अन्नकूट :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

28 अक्तूबर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (449 बार पढ़ा जा चुका है)

अन्नकूट :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन पा करके मनुष्य लंबी आयु जीता है | जीवन को निरोगी एवं दीर्घ जीवी रखने के लिए मनुष्य की मुख्य आवश्यकता है भोजन करना | पौष्टिक भोजन करके मनुष्य एक सुंदर एवं स्वस्थ शरीर प्राप्त करता है | मानव जीवन में भोजन का क्या महत्व है इसको बताने की आवश्यकता नहीं है , नित्य अपने घरों में अनेकों प्रकार के पकवान बनाकर मनुष्य उनका स्वाद लेता है , परंतु सनातन धर्म मे इन पकवानों का महत्व आज अन्नकूट अर्थात गोवर्धन पूजा के दिन दिखाई पड़ता है | सनातन धर्म में छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करने की व्यवस्था बताई गई है जिसे छप्पन भोग कहा जाता है | द्वापर युग में जब भगवान श्याम सुंदर कन्हैया ने सात दिन तक लगातार गोवर्धन को अपनी उंगली पर धारण कर रखा तब ब्रज वासियों ने गोवर्धन की पूजा करके छप्पन प्रकार के व्यंजनों से उनका भोग लगाया | मैया यशोदा का मानना था कि श्याम सुंदर कन्हैया आठों पहर माखन खाते थे सात दिन लगातार बिना भोजन - पानी के रहने वाले कन्हैया को आठ प्रहर नित्य के अनुपात में छप्पन प्रकार के व्यंजन बना करके अर्पित किए गए | इन छप्पन प्रकार के व्यंजनों में कोई भी ऐसा व्यंजन नहीं बचा जो कि मानव जीवन से विलग हो | कहने का अर्थ है कि सनातन धर्म की यह दिव्यता है कि यहां सब कुछ प्राप्त हो सकता है आवश्यकता है उसको जानने एवं समझने की | जब संसार में कोई भी इनके विषय में नहीं जानता था तब सनातन धर्म ने छप्पन प्रकार के भोग की व्यवस्था बनाई , इससे इस बात पता चलती है कि सनातन शाश्वत क्यों कहा जाता है |*


*आज हम जिस युग में जीवन यापन कर रहे हैं उसे आधुनिक युग कहा जाता है | आज मनुष्य ने बहुत प्रगति कर ली है | समुद्र की गहराइयों से लेकर की चंद्रमा के धरातल तक पहुंचने वाला मनुष्य आज स्वयं को विकसित एवं विकासशील मानने लगा है , परंतु यदि एक पढ़े-लिखे व्यक्ति से पूछ लिया जाए कि छप्पन प्रकार के व्यंजनों के नाम बता दो तो शायद नहीं बता पाएगा , क्योंकि आज शिक्षा तो ग्रहण की जा रही है परंतु अपने सनातन की मान्यताओं परंपराओं को जानने का प्रयास नहीं किया जा रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज के युवा एवं युवतियों को देख रहा हूं घर का बना हुआ पौष्टिक भोजन को अनदेखा करके बाजार में उपलब्ध बर्गर , पिज्जा , चाऊमीन आदि घातक खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन कर रहे हैं | हमारे ग्रंथों में जिन छप्पन व्यंजनों का वर्णन किया गया है उनमें से एक व्यंजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है , परंतु आज ना तो उनके विषय में जानने की जिज्ञासा है और ना ही युवतियां उनको बनाना ही जानती हैं | आज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अनेक खाद्य पदार्थ बाजार में उपलब्ध है जिनको खा करके मनुष्य स्वयं को रोगी बना रहा है | अन्नकूट का पर्व यह संदेश देता है कि मनुष्य को सदैव पौष्टिक एवं सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो अन्नकूट का पर्व मनाने का कोई औचित्य नहीं है |*


*आधुनिकता के साथ चलना कदापि गलत नहीं है परंतु आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सनातन परंपराओं का भी ध्यान रखना परम आवश्यक है |*

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