जीवन का आनन्द

20 अक्तूबर 2019   |  हर्षित कृष्ण शुक्ल   (455 बार पढ़ा जा चुका है)

*💐 श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम 🌹*

☘🌳☘🌳☘🌳☘🌳

*जय श्रीमन्नारायण*

*जय श्री सीताराम*

🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚


*जीवन के विविध रंग*

🌲🌷🦜🌳🌷☘🦚☘💐🌹


जीवन और मृत्यु यह दोनों परस्पर मानव जीवन की अभिन्न अंग है दोनों का संबंध परस्पर जुड़ा हुआ है जीवन का उपभोग वैसे तो मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षी कीड़े मकोड़े जानवर आदि भी करते हैं परंतु सच्चा सुख विरले लोगों को प्राप्त होता है जीवन का अभिन्न प्रसंगों में भिन्न-भिन्न रूपों में इस प्रकार अभिव्यक्ति होता है आइए देखते हैं वर्षा की रिमझिम में आम की डाली पर फुदकती कोयल ऐसा लगता है जैसे मन ही मन कहती है जीवन कुछ नहीं बस आनंद ही आनंद है दूसरी ओर टूटे घोसले को पुनः बसाती जीवन तो बस संग्राम है वर्षा से सराबोर एक कुत्ता पिंजरे में बंद तोते को देखकर कहता है गुलामी मौत है और आजादी जीवन वर्षा की रात्रि में बहुत प्रयत्न करने पर भी जब निर्धन कृषक अपनी झोपड़ी का छप्पर ठीक नहीं कर पाता और अपनी पत्नी अपने बच्चों को आश्रय देने में असमर्थता महसूस करता है तो वह कहीं उठता है जीवन एक निष्फल परिश्रम है ऐसी ही तो खिड़की से आती हुई वर्षा की फुहारों से भीगे दामन कहता है जीवन फूलों की सेज है लेकिन प्यारे जीवन वास्तव में क्या है खाना पीना परिश्रम संघर्ष समाज परिवार जन्म मृत्यु यह सब तो पशु पक्षी कीड़े मकोड़े सभी का कार्य है सभी एक जीवन जीते हैं लेकिन वास्तविक जीवन क्या है यह जानने के लिए संतों की शरण में जाकर नारायण की सेवा में मन को लगाती हुई है उनके चरणों की वंदना करते हुए जो आनंद प्राप्त होता है उनके दर्शन करते हुए जो सुख होता है नैनो की प्राप्ति होती है आत्मिक शांति होती है यही तो जीवन है यही आनंद है इसीलिए ईश्वर को सच्चिदानंद कहा जाता है ध्यान दें हर चीज का विलोम है हर शब्द का विलोम है लेकिन आनंद का कोई विलोम नहीं है इसलिए माता कुंती ने भगवान से मांगने का नंबर आया तो दुख मांगे क्योंकि दुख ही एक ऐसा है जो बार-बार ईश्वर की याद दिलाता है जब दुख होता है तो व्यक्ति को यही याद आता है कि मैं ईश्वर नहीं हूं उसका अहम जाता रहता है अन्यथा वह अहंकार से भर कर अपने आप को ही ईश्वर मान लेता है तभी जीवन कंटक में बन जाता है अगर जीना है तो आनंद पूर्ण जीवन जीवन आनंद से रहो विविध रंगों के रूप में जीवन को जीते हुए आनंद स्वरूप बना लो नारायण स्वरूप बना लो प्रभु के चरणों में मन लगा लो यही निवेदन है

*जय जय श्रीमन्नारायण जय जय श्री सीताराम*

*आचार्य*

*हर्षित कृष्ण शुक्ला*

*प्रवक्ता*

*श्रीमद् भागवत कथा एवं संगीतमय श्रीराम कथा*

*लखीमपुर खीरी*

*( उत्तर प्रदेश)*

अगला लेख: सन्त का स्वभाव



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 नवम्बर 2019
मा
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम* 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 *जय श्रीमन्नारायण*🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚 *जीवन रहस्य*🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 यह जीवन परमपिता परमेश्वर ने कृपा करके हमें प्रदान किया जिसे पाने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं जितने भी सजीव शरीर हैं उनमें मानव शरीर की महत्ता सबसे अधिक
02 नवम्बर 2019
22 अक्तूबर 2019
क्
🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *श्री राधे कृपा ही सर्वस्वम*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *जय श्रीमन्नारायण जय जय श्री सीताराम* 🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵 *सुखी जीवन के लिए क्षमा करना सीखें* सामाजिक जीवन में राग के कारण लोग एवं काम की तथा द्वेष के कारण क्रोध एवं पैर की वृत्तियों का संचार होता है क्रोध के लिए संघर्ष कल
22 अक्तूबर 2019
01 नवम्बर 2019
माँ माना शक्ति दादी :- भारतवर्ष के राजस्थान राज्य में हर प्रान्त में दैविक शक्ति से सम्पन महापुरुष वीर,एवं भक्त हुए हैं जो धर्म रक्षक एवं जीव रक्षक रहें हैं जिनको राजस्थान के लोकदेवता के रूप में पूजा जाता हैं । जैसे रामदेवजी,जाम्भोज
01 नवम्बर 2019
26 अक्तूबर 2019
जी
जीवन एक रास्ते जैसा लगता है मैं चलता जाता हूँ राहगीर की तरह मंजिल कहाँ है कुछ पता नहीं रास्ते में भटक भी जाता हूँ कभी-कभीहर मोड़ पर डर लगता है कि आगे क्या होगा रास्ता बहुत पथरीला है और मैं बहुत नाजुक दुर्घटनाओं से खुद को बचाते हुए घिसट रहा हूँ जैसे पर रास्ता है कि ख़त्म होने का नाम नहीं लेता कब तक और
26 अक्तूबर 2019
15 अक्तूबर 2019
गु
🏵💐🌼🌹🏵💐🌼🌹🏵💐🌼🌹🏵💐🌼🌹 *श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम*🌼🌹🌼🌹🌼🌹🌼 *जय श्रीमन्नारायण* सभी मित्रों को की श्री सीताराम -------------- आज जीवन में ना जाने कितने उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और अक्सर देखा जाता है की एकता अत्यधिक चिंता ग्रस्त होकर अपने जीवन को समाप्त करने तक की योजना
15 अक्तूबर 2019
13 अक्तूबर 2019
जी
*🌹श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम🌷* *जय श्रीमन्नारायण* *जय श्री राधे राधे* समस्त मित्रों को शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं आज बड़ा ही पावन दिवस है भागवत जी के अनुसार आज के ही दिन भगवान श्री राधाबल्लभ सरकार ने रासलीला का आयोजन किया यह लीला आज के ही दिन हुई और कहते हैं इस दिन चंद्र देव ने
13 अक्तूबर 2019
24 अक्तूबर 2019
🌹🏵🌹🏵🌹🏵🌹🏵 *जय श्रीमन्नारायण**श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम*💐🌷💐🌷💐🌷💐🌷 *सन्त का स्वभाव एवं गुण*🌲🌳🌲🌳🌲🌳🌲🌳🌲 मनुष्य इस जीवन में सदैव अनुकूलता को चाहता है पर प्रतिकूलता नहीं चाहता यह उसकी कायरता है अनुकूलता को चाहना ही खास बंधन है इसके सिवाय और कोई बंधन नहीं इस चाहना को मिटाने के
24 अक्तूबर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x