि का प्रयोग किया जा सकता है | कभी किसी दृश्य वस्तु पर भी ध्यान केन्द्रित करने का सुझाव दिया जा सकताहै | ध्यान में मस्तिष्क को केन्द्रित करने के लिए जिनध्वनियों का प्रयोग किया जाता
02 अक्तूबर 2019
30 सितम्बर 2019
हिमालयन योग परम्परा के गुरु स्वामी वेदभारती जी की पुस्तक Meditationand it’s practices के कुछ अंश ध्यान के साधकों के लिए...ध्यान क्या हैसम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक समाज मेंलोग उन योग्यताओं में निपुण होते हैं जो अपनी संस्कृति के अनुसार कार्य करने औरजीवन जीने के लिए उपयोगी होती हैं – जैसे: किस तरह वार्
30 सितम्बर 2019
09 अक्तूबर 2019
ध्यानऔर इसका अभ्यासध्यान – खोज मन के भीतर :जीवन का यदि हम स्पष्ट रूप से अवलोकनकरें तो हम पाएँगे कि हमें बचपन से ही केवल बाह्य जगत की वस्तुओं को परखना औरपहचानना सिखाया गया है और किसी ने भी हमें यह नहीं सिखाया कि अपने भीतर कैसेझाँकें, कैसे अपने भीतर खोज करें और कैसे अपने भीतर के उस परम सत्य को जानें |
09 अक्तूबर 2019
30 सितम्बर 2019
हिमालयन योग परम्परा के गुरु स्वामी वेदभारती जी की पुस्तक Meditationand it’s practices के कुछ अंश ध्यान के साधकों के लिए...ध्यान क्या हैसम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक समाज मेंलोग उन योग्यताओं में निपुण होते हैं जो अपनी संस्कृति के अनुसार कार्य करने औरजीवन जीने के लिए उपयोगी होती हैं – जैसे: किस तरह वार्
30 सितम्बर 2019
10 अक्तूबर 2019
मन की वृत्ति :मन की वृत्ति होती हैपुरानी आदतों की लीक से चिपके रहना और उन अनुभवों के विषय में सोचना जो सम्भवतःभविष्य में कभी न हों | मन वर्तमान में, यहीं और इसी समय में जीना नहीं जानता | ध्यानहमें वर्तमान का अनुभव करना सिखाता है | ध्यान की सहायता से जब मन अन्तःचेतना मेंकेन्द्रित हो जाता है तो वह अपन
10 अक्तूबर 2019
04 अक्तूबर 2019
गुरु की आवश्यकता क्यों अज्ञान्तिमिरान्धस्य ज्ञानांजनशलाकयाचक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमःमैं आजकल अपने ब्लॉग पर अपने योग गुरु हिमालयन योग परम्परा के स्वामीवेदभारती जी की पुस्तक “Meditation and it’s practices” का हिन्दी अनुवाद– जो स्वयं स्वामी जी ने मुझ पर कृप
04 अक्तूबर 2019
03 अक्तूबर 2019
शुक्र का तुला राशि में गोचर कल यानी शुक्रवार चार अक्तूबर अश्विनशुक्ल षष्ठी को सूर्योदय से पूर्व पाँच बजकर चौदह मिनट पर तैतिल करण और सौभाग्ययोग में समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीतितथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि का कारकशुक्र मित्र ग्रह
03 अक्तूबर 2019
01 अक्तूबर 2019
ध्यान और इसका अभ्यासहिमालयन योग परम्परा के गुरु स्वामी वेदभारती जी की पुस्तक Meditationand it’s practices के कुछ अंश ध्यान के साधकों के लिए...ध्यान एक प्रक्रिया :---ध्यान की प्रक्रिया में मन से आग्रहकिया जाता है सोचने विचारने, स्मरण करने, समस्याओं का समाधान करने और भूतकाल की घटनाओं अथवा भविष्य की आश
01 अक्तूबर 2019
02 अक्तूबर 2019
ध्यान और इसका अभ्यासध्यान की प्रक्रिया और मन्त्र :ध्यान के साधकों को मन को एकाग्र करनेमें सहायता मिले इसके लिए किसी ध्वनि का प्रयोग किया जा सकता है | कभी किसी दृश्य वस्तु पर भी ध्यान केन्द्रित करने का सुझाव दिया जा सकताहै | ध्यान में मस्तिष्क को केन्द्रित करने के लिए जिनध्वनियों का प्रयोग किया जाता
02 अक्तूबर 2019
06 अक्तूबर 2019
7 से 13 अक्टूबर2019 तक का साप्ताहिकराशिफलनीचे दिया राशिफल चन्द्रमा की राशि परआधारित है और आवश्यक नहीं कि हर किसी के लिए सही ही हो – क्योंकि लगभग सवा दो दिनचन्द्रमा एक राशि में रहता है और उस सवा दो दिनों की अवधि में न जाने कितने लोगोंका जन्म होता है | साथ ही ये फलकथन केवलग्रहों के तात्कालिक गोचर पर आ
06 अक्तूबर 2019
16 अक्तूबर 2019
ध्यान के लिए तैयारियाँ :अब तक बात चल रही थी कि ध्यान कहतेकिसे हैं तथा ध्यान के सम्बन्ध में किस प्रकार के भ्रम हो सकते हैं | अब बात करतेहैं ध्यान के लिए स्वयं को तैयार करने की |ध्यान के अभ्यास में सबसे अधिकमहत्त्वपूर्ण और आवश्यक चरण है ध्यान के अभ्यास के लिए स्वयं को तैयार करना –जिसकी हम प्रायः उपेक्
16 अक्तूबर 2019
12 अक्तूबर 2019
ध्यानऔर इसका अभ्यासकिसी विषय पर मनन करना अथवा सोचनाध्यान नहीं है :चिन्तन, मनन – विशेष रूप से कुछप्रेरणादायक विषयों जैसे सत्य, शान्ति और प्रेम आदिके विषय में सोचना विचारना अर्थात मनन करना – चिन्तन करना – सहायक हो सकता है, किन्तु यह ध्यान की प्रक्रिया से भिन्न प्रक्रिया है | मनन करने में आपअपने मन को
12 अक्तूबर 2019
04 अक्तूबर 2019
सप्तम कालरात्रि नवदुर्गा – सप्तम नवरात्र –देवी के कालरात्रि रूप की उपासनात्रैलोक्यमेतदखिलं रिपुनाशनेन त्रातंसमरमूर्धनि तेSपि हत्वा ।नीता दिवं रिपुगणाभयमप्यपास्तमस्माकमुन्मदसुरारि भवन्न्मस्ते ।।देवी का सातवाँ रूप कालरात्रि है | सबका अन्त करने वाले कालकी भी रात्रि अर्थात् विनाशिका होने के कारण इनका ना
04 अक्तूबर 2019
03 अक्तूबर 2019
ध्यान और इसका अभ्यासध्यान कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं :जिस प्रकार पर्वतारोहण के समय पर्वतके उच्च शिखर तक पहुँचने के लिए सम्भव है कई मार्ग मिल जाएँ, किन्तु लक्ष्य सबकाएक ही होता है – पर्वत के शिखर तक पहुँचना | उसी प्रकार ध्यान की भी अनेकोंपद्धतियाँ हो सकती हैं जो देखने में परस्पर भिन्न प्रतीत हों, किन्
03 अक्तूबर 2019
05 अक्तूबर 2019
नवरात्र और कन्या पूजनशारदीय नवरात्र हों या चैत्र नवरात्र – माँ भगवती को उनके नौ रूपोंके साथ आमन्त्रित करके उन्हें स्थापित किया जाता है और फिर कन्या अथवा कुमारी पूजनके साथ उन्हें विदा किया जाता है | कन्या पूजन किये बिना नवरात्रों की पूजा अधूरीमानी जाती है | प्रायः अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन का विधा
05 अक्तूबर 2019
03 अक्तूबर 2019
ध्यान और इसका अभ्यासध्यान कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं :जिस प्रकार पर्वतारोहण के समय पर्वतके उच्च शिखर तक पहुँचने के लिए सम्भव है कई मार्ग मिल जाएँ, किन्तु लक्ष्य सबकाएक ही होता है – पर्वत के शिखर तक पहुँचना | उसी प्रकार ध्यान की भी अनेकोंपद्धतियाँ हो सकती हैं जो देखने में परस्पर भिन्न प्रतीत हों, किन्
03 अक्तूबर 2019
30 सितम्बर 2019
हिमालयन योग परम्परा के गुरु स्वामी वेदभारती जी की पुस्तक Meditationand it’s practices के कुछ अंश ध्यान के साधकों के लिए...ध्यान क्या हैसम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक समाज मेंलोग उन योग्यताओं में निपुण होते हैं जो अपनी संस्कृति के अनुसार कार्य करने औरजीवन जीने के लिए उपयोगी होती हैं – जैसे: किस तरह वार्
30 सितम्बर 2019
16 अक्तूबर 2019
ध्यान के लिए तैयारियाँ :अब तक बात चल रही थी कि ध्यान कहतेकिसे हैं तथा ध्यान के सम्बन्ध में किस प्रकार के भ्रम हो सकते हैं | अब बात करतेहैं ध्यान के लिए स्वयं को तैयार करने की |ध्यान के अभ्यास में सबसे अधिकमहत्त्वपूर्ण और आवश्यक चरण है ध्यान के अभ्यास के लिए स्वयं को तैयार करना –जिसकी हम प्रायः उपेक्
16 अक्तूबर 2019
30 सितम्बर 2019
तृतीया चंद्रघंटा नवदुर्गा – तृतीय नवरात्र- देवी के चंद्रघंटा रूप की उपासनादेव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या,निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या |तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्यानताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ||कल आश्विन शुक्ल तृतीया है – तीसरा नवरात्र - देवी केचन्द्रघंट
30 सितम्बर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x