हाल ए दर्द

22 अक्तूबर 2019   |  pradeep   (3877 बार पढ़ा जा चुका है)

आसमां वाले को जो सुनाया हाल-ए-दर्द अपना,

ज़मीं पर ज़िन्दगी कुछ और मुश्किल हो गई.

शायद दर्द में कुछ कमी नज़र आई उसको,

अब तो बेहाल यूँ अपनी ज़िंदगी हो गई .

बताया उसको था उन बिन ना मैं जी सकूंगा,

उसके बाद वो हमसे और भी दूर हो गई, (आलिम)

अगला लेख: दर्दे-इश्क



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
14 अक्तूबर 2019
कु
चलते-चलते कह दिया था उनसे कुछ, ना जाने क्या समझे कर गए ऐसा कुछ. डरता हूँ कहने से फिर न समझ ले कुछ, फिर ना कर दे वो ऐसा कि मैं रहूं ना कुछ. (आलिम)
14 अक्तूबर 2019
14 अक्तूबर 2019
कु
हिन्दुस्तान की एक ख़ासियत है कि यहाँ के लोग बहुत कुछ जानते, यानी दुनियां के लोगो से ज्यादा. इतिहास से लेकर विज्ञान तक सब जानते है. एक गाना था " कुछ लोग जो ज्यादा जानते है इंसान को कम पहचानते है ये पूर्व है पूर्व वाले हर जान क
14 अक्तूबर 2019
14 अक्तूबर 2019
इं
इंतज़ार करता रहा और शाम हो गई, ना जाने उनके आने में क्यों देर हो गई. बाकी है कुछ लम्हे यूँही ना गुज़र जाये,आने तक तेरे जिंदगी की ना रात हो जाए. (आलिम)
14 अक्तूबर 2019

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x