वकीलों का कत्ल प्रदेश - वेस्ट यू पी

24 अक्तूबर 2019   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (418 बार पढ़ा जा चुका है)

कैराना कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता गुलजार की कल शाम अज्ञात बाईक सवारों ने उस समय हत्या कर दी जब वे अपने मुन्शी सचिन के साथ अपने गाँव सिक्का वापस जा रहे थे. हत्या के कारण में उनके भाई का अपनी पत्नी से विवाद सामने आ रहा है जिसमें मृतक अधिवक्ता गुलजार पैरवी कर रहे थे.

यह अधिवक्ता की हत्या का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी हाल ही में कोई पहला मामला नहीं है बल्कि अगर कहा जाए कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश अधिवक्ताओं के लिए कत्ल प्रदेश बन गया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

12 जून 2019 अधिवक्ता दरवेश यादव की गोली मारकर हत्या: उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष यादव की आगरा के दीवानी कचहरी के परिसर के भीतर बुधवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जहां वह रविवार को यूपी बार काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में अपने चुनाव के बाद समारोह में भाग लेने गई थी. सत्कार समारोह के तुरंत बाद, यादव वरिष्ठ वकील अरविंद मिश्रा के कक्ष में गई , जहाँ उनके दोस्त मनीष शर्मा आए और अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारने से पहले उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। जब यह हादसा हुआ उस समय यादव समर्थकों और अन्य वकीलों के साथ चैंबर जाम था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यादव के साथ उसके रिश्तेदार मनोज यादव भी थे।

15 अक्टूबर 2019 मुजफ्फरनगर में अधिवक्ता समीर सैफी के अपहरण व हत्या के आरोप में चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। चारों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जिनकी निशानदेही पर गांव सीकरी के जंगल से मिट्टी में दबी अधिवक्ता के शव को बरामद कर लिया गया। कड़ी सुरक्षा में शव को सरवट कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।

18 अक्टूबर 2019 मेरठ के कमालपुर गांव में शुक्रवार रात को वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर फरार हो गए। उन्हें आनंद अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ताओं और ग्रामीणों ने आनंद अस्पताल में पुलिस अधिकारियों को घेराव किया। कई घंटे तक शव का पंचनामा नहीं भरने दिया।

इतना आसान होता जा रहा है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वकीलों को मौत के घाट उतारा जाना कि जिसके भी दिमाग में अपने विरोधी की सशक्त पैरवी दिखाई दे, या फिर एक अधिवक्ता के तौर पर अपने विरोधी का रुतबा या प्रभाव दिखाई दे या फिर अपने गलत इरादों की सफलता में अधिवक्ता की काबिलियत रोड़ा दिखाई दे तो उसे निबटाने में अपराधी को कोई दिक्कत नहीं आती है क्योंकि एक बात सभी जानते हैं कि वकील दूसरों को न्याय दिलाने के लिए लड़ते हैं लेकिन दुर्भाग्य वश अगर खुद अपराध का शिकार हो जाएं तो उन्हें न्याय नहीं मिलता है क्योंकि उनके कत्ल का राज़ राज ही बनकर रह जाता है कुछ पुलिस के लीपापोती किए जाने के कारण तो कुछ प्रदेश सरकार की वकीलों के प्रति उदासीनता को लेकर.

12 जून 2019 को जब उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की पहली महिला अध्यक्ष दरवेश यादव जी की हत्या हुई तभी उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के वर्तमान अध्यक्ष श्री हरिशंकर सिंह जी द्वारा अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षा की मांग की गई थी किन्तु तब से लेकर अब तक इस संबंध में योगी सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया और ऐसा तब है जब विक्की त्यागी जैसे अपराधी का मर्डर भरी कोर्ट में हो जाता है. न्यायालय में वकीलों की सुरक्षा के लिए यह सरकार कितनी गंभीर है इसका पता कोर्ट में रहने वाले वकीलों को भली भांति है. जहां न्यायिक अधिकारी ही बगैर पुलिस सुरक्षा के दिखाई दे जाएं जो कि किसी भी जगह पर संख्या में अधिक से अधिक 10-12 होते हैं वहां हजारों की संख्या में मौजूद अधिवक्ताओं के लिए प्रदेश सरकार इस संबंध में कुछ सोच भी मन में लाएगी ऐसा ख्याल भी दिमाग में लाना पाप है इसलिये अब तो ये साफ हो गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश साध्वी प्राची के अनुसार मिनी पाकिस्तान बना हो या ना बना हो किन्तु यहां के वकीलों के लिए कत्ल प्रदेश ज़रूर बन गया है.

कुमारी शालिनी कौशिक एडवोकेट

(कौशल)




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डॉ. शिखा कौशिक
24 अक्तूबर 2019

एकदम सही लग तो ऐसा ही रहा है

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