Karva Chauth 2019- जानिए कैसे और कब शुरू हुआ यह व्रत, व्रत की पूजा विधि, शुभ महूर्त

17 अक्तूबर 2019   |  दैनिक राशिफल   (436 बार पढ़ा जा चुका है)

Karva Chauth 2019- जानिए कैसे और कब शुरू हुआ यह व्रत, व्रत की पूजा विधि, शुभ महूर्त

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओ के लिए बहुत खास होता है। यह व्रत हर साल कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आता है। इस साल यह व्रत गुरूवार 17 अक्टूबर को आ रहा है। करवा चौथ वाले दिन महिलाये पति की लम्बी आयु के लिए पुरे दिन निर्जला व्रत करती है। रात को जब चाँद निकलता है तब चाँद की पूजा कर, छलनी से पति को देखकर, पूजा करती है फिर पति के हाथ से पानी पीकर इस व्रत को पूर्ण करती है। इस व्रत में शिव पार्वती,कार्तिक,करवाचौथ माता की पूजा की जाती है।

आईये जानते है की यह करवाचौथ का व्रत क्यों मानते है, यह परम्परा कब और कैसे शुरू हुई।
1. प्राचीन कथा के अनुसार करवाचौथ की परम्परा देवता से चली आ रही है। एक बार देवताओ और दानवो में युद्ध हो रहा था। उस युद्ध में देवताओ की हार हो रही थी, सभी देवताओ में भय हो रहा था। कुछ उपाय समझ नहीं आ रहा था तो सभी देवता ब्रह्मदेव के पास गए उनसे विनती करने लगे की आप हमारी रक्षा करे। तब ब्रह्मदेव ने इस संकट से देवता को बचाने के लिए देवताओ की पत्नियों से कहा की आप सब सच्चे दिल से अपने पतियों की लम्बी आयु के लिए व्रत करे। यह व्रत करने से देवताओ की विजय होगी।

ब्रह्मदेव के सुझाव से अनुसार सभी देवताओ की पत्नियों ने ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार किया। ब्रह्मदेव के कहे अनुसार कार्तिक माह की चतुर्थी को सभी देवताओ की पत्नियों ने यह व्रत रखा। उनके यह व्रत करने से सभी देवताओ की विजय हुई, यह सुनकर सभी देव पत्नियों ने व्रत खोला और खाना खाया उस समय आकाश में चाँद भी निकल आया था। ऐसा माना जाता है की इसी दिन से इस व्रत की परम्परा शुरू हुई।

2. एक मान्यता यह भी है की भगवान् कृष्ण ने द्रोपती को भी यह व्रत करने को कहा था। करवाचौथ की कथा सुनाते हुआ कहा की यह व्रत श्रद्धा, विधि-पूर्वक करने से समस्त दुख दूर हो जाते है और जीवन में ख़ुशी और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। भगवान् कृष्ण की आज्ञा मानकर द्रोपती में यह व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से पांडवो ने कोरवो को पराजित कर विजय हासिल की।

दैनिक राशिफल


पूजा विधि :-
करवाचौथ की पूजा करने के लिए सबसे पहले सम्पूर्ण शिव परिवार, श्री कृष्ण को विराजमान करें। गणेश जी को पीले फूलों की माला, केले चढ़ाये। भगवान् शंकर पार्वती जी की बिल पत्र और श्रंगार की सामग्री अर्पित करे। मिटटी के कर्वे पर रोली का स्वस्तिक बनाएं। कर्वे में दूध, जल और गुलाबजल मिलाकर रखें और रात को छलनी के प्रयोग से चांद को देखें और चांद को अर्घ्य दें. इस दिन करवा चौथ की कथा कहनी या फिर सुननी आवश्यक होता है, जिसके बिना यह व्रत अधूरा होता है.

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ के दिन उपवास का समय- 13 घंटे 56 मिनट
चांद के निकलने का समय- रात 8.18

Karva Chauth 2019- जानिए कैसे और कब शुरू हुआ यह व्रत, व्रत की पूजा विधि, शुभ महूर्त

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