रेल निजीकरण (एक व्यंग कथा)

15 अक्तूबर 2019   |  इंजी. बैरवा   (437 बार पढ़ा जा चुका है)

रेल निजीकरण (एक व्यंग कथा)

रेलवे में निजीकरण होने के पर, रेलवे टिकट खिड़की पर ...

ग्राहक यात्री : सर दिल्ली से लखनऊ का एक रिजर्व टिकट चाहिए ।

क्लर्क : 750/-

ग्राहक : पर पहले तो 400/- था !!

क्लर्क : सोमवार को 400/- है, मंगल बुध गुरु को 600/- शनिवार को 700/- तुम रविवार को जा रहे हो तो 750/-

ग्राहक : ओह ! अच्छा लोवर दीजियेगा, पिताजी को जाना है ।

क्लर्क : फिर 50 रुपये और लगेंगे ।

ग्राहक : अरे ! लोवर के अलग ! साइड लोवर दे दीजिए ।

क्लर्क : उसके 25 रुपये और लगेंगे ।

ग्राहक : हद है ! न टॉयलेट में पानी होता है, न कोच में सफ़ाई, किराया बढ़ता जा रहा है ।

क्लर्क : टॉयलेट यूज का 50 रुपये और लगेगा, शूगर तो नहीं है ना ? 24 घंटे में 4 बार यानी रात भर में 2 बार से ज़्यादा जाएंगे तो, हर बार 10 रुपये एक्स्ट्रा लगेंगे ।

ग्राहक : हैं ! और बता दो भाई, किस-किस बात के पैसे लगने हैं अलग से ।

क्लर्क : देखो भाई, अगर फोन चार्ज करोगे तो 10 रुपये प्रति घंटा, अगर खर्राटे आएंगे तो 25 रुपये प्रति घंटा,और अगर किसी सुन्दर महिला के पास सीट चाहिए तो 100 रुपये का अलग चार्ज है ।

अगर कोई महिला आसपास कोई खड़ूस आदमी नहीं चाहती है, तो उसे भी 100 रूपये अलग से देना पड़ेगा । एक ब्रीफकेस प्रति व्यक्ति से अधिक लगेज पर, 20 रुपये प्रति लगेज और लगेगा । मोबाइल पर गाना सुनने की परमिशन के लिए 25 रुपये एक मुश्त अलग से । घर से लाया खाना खाने पर 20 रुपये का सरचार्ज़ । उसके बाद अगर प्रदूषण फैलते हैं तो 25 रुपये प्रदूषण शुल्क ।

ग्राहक(सर पकड़ के) : ग़ज़बै है भाई, लेकिन ई सब वसूलेगा कौन ?

क्लर्क : अरे भाई निजी कंपनियों से समझौता हुआ है, उनके आदमी वसूलेंगे ।

ग्राहक : एक आख़िरी बात और बता दो यदि तुम्हें अभी कूटना हो तो कितना लगेगा ?

क्लर्क : काहे भाई ! जब रेलवे का निजीकरण हो रहा तब तो बड़े आराम से घर में बैठे थे और सोच रहे थे कि हमारा तो कुछ होने वाला है नहीं अब भुगतो

औऱ पब्लिक क्या सोचती है निजीकरण का असर सिर्फ कर्मचारियों पर होगी । ....रेल का निजीकरण हर भारतीय पर असर डालेगा ।

( ट्रेन की गड़गड़ाहट से यात्री की नींद खुल गई और निजीकरण व्यवस्था नहीं बल्कि पुनः रियासतीकरण है... ऐसा कुछ बुदबुदाते हुए पुनः सो गया ।)

[ नोट : तेजस एक्सप्रेस भारत की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन बन चुकी है, जो लखनऊ से दिल्ली और दिल्ली से लखनऊ तक चलेगी । अगर ये सफल रही तो आगे भी इसी तरह की ट्रेन और लाई जाएगी । रेलवे विभाग अब तक सरकारी हुआ करता था, जिसे अब धीरे-धीरे प्राइवेट बनाया जा रहा है । अभी लखनऊ-दिल्ली के बीच ट्रेन शुरु हुई है लेकिन धीरे-धीरे इसे पूरे भारत में लाने में देर नहीं लगेगी । ट्रेन-हॉस्टेस, साफ-सफाई, वाई-फाई, कैमरे इत्यादि की सुविधा आपको पहले लुभाने के लिए दी जायेगी और धीरे-धीरे कब वो सरकारी से प्राइवेट हो जाएगी, यह किसी को पता भी नहीं चलेगा... । वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग जन और अन्य रियायतें कितने समय तक जारी रहेगी या नहीं, फिलहाल स्पष्ट नहीं है । खैर परिणाम कुछ भी हो किन्तु यह सत्य है कि, वर्तमान परिस्थितियों में इस निजीकरण को रोकना आसान भी नहीं है । ]

चलिए ... यात्रा का मजा लीजिए ... धन्यवाद ...

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रेणु
15 अक्तूबर 2019

आदरणीय बैरवा जी , आपके लेखन का ये रंग देखकर आछा लगा | रेल व्यवस्था पर सटीक व्यंग है | लगता है भविष्य में निजीकरण से ये सस्ती सवारी सबसे मंहगी होने वाली है | जैसे सड़कों पर जितना गाडी के तेल में खर्च नहीं होते | , उससे ज्यादा टोल टेक्स में जेब कट जाती है |

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