मन का लगाव :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

31 अक्तूबर 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (420 बार पढ़ा जा चुका है)

मन का लगाव :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य इस धरा धाम पर जन्म लेकर के जीवन भर अनेकों कृत्य करते हुए अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करता है | इस जीवन अनेक बार ऐसी स्थितियां प्रकट हो जाती है मनुष्य किसी वस्तु , विषय या किसी व्यक्ति के प्रति इतना आकर्षित लगने लगता है कि उस वस्तु विशेष के लिए कई बार संसार को भी ठुकराने का संकल्प ले लेता है | आखिर यह मन किसी के प्रति इतना आकर्षित क्यों और कैसे हो जाता है ? यह स्वयं में एक रहस्य है | किसी के प्रति लगाव क्यों और कैसे उत्पन्न हो जाता है कभी-कभी मनुष्य स्वयं नहीं जान पाता | यही आकर्षण के सिद्धांत का रहस्य है | हमारे मनीषियों का मन के ऊपर बहुत ही विस्तृत वर्णन पढ़ने को प्राप्त होता है | किसी के प्रति लगाव या आकर्षण ऐसे ही नहीं पैदा हो जाता है , यह स्थिति प्रकट होने का एक विशेष कारण यह होता है कि मनुष्य जिस विषय , वस्तु या व्यक्ति के प्रति बारंबार अपने मन में चिंतन करता है , दिन रात उसी के विषय में विचार किया करता है तो उस व्यक्ति विशेष , विषय विशेष या वस्तु विशेष से उसका सहज लगाव हो जाता है | आकर्षण और लगाव का एक रहस्य यह भी कि किसी के प्रति यह लगाव या आकर्षण यदि सकारात्मक होता है तो मनुष्य नित्य नई उर्जा प्राप्त करते हुए उन्नति के पथ पर अग्रसर हो जाता है , परंतु यही लगाव जब नकारात्मकता का लबादा ओढ़कर के मन में घूमा करता है तो मनुष्य का पतन प्रारंभ हो जाता है | किसी के प्रति मन में उत्पन्न हुए प्रेम का सहज कारण यह आकर्षण ही होता है | मन का लगाव कब किससे हो जाएगा यह शायद मन भी नहीं जानता | मनुष्य को संचालित करने की शक्ति रखने वाला मन कभी-कभी इस आकर्षण के चक्रव्यूह में फंसकर इतना विवश हो जाता है कि इससे निकलने का मार्ग नहीं ढूंढ पाता | इससे निकलने का एक ही मार्ग है कि उस व्यक्ति या वस्तु के विषय में सोचना बंद कर दिया जाए अन्यथा जब बार-बार किसी का चिंतन किया जाएगा तो यह मन चुंबक की भांति उसी और दौड़ता रहेगा |*


*आज इस आकर्षण और लगाओ का अर्थ ही बदल कर रह गया है | आज समाज में जिस प्रकार का वातावरण देखा जा रहा है उसके अनुसार मनुष्य का लगाव आत्मिक कम शारीरिक ज्यादा ही दिखाई पड़ रहा है | आज अधिकतर लोग किसी के शारीरिक आकर्षण के जाल में फस कर के स्वयं की मर्यादा एवं पद को भी भूलने को तैयार है | बड़े-बड़े ज्ञानी - ध्यानी मन के इस रहस्य को समझ पाने में असफल ही रहे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" सद्गुरुओं से अब तक प्राप्त ज्ञानप्रसाद के आधार पर यह कह सकता हूं कि मन बड़ा चंचल होता है इसको सदैव एक बिगड़े हुए घोड़े की तरह लगाम लगा कर रखना ही उचित है | प्राय: लोग बाबा तुलसीदास जी की एक चौपाई का उद्धरण देते हैं कि बाबा जी ने लिखा है :- कलि कर एक पुनीत प्रतापा ! मानस पुण्य होंहिं नहिं पापा !! लोग तर्क देते हैं कि कलयुग में मन से किए हुए पाप का फल नहीं मिलता है | परंतु विचार कीजिए यदि बार-बार मन को पाप की ओर जाने की छूट दे दी जाएगी , पाप के प्रति आकर्षित होने दिया जाएगा तो मानसिक पाप धरातल पर उतरने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगेगा | इसलिए मन का लगाव सकारात्मक एवं नियंत्रित होना चाहिए | यद्यपि कभी-कभी इस पर मनुष्य का बस नहीं रह जाता है परंतु विवश हो जाने के बाद भी मनुष्य को धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए |*


*किसी के विषय में कब , क्यों और कैसे यह मन आकर्षित हो गया यह जान पाना कठिन भी नहीं है | जब मनुष्य बार-बार किसी का चिंतन करेगा तो उसके प्रति लगाव और आकर्षण स्वमेव बढ़ ही जाता है |*

अगला लेख: नारी का त्याग / अहोई अष्टमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
19 अक्तूबर 2019
*हमारा देश भारत आध्यात्मिक सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से आदिकाल से ही सर्वश्रेष्ठ रहा है | संपूर्ण विश्व भारत देश से ही ज्ञान - विज्ञान प्राप्त करता रहा है | संपूर्ण विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां समय-समय पर ईश्वरीय शक्तियों ने अवतार धारण किया जिन्हें भगवान की संज्ञा दी गई | भगवान धरा धा
19 अक्तूबर 2019
08 नवम्बर 2019
*पंचतत्त्वों से बने मनुष्य को इस धरा धाम पर जीवन जीने के लिए मनुष्य को पंचतत्वों की आवश्यकता होती है | रहने के लिए धरती , ताप के लिए अग्नि , पीने के लिए पानी , सर ढकने के लिए आसमान , एवं जीवित रहने के लिए वायु की आवश्यकता होती है | मनुष्य प्रत्येक श्वांस में वायु ग्रहण करता है | श्वांस लेने के लिए
08 नवम्बर 2019
28 अक्तूबर 2019
*कार्तिक माह में चल रहे "पंच महापर्वों" के चौथे दिन आज अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा | भारतीय सनातन त्योहारों की यह दिव्यता रही है कि उसमें प्राकृतिक , वैज्ञानिक कारण भी रहते हैं | प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे हुए सनातन धर्म के त्योहार आम जनमानस पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ते हैं
28 अक्तूबर 2019
02 नवम्बर 2019
*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य अपने संपूर्ण जीवन काल में अनेकों मित्र एवं शत्रु बनाता है | वैसे तो इस संसार में मनुष्य के कर्मों के अनुसार उसके अनेकों शत्रु हो जाते हैं जिनसे वह युद्ध करके जीत भी आता है , परंतु मनुष्य का एक प्रबल शत्रु है जिससे जीत पाना मनुष्य के लिए बहुत ही कठिन होता है | वह
02 नवम्बर 2019
24 अक्तूबर 2019
*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार भागों में विभक्त करते हुए इन्हें आश्रम कहा गया है | जो क्रमश: ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , सन्यास एवं वानप्रस्थ के नाम से जाना जाता है | जीवन का प्रथम आश्रम ब्रह्मचर्य कहा जाता है | ब्रह्मचर्य एक ऐसा विषय है जिस पर आदिकाल से लेकर आज तक तीखी बहस होती रही है | स्वयं को ब्रह्म
24 अक्तूबर 2019
06 नवम्बर 2019
क्यों ये मन कभी शांत नहीं रहता ?ये स्वयं भी भटकता है और मुझे भी भटकाता है।कभी मंदिर, कभी गॉंव, कभी नगर, तो कभी वन।कभी नदी, कभी पर्वत, कभी महासागर, तो कभी मरुस्थल।कभी तीर्थ, कभी शमशान, कभी बाजार, तो कभी समारोह।पर कहीं भी शांति नहीं मिलती इस मन को।कुछ समय के लिये ध्यान हट जाता है बस समस्याओं से।उसके
06 नवम्बर 2019
07 नवम्बर 2019
🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻 *हमारे देश में हिंदू संस्कृति में बताए गए बारहों महीने में कार्तिक मास का विशेष महत्व है , इसे दामोदर मास अर्थात भगवान विष्णु के प्रति समर्पित बताया गया है | कार्तिक मास का क्या महत्व है इसका वर
07 नवम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x